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मंत्री जिस दिन अधिकारियों के चश्‍मे से देखना बंद करेंगे, उसी दिन हो जायेगा समाधान

-एमपीडब्‍ल्‍यू प्रशिक्षण के मसले पर संरक्षक ने रखे तर्क, 16वें दिन भी बेमियादी सत्‍याग्रह आंदोलन जारी

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। महानिदेशालय परिवार कल्याण परिसर में संविदा एमपीडब्ल्यू कर्मचारियों ने तीसरे सप्ताह 16वें दिन भी अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन जारी रखा। आज के आंदोलन की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश कॉन्‍ट्रेक्‍ट एमपीडब्ल्यू एसोसिएशन के प्रवक्ता शिवेंद्र मिश्रा द्वारा की गई। यह जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी सैयद मुर्तजा ने बताया कि धरना स्थल पर सभी संविदा कर्मचारियों का जोश बराबर बना हुआ है। वे अपनी मांग को माने जाने से कम पर बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं। आंदोलनकारी लगातार विधायकों, मंत्रियों, सांसदों और भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों से मिलकर अपनी बात रख रहे हैं। आज के अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन में जनपद मुजफ्फरनगर से, प्रतापगढ़ से, कानपुर से तथा लखनऊ से आंदोलनकारी धरना स्थल पर मौजूद रहे।

इस बीच संगठन संरक्षक विनीत मिश्रा ने कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है अधिकारी पूर्णत: निरंकुश है इनके ऊपर सरकार का कोई दबाव नहीं है। उन्‍होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान सरकार में विभागीय मंत्री एवं प्रदेश के मुखिया योगी, जिनसे प्रदेश के युवाओं को रोजगार पाने की उम्मीद थी व अधिकारियों की मनमर्जी के चलते पूरी होती नहीं दिख रही जिस दिन विभागीय मंत्री अधिकारियों के चश्मे से देखना बंद कर देंगे उसी दिन इस समस्या का निराकरण हो जाएगा।

विनीत मिश्रा ने कहा कि दुर्भाग्य है कि मंत्री तक संगठन संरक्षक द्वारा 6 बार इस प्रकरण से अवगत कराया गया लेकिन निराशा ही हाथ लगी है परंतु बदली हुई परिस्थितियों में संगठन ने पुनः निर्णय किया है एक बार पुनः मंत्री के समक्ष इस विषय को रखा जाएगा और मुख्यमंत्री तक भी यह विषय पहुंच सके उसके लिए तमाम रास्तों से इसके प्रयास किए जा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी को युवाओं ने जाति धर्म से ऊपर उठकर केवल न्याय पाने की अभिलाषा में प्रचंड बहुमत देकर सरकार बनाई थी आज युवा इन अधिकारियों की मनमर्जी के आगे हताश और निराश दिख रहा है ऐसा प्रतीत होता है की शीर्ष अधिकारीगण दोबारा इस सरकार को सत्ता में नहीं देखना चाहते इसीलिए जनहित के कामों में अड़ंगा डाल रहे हैं। सरकार को समय रहते इन परिस्थितियों पर ध्यान देना चाहिए।  

उन्‍होंने बताया कि भारत सरकार के मेमोरेंडम में दिए गए दिशा-निर्देश के विरुद्ध शासन की कार्रवाई को लेकर संविदा एम.पी.डब्ल्यू. कार्मिकों द्वारा न्याय पाने के लिए उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ तथा इलाहाबाद में अब तक 46 वाद दायर किए गए हैं, जिसमें उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ द्वारा रिट में न्यायमूर्ति ने संविदा कार्मिकों को विभाग में रखने तथा मानदेय देने के आदेश पारित किए। एडिशनल चीफ स्टैंडिंग काउंसिल अभिनव एन त्रिवेदी ने 11 अक्टूबर 2014 को प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य, महानिदेशक परिवार कल्याण सहित अन्य अधिकारियों को प्रेषित पत्र उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ की रिट में पारित आदेश की भावना से अवगत कराते हुए संविदा कार्मिकों को कार्य पर लेने के आदेश दिए।

उन्‍होंने बताया कि अब तक दोनों जगहों पर मिलाकर 46 वाद दायर किए जा चुके हैं इन सभी में उक्त कंसीडरिंग आदेश पारित हैं। इन्हीं में से एक रिट में पारित आदेश को विभाग में लागू कराने के लिए रिट याचिका संख्या 5520/ 2016 लानी पड़ी जिससे घबराकर शासन अपने निरीह अधिकारियों पर कार्यवाही करके विशेष अपील दाखिल कर रहा है। जबकि उक्त रिट में पारित आदेश के विरुद्ध तत्कालीन सचिव एवं उत्तर प्रदेश हेल्थ स्ट्रेंथनिंग परियोजना निदेशक ने 26 सितंबर 2016 को संविदा एम.पी.डब्ल्यू.को विभाग से निकालने के नियम विरुद्ध आदेश पारित किए थे जबकि यह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था। आज लगभग 6 वर्ष बाद अंतरिम आदेश के विरुद्ध शासन विशेष अपील योजित कर रहा है।

विनीत मिश्रा ने कहा कि यहां पर प्रश्न उठता है जो अधिकारी दोषी उस पर क्या कार्रवाई की गई उसको बचा कर दूसरे अधिकारियों पर कार्रवाई करके अपील का ग्राउंड बनाया जा रहा है जिसका कोई मतलब ही नहीं। उन्‍होंने कहा कि संगठन ने शासन की इस साजिश को बेनकाब करने का फैसला लिया है इस अपील को खारिज कराने का पुरजोर प्रयास किया जाएगा।

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