सुविधा होती तो बेगम मुमताज महल की मृत्यु इस कारण न होती

ट्रांस मेडीकॉन की प्री कांफ्रेंस एवं वर्कशॉप का आयोजन

 

लखनऊ. बेगम मुमताज महल की मृत्यु अत्यधिक रक्तस्राव से हुई थी लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है. स्वीडन में प्रसूति के पश्चात रक्त स्राव से होने वाली मृत्यु की दर अत्यधिक कम है उस दर को प्राप्त करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए. यह बात आज आकांक्षा समिति की अध्यक्ष डॉ. प्रीति कुमार ने किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग द्वारा ट्रांस मेडिकॉन 2017 की प्री कांफ्रेंस एवं वर्कशाप में कही. ट्रांसमेडिकॉन  की प्री कांफ्रेंस एवं वर्कशाप का उद्घाटन कलाम सेण्टर में हुआ। डॉ. प्रीति कुमार ने ब्लड ट्रांसफ्यूजन टेक्नोलॉजी मे प्रशिक्षण पर जोर देते हुए कहा की ऐसी कार्यशालाओं से इस तकनीक के विभिन्न विधाओं में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्राप्त होगा तथा वो जनसमान्य की सेवा कर सकेंगे। रक्त न केवल जीवन बचाता है बल्कि यह जीवन दायक है। रक्त द्वारा मातृ एवं शिशु का आपसी सम्बंध स्थापित होता है।

कार्यक्रम अध्यक्ष कुलपति प्रो0 मदनलाल ब्रह्म भट्ट ने ब्लड ट्रांसफ्यूजन की महत्ता को बताते हुए कहा कि केजीएमयू में 4000 से अधिक बेड है तथा आउट डोर में रोजाना 6 से 8 हजार मरीज आते है। इन सबकी रक्त की आपुर्ति निर्बाधरूप से ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग द्वारा की जाती है। इसके लिए उन्होने प्रो0 तूलिका चंद्रा की सराहना की। उन्होंने  बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा नेट टेस्ट से युक्त सुरक्षित रक्त मरीजो को प्रदान किया जाता है।

डा. विनोद जैन ने बताया कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन टेक्नोलोजी में 30 प्रशिक्षणार्थियों के प्रशिक्षण के लिए प्रस्ताव शासन को केजीएमयू इंस्टीट्यूट ऑफ़ पैरामेडिकल साइंसेज द्वारा भेजा गया है, जिसकी शीघ्र ही सहमति शासन से मिल जायेगी। विजन 2025 का उल्लेख करते हुए उन्होंने का कि रक्त की मांग कम हो सकती है परंतु ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन  के आयाम स्टेम सेल बैकिंग, स्कीन, बोनमैरो बैंकिंग, क्रायोबायोलोजी एवं जेनेटिक मैनुपुलेशन के रूप में अत्यन्त विस्तृत है एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग इस क्षेत्र की ओर अग्रसर है।

कार्यक्रम में प्रो0  तूलिका चंद्रा, विभागाध्यक्ष, ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने बताया कि आज के इस प्री-कांफ्रेस में चार कार्यशालाओ का आयोजन किया गया। इस तरह की कार्यशालाएं ब्लड बैंकर्स के शिक्षण एवं प्रशिक्षण एवं विद्यार्थियों के प्रशिक्षण में अहम योगदान देती है। उपरोक्त कार्यशालाओं का विषय ब्लड  बैकिंग में गुणवत्ता का निर्धारण एवं इम्मुनोहेमेटोलोजी   की गुणवत्ता में किस प्रकार से सुधार किया जाए, किस प्रकार क्वालिटी कंट्रोल किया जाए इस सम्बंध में वक्ताओं द्वारा बताया गया। कार्यक्रम में ब्लड बैंकर्स को रक्त संक्रमण के विभिन्न प्रतिक्रियाओं के सम्बंध में बताया गया। दूसरे वर्कशाप में ब्लड बैंकर्स और चिकत्सकों एवं बाल चिकित्सकों को प्लास्माफेरेसिस को किस प्रकार कर रोगियों  का जीवन को बचाया जाए इस सम्बंध में भी बताया गया

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