सीएम के निर्देश से अब ‘सेटिंग’ करके नौकरी चला रहे डॉक्‍टरों के माथे पर लकीरें तो खिचेंगी ही !

डॉक्‍टर सीएचसी-पीएचसी में निवास करें या फि‍र आधा किलोमीटर के दायरे में

लखनऊ। मुख्‍यमंत्री ने उत्‍तर प्रदेश के चिकित्‍सकों विशेषकर प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों, सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर तैनात चिकित्‍सकों के लिए चेतावनी की घंटी बजा दी है, स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में सुधार के लिए चिकित्‍सकों को अब अस्‍पताल पर या अस्‍पताल के आधा किलो‍मीटर के दायरे में निवास करना होगा। यानी एक बार फि‍र से ‘सेटिंग’ के खेल पर लगाम लगाने की तैयारी है। हालांकि यह आदेश पहले से हैं लेकिन इन पर अमल न के बराबर होता है। डॉक्‍टर्स वहां पर सुविधाओं के अभाव का हवाला देकर परिवार के साथ रहने में दिक्‍कतों का तर्क दे चुके हैं।

 

मुख्‍यमंत्री के इस फरमान की जानकारी लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर नरेंद्र अग्रवाल ने गत दिवस जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संपन्न डीएचएस बैठक में देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने समस्त जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की बैठक में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए यह निर्देश दिए हैं कि सभी चिकित्सक अपने अपने चिकित्सालय , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में निवास करें।

 

उनका कहना था कि यदि सरकारी आवास उपलब्ध नहीं है तो चिकित्सालय से 500 मीटर की दूरी तक किराए का मकान लेकर उसमें निवास करें। मरीज हित की दिशा में एक और आदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह अपेक्षा की है कि एंबुलेंस की उपलब्धता में सुधार लाया जाए तथा प्रत्येक रोगी को प्रत्येक दशा में जल्दी से जल्दी एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई रोगी चिकित्सालय में आता है तो उसको तुरंत ही स्ट्रेचर,व्हील चेयर उपलब्ध कराई जाए और तुरंत ही उसका इलाज शुरू कर दिया जाए।

 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के कार्यो की चर्चा करते हुए कहा कि आप लोग अच्छा कार्य कर रहे हैं लेकिन इन छोटी-छोटी बातों से विभाग की छवि खराब होती है। अतः इसमें सुधार की आवश्यकता है। चिकित्सकों की चिकित्सालय में उपलब्धि प्रत्येक दशा में सुनिश्चित की जाए।