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लेप्रोसीमैन डॉ विवेक कुमार को सृजन प्रेरणा सम्मान

-35 वर्षों से कुष्ठ रोगियों की नि:शुल्क चिकित्सा कर रहे, अब तक 2,75,000 मरीजों को देख चुके हैं डॉ विवेक

-यूपी प्रेस क्लब और उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में सृजन सम्मान समारोह आयोजित

सेहत टाइम्स

लखनऊ। यूपी प्रेस क्लब और उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार 29 जून को यहां यूपी प्रेस क्लब में 170वां सृजन सम्मान एवं काव्य समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में साहित्यकार दिनेश दाहिर आजमगढ़ी को सृजन सम्मान एवं समाजसेवी व वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ लेप्रोसीमैन डॉ विवेक कुमार को सृजन प्रेरणा सम्मान से सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि गिरधर खरे, अध्यक्ष सच्चिदानंद शलभ, हसीब सिद्दीकी, स्माइलमैन सर्वेश अस्थाना और सुभाष गुरुदेव ने दोनों विभूतियों को शॉल व प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।

सर्वेश अस्थाना ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि डॉ. विवेक कुमार ऐसे व्यक्ति हैं जो सुबह से लेकर दोपहर तक आधे दिन नि:शुल्क सेवा करते हैं और 30 कुष्ठ रोगियों और निर्धन त्वचा रोगियों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराते हैं, डॉ विवेक अब तक 2,75,000 मरीजों को नि:शुल्क देख चुके हैं। हमें उनको सम्मानित करते हुए गर्व महसूस हो रहा है। डॉ विवेक कुमार को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है, इनमें प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार आईएलडीएस सर्टिफिकेट ऑफ़ अप्रिसिएशन अवार्ड 2024 (ILDS Certificate of Appreciation Awards 2024 शामिल है, इस पुरस्कार के लिए भारत से इकलौते डॉ विवेक कुमार को चुना गया था।

इस मौके पर डॉ विवेक कुमार के साथ उनकी पत्नी ममता तथा बेटी अदिति भी उपस्थित रहीं। पिता के बारे में बोलने के लिए मंच पर आमंत्रित किये जाने पर अदिति ने कहा कि मैं अपने पिता को लगभग 35 साल से त्वचा रोगियों की फ्री सेवा करते देख रही हूं, मेरे लिए पिता और बाबा (दादाजी) दोनों ही बहुत प्रेरणास्रोत हैं, उनके कार्यों का एक प्रतिशत भी अगर मैं अपने जीवन में कर पायी तो मेरे लिए बड़ी बात होगी। ज्ञात हो डॉ विवेक कुमार के पिता डॉ रामकृष्ण को 2012 में उनकी सामाजिक सेवाओं के लिए पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ विवेक कुमार ने कहा कि मुझे सम्मानित करने के लिए मैं आभार प्रकट करता हूं। मेरे पिताजी मेरे प्रेरणास्रोत रहे, उन्होंने मेरे करियर की शुरुआत में ही कह दिया था कि जो कुछ तुमने थ्योरिटिकल सीखा है उसे प्रैक्टिकल करने के लिए गांव में ही जाना होगा। उन्होंने कहा कि 1985 में मैंने प्रैक्टिस शुरू की थी, 1990 से अब तक रोजाना सुबह के तीन घंटे समाजसेवा करते हुए मरीजों की नि:शुल्क सेवा करता हूं। उन्होंने बताया कि अब तक वे कई प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी नि:शुल्क सेवाएं दे चुके हैं। इनमें एसजीपीजीआई में 10 वर्ष, चारबाग स्थित हरबिलास अस्पताल में 30 वर्ष तक, सदर के कैंट अस्पताल में 16 साल तक, विवेकानंद हॉस्पिटल में दो वर्ष, कृषि विश्वविद्यालय में तीन साल तथा मोहनलालगंज स्थित लेप्रोसी हॉस्पिटल में 35 वर्षों से मरीजों को देख रहे हैं। समारोह के दौरान आयोजित कवि सम्मेलन में अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।