जागरूकता की रौशनी लेकर लखनऊ पहुंची स्‍माइल टॉर्च

कटे होठ-तालू से ग्रस्‍त बच्‍चों के चेहरे पर मुस्‍कान के लिए फ्री सर्जरी कराती है स्‍माइल ट्रेन

सिर्फ क्‍लेफ्ट होठों की सर्जरी ही नहीं, स्‍कूल की फीस भी दे रही  संस्‍था

लखनऊ। जन्‍मजात कटे होठ और तालू से ग्रस्‍त बच्‍चों की इस विकृति को सर्जरी से दूर कर उसके चेहरे पर मुस्‍कान लाने के कार्य में लगी अमेरिका की संस्‍था स्‍माइल ट्रेन भारत में भी 185 सरकारी और गैर सरकारी अस्‍पतालों की पटरियों पर दौड़ रही है। ऐसे बच्‍चों को खोजने और उनकी सर्जरी कराने के प्रति जागरूकता के लिए स्‍माइल ट्रेन टॉर्च वाराणसी से शुरुआत कर आजकल भारत के शहरों का भ्रमण कर रही है। इसी क्रम में टॉर्च शनिवार को लखनऊ पहुंची। यहां केजीएमयू स्थित प्‍लास्टिक सर्जरी विभाग में चल रहे स्‍माइल ट्रेन प्रोजेक्‍ट के सेंटर पर पहुंची यह टॉर्च रविवार को हेल्‍थ सिटी हॉस्पिटल स्थित सेंटर द्वारा आयोजित बड़े समारोह में पहुंचेगी।

केजीएमयू के प्‍लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड प्रो एके सिंह की अध्‍यक्षता में आयोजित समारोह में स्‍माइल ट्रेन की एशिया हेड ममता कैरन एवं दक्षिण एशिया हेड रेनू मेहता भी उपस्थित थीं। रेनू मेहता ने बताया कि स्‍माइल ट्रेन बिना किसी भेदभाव के किसी भी वर्ग के परिवार के कटे होठ-तालू वाले बच्‍चों की सर्जरी मुफ्त कर रहा है। अब तक लगभग साढ़े पांच लाख से ज्‍यादा बच्‍चों के चेहरे पर मुस्‍कान बिखेर चुकी स्‍माइल ट्रेन प्‍लास्टिक सर्जरी से जुड़े सर्जन्‍स, ऐनेस्‍थेटिक्‍स, नर्स व अन्‍य स्‍टाफ की ट्रेनिंग की भी व्‍यवस्‍था करती है।

उन्‍होंने बताया कि चूंकि बच्‍चों के जीवन में समग्र मुस्‍कान लाना स्‍माइल ट्रेन का उद्देश्‍य है, इसलिए संस्‍था द्वारा ऑपरेशन के बाद बच्‍चे को स्‍पीच थैरेपी की भी व्‍यवस्‍था करती है। यही नहीं अगर किसी बच्‍चे को स्‍कूल में जाने में आर्थिक कठिनाई आ रही है तो स्‍माइल ट्रेन बच्‍चे की स्‍कूल फीस भी देती है। सर्जरी के दौरान सर्जरी के लिए अस्‍पताल आने-जाने, ठहरने का खर्च भी स्‍माइल ट्रेन ही वहन करती है।

डॉ एके सिंह ने बताया कि इसका सटीक कारण अभी नहीं जा सका है, लेकिन फि‍र भी वंशानुगत एक प्रमुख कारण हो सकता है। उन्‍होंने बताया कि यह भी देखा गया है कि जिन परिवारों में आर्थिक रूप से विपन्‍नता है, वहां इसके होने की संभावना ज्‍यादा रहती है।