-आरएमएलआई के जनरल सर्जरी विभाग में सफलतापूर्वक की जा रही लैप्रोस्कोपिक बिलियरी रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी

सेहत टाइम्स
लखनऊ। पित्त की थैली (गॉलब्लैडर) की लैप्रोस्कोपिक अथवा ओपन सर्जरी के दौरान पित्त नली (बाइल डक्ट) में चोट लगना जनरल एवं हेपेटोबिलियरी सर्जरी की सबसे गंभीर और जटिल जटिलताओं में से एक माना जाता है। ऐसी चोटों के कारण लंबे समय तक पित्त का रिसाव, बार-बार संक्रमण, पीलिया, यकृत को नुकसान, बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता तथा कई बार मृत्यु तक की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इससे न केवल मरीज एवं उसके परिवार को अत्यधिक शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्ट उठाना पड़ता है, बल्कि युवा सर्जनों के आत्मविश्वास पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ में उत्तर प्रदेश एवं आसपास के राज्यों से इस प्रकार की जटिल पित्त नली की चोटों के अनेक रेफरल मरीज लगातार उपचार के लिए आ रहे हैं। यद्यपि ऐसे मामलों का उपचार प्रायः सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागों में किया जाता है, लेकिन संस्थान के जनरल सर्जरी विभाग ने दूरबीन विधि से इन जटिल चोटों के सफल पुनर्निर्माण (लैप्रोस्कोपिक बिलियरी रिकंस्ट्रक्शन) में विशेष दक्षता विकसित की है।
लगातार रिसाव हो रहा था पित्त का
हाल ही में सिद्धार्थनगर निवासी 51 वर्षीय महिला का सफल उपचार किया गया। उनकी गॉलब्लैडर की ओपन सर्जरी 2 फरवरी 2026 को बैठपुर में हुई थी, जिसके बाद पेट की ड्रेन से लगातार सुनहरे पीले रंग का पित्त निकलता रहा। लगभग दो माह तक बीआरडी मेडिकल कॉलेज में उपचार के बाद उन्हें लोहिया संस्थान रेफर किया गया। संस्थान में भर्ती होने पर मरीज का पोषण स्तर सुधारा गया, विस्तृत जांचें की गईं तथा एमआरसीपी में स्ट्रासबर्ग E3–E4 प्रकार की पित्त नली की गंभीर चोट की पुष्टि हुई। आवश्यक तैयारी के बाद 20 जून 2026 को पुनः भर्ती कर 25 जून 2026 को दूरबीन विधि से लैप्रोस्कोपिक रू-एन-वाई हेपेटिकोजेजुनोस्टॉमी सफलतापूर्वक की गई। मरीज का स्वास्थ्य तेजी से सुधरा और सातवें पोस्टऑपरेटिव दिन उसे स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई।
ओपन सर्जरी के दौरान लगी थी चोट
इसी प्रकार एक अन्य मरीज ईशा देवी, 31 वर्ष, तीन बच्चों की मां, जिनकी गॉलब्लैडर की ओपन सर्जरी 15 जनवरी 2026 को अकबरपुर में हुई थी, 11 फरवरी 2026 को लगातार बुखार एवं पीलिया की शिकायत के साथ संस्थान पहुंचीं। जांच में स्ट्रासबर्ग E3 प्रकार की पित्त नली की चोट पाई गई। जनरल सर्जरी विभाग द्वारा उनका दूरबीन विधि से हेपेटिकोजेजुनोस्टॉमी सफलतापूर्वक किया गया तथा उन्हें छठे पोस्टऑपरेटिव दिन स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, पित्त नली की गंभीर चोटों में पहली पुनर्निर्माण सर्जरी को “बेस्ट चांस रिपेयर” माना जाता है, क्योंकि इसी में दीर्घकालिक सफलता की संभावना सर्वाधिक होती है। ऐसी चोटों में हेपेटिकोजेजुनोस्टॉमी ही सबसे प्रभावी एवं निश्चित उपचार है। यदि यह सर्जरी दूरबीन विधि से की जाए तो मरीज को कम दर्द, कम संक्रमण, कम अस्पताल प्रवास तथा शीघ्र स्वस्थ होने का लाभ मिलता है।
इन दोनों जटिल सर्जरियों का नेतृत्व प्रो. डॉ. विकास ,जनरल सर्जरी विभाग ने किया। उनके साथ डॉ. साद मोहम्मद एवं डॉ. शुभदा सहायक सर्जन रहे। सर्जरी रेजिडेंट्स डॉ. समाया बाजपेयी, डॉ. पारस साहू एवं डॉ. शिवांगी ने ऑपरेशन एवं मरीजों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया का दायित्व डॉ. सर्वजीत एवं उनकी टीम ने सफलतापूर्वक निभाया। ऑपरेशन थिएटर टीम में कविता, पूजा, अमर, अज़ीज़ी, देवेश एवं अनेक ने ओटी इंचार्ज डेनी डेविड के नेतृत्व में उत्कृष्ट समन्वय एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया, जिससे ये अत्यंत जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हो सकीं।
इन सफलताओं ने यह सिद्ध किया है कि डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान का जनरल सर्जरी विभाग जटिल पित्त नली की चोटों के दूरबीन विधि से पुनर्निर्माण में उत्तर भारत के अग्रणी सरकारी केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है तथा ऐसे मरीजों के लिए नई आशा का केंद्र बनकर उभर रहा है।
निदेशक ने की सर्जरी टीम की सराहना
इस उपलब्धि पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. सी. एम. सिंह ने पूरी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अत्याधुनिक दूरबीन सर्जरी न केवल मरीजों को उच्च गुणवत्ता का उपचार उपलब्ध कराती है, बल्कि संस्थान की शैक्षणिक एवं चिकित्सीय उत्कृष्टता को भी नई पहचान दिलाती है। उन्होंने टीम के समर्पण, तकनीकी दक्षता एवं उत्कृष्ट कार्य की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान कर संस्थान का नाम राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक गौरवान्वित करने की शुभकामनाएं दीं।

Sehat Times | सेहत टाइम्स Health news and updates | Sehat Times