शोध बताता है कि दूसरों की मदद करने वाले रहते हैं ज्‍यादा प्रसन्‍न

-आंतरिक प्रसन्‍नता पाने के टिप्‍स बताये केजीएमयू के प्रोफेसर ने

-‘लर्न टू गिव एंड बी हैप्पी कार्यक्रम का यू ट्यूब से सीधा प्रसारण

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के अधिष्ठाता एवं प्रोफेसर ऑफ सर्जरी डॉ विनोद जैन ने बताया कि दूसरों की मदद करना मन को बहुत खुश रखता है। उन्‍होंने बताया कि मस्तिष्क के एम0आर0आई0 के द्वारा अध्ययन करने में यह पाया गया कि वे लोग जो दूसरों की सहायता करते हैं उनके मस्तिष्क में प्रसन्नता की तरंगें ज्यादा उत्पन्न होती हैं।

रविवार को प्रो विनोद जैन ने कोरोना संक्रमण काल में आंतरिक रूप से प्रसन्न रहने के लिए यूट्यूब में सजीव प्रसारण के माध्यम से ‘लर्न टू गिव एंड बी हैप्पी’ कार्यक्रम का आयोजन कर आमजन को प्रसन्नचित्त रहकर आंतरिक रूप से स्वस्थ रहने के प्रति जागरूक किया। लगभग 32 मिनट तक चले इस प्रसारण को शनिवार शाम तक पांच सौ लोगों द्वारा देखा जा चुका था।

डॉ विनोद जैन ने एक वैज्ञानिक शोध का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका में मिशेल नार्टन एवं उनके सहयोगी द्वारा एक शोध में पाया गया कि जो व्यक्ति दूसरों के ऊपर पैसे खर्च करते हैं वह अपने ऊपर खर्च करने वालों के मुकाबले ज्यादा प्रसन्न रहते हैं।

डॉ विनोद जैन ने प्रसन्न रहने के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रोफेशनल कार्यों में व्यस्तता के बावजूद कुछ समय अपने घर-परिवार को भी देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अपने कार्यालय में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किए गए कार्य की सदैव प्रशंसा करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि आंतरिक खुशी के लिए दूसरे की मदद करने से भी आत्मसंतुष्टि प्राप्त होती है इसलिए जितना संभव हो सके दूसरों की मदद करने का प्रयास करें फिर चाहे वह व्यक्ति आपके ऑफिस में कार्य करने वाला कोई हो या आपका पड़ोस अथवा घर-परिवार से जुड़ा कोई व्यक्ति। उन्होंने बताया कि दूसरों की सहायता करने से मन आंतरिक रूप से प्रसन्न रहता है।

डॉ विनोद जैन ने बताया कि किसी भी व्यक्ति से बात करते समय उसे पूरे समय एवं ध्यान देना चाहिए और यदि आप व्यस्त हैं उस व्यक्ति से थोड़ी देर बाद बात करने का निवेदन करें ताकि आप उस व्यक्ति की समस्या पर पूरा ध्यान और समय दे सकें। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अपने पास मदद के लिए आए व्यक्ति को पूरा सम्मान दें और उसके द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करें। उन्होंने बताया कि ऐसे व्यक्ति से सदैव मुस्कुरा कर मिलें जो आपके पास अपनी कोई समस्या लेकर आया हो। उन्‍होंने बताया कि जब आप अंदर से परेशान हों तो अपने अंदर के ज्ञान को दूसरों में बांटने का कार्य करें, इससे आपके अंदर का तनाव दूर होगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि किसी दूसरे से मदद लेने के बाद सदैव दूसरों को धन्यवाद देना न भूलें इससे आपकी मदद करने वाले को प्रसन्नता महसूस होगी।

डॉ विनोद जैन ने बताया दूसरों की गलती को क्षमा करने की कला सीखना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है, इससे आपको आंतरिक प्रसन्नता का आभास होगा तथा बिना अपेक्षा के मदद करने का गुण आना भी आवश्यक है इससे आपको कभी आंतरिक कष्ट नहीं होगा जो कि दुखी होने का सबसे बड़ा कारण होता है।

उन्‍होंने बताया कि इस कार्यक्रम के सफल संचालन में के0जी0एम0यू0 पैरामेडिकल साइंसेस के राघवेन्द्र शर्मा एवं शालिनी गुप्ता का विशेष सहयोग रहा।