-एससी-एसटी मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने राष्ट्रपति, पीएम, राज्यपाल, सीएम, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष व निदेशक को लिखा पत्र

सेहत टाइम्स
लखनऊ। शेड्यूल कास्ट/ट्राइब मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने विश्वविद्यालयों में आरक्षित वर्ग के कुलपतियों, निदेशकों, शिक्षकों के कम प्रतिनिधित्व पर ध्यानाकृष्ट करते हुए इसके लिए आरक्षण विरोधी, जातिवादी असामाजिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया है। एसोसिएशन ने मांग की है कि विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों के लिए आरक्षण वर्ग के प्रतिनिधि का चयन संस्थान के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा चुनाव के माध्यम से कराया जाना चाहिये। इस सम्बन्ध में एसोसिएशन द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष व निदेशक को पत्र लिखा है।
सरकार की मंशा के विरुद्ध कार्य
एसोसिएशन के महासचिव डॉ हरी राम द्वारा भेजे गये पत्र में लिखा है कि सरकार की सबका साथ सबका विकास की स्पष्ट नीति है परन्तु कुछ आरक्षण विरोधी जातिवादी असामाजिक तत्व सरकार की मंशा के विरुद्ध कार्य करते है। इनके द्वारा आरक्षित वर्ग के अभ्यार्थियों को अनुपयुक्त कह कर चयन नहीं किया जाता हैं, परिणाम स्वरुप आज देश के विश्वाविद्यालयों में आरक्षित वर्ग के कुलपतियों, निदेशकों और शिक्षकों का कोटा पूरा नहीं हो पाया है और उनका प्रतिनिधित्व बहुत ही कम है।
पत्र में कहा गया है कि चयन समिति / पदोन्नति समिति / जाँच समिति/अनुशासन समिति मे संस्थान के प्रमुख (कुलपति, निदेशक, प्रधानाचार्य आदि) द्वारा आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधि का नामांकन अपनी सुविधा के अनुसार किया जाता हैं। संस्थान प्रमुख द्वारा ऐसे प्रतिनिधि नामित किये गये जाते हैं, जिनके विरुद्ध कोई जाँच चल रही होती है या संस्थान के प्रमुख द्वारा प्रसाद के रूप में किसी पद पर बैठाया गया होता है या जिनकी आरक्षित वर्ग के प्रति निष्ठा/ उनकी जाति संदिग्ध होती है।
हित के बजाय अहित हो रहा
पत्र में कहा गया है कि इस प्रकार से किये गये नामांकन से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का हित के बजाय अहित हो रहा है। परिणाम स्वरुप नॉट फाउंड सूटेबल (NFS), साक्षात्कार मे आरक्षित वर्ग को कम अंक या आरक्षित वर्ग के पीड़ित अभ्यर्थी के ही विरुद्ध रिपोर्ट दी जाती है।

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