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खुशखबरी : आईआईटीआर का बनाया प्‍यूरीफायर साफ करेगा सिर्फ दो पैसे में एक लीटर पानी

‘मेक इन इंडिया’ मिशन के तहत तैयार उपकरण सौर ऊर्जा से भी होगा संचालित  

लखनऊ। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद, भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ ने ओनीरटीएम के नाम से एक अभिनव तकनीक “पेयजल कीटाणुशोधन प्रणाली” विकसित की है जिसे बुधवार को मैसर्स ब्लूबर्ड वाटर प्यूरिफायर, नई दिल्ली को डॉ हर्षवर्धन, केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री और उपाध्यक्ष, सीएसआईआर, की उपस्थिति में स्थानांतरित किया गया।  यह पानी के निरंतर उपचार के लिए उपयोगी है और रोगाणु कारक बैक्टीरिया, कवक, प्रोटोजोआ और सिस्ट आदि को नष्ट कर देता है ताकि पीने योग्य पानी निर्धारित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों (बीआईएस, डब्ल्यूएचओ इत्यादि) के अनुसार हो और घरेलू और समुदायों को सुरक्षित पेयजल मुहैया कर सके। इससे सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल केवल 2 पैसे/लीटर की लागत से प्रदान हो सकेगा। यह प्रौद्योगिकी विशेष रूप से ग्रामीण लोगों के लिए सहायक होगी क्योंकि यह सौर ऊर्जा से संचालित हो सकती है और यह ‘मेक इन इंडिया’ मिशन के अनुरूप है।

 

इस अवसर पर बोलते हुए, डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि पेयजल के माध्यम से संक्रमण अनेक रोगों और मृत्यु दर में वृद्धि का कारण है, विशेष रूप से बच्चों में। सीएसआईआर-आईआईटीआर द्वारा विकसित ओनीरटीएम  सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल केवल 2 पैसे/लीटर की लागत से प्रदान कर सकेगा। डॉ हर्षवर्धन ने आगे कहा कि इसके सामुदायिक स्तर का मॉडल 450 एलपीएच क्षमता का है जिसे 5000 से 1 लाख लीटर प्रति दिन तक बढ़ाया जा सकता है; और यह रखरखाव और झिल्ली मुक्त भी है। यह प्रौद्योगिकी विशेष रूप से ग्रामीण लोगों के लिए सहायक होगी क्योंकि यह सौर ऊर्जा से संचालित हो सकती है और यह ‘मेक इन इंडिया’ मिशन के अनुरूप है।

 

डॉ शेखर सी मंडे, महानिदेशक सीएसआईआर और सचिव, डीएसआईआर ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ओनीरटीएम-एक सुरक्षित पेयजल उपकरण विकसित करने में सीएसआईआर-आईआईटीआर वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में, भारत के ग्रामीण समुदाय का एक बड़ा हिस्सा ऐसे पानी का उपभोग कर रहा है जो डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित पीने के पानी की गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, “स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित पेयजल की पहुंच आवश्यक है और यह एक बुनियादी मानव अधिकार और स्वास्थ्य संरक्षण के लिए प्रभावी नीति का एक घटक है।

 

सीएसआईआर सदैव से आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न प्रौद्योगिकियों और उत्पादों को विकसित करने के लिए मिशन प्रोजेक्ट्स और फास्ट ट्रैक ट्रांसलेशन रिसर्च प्रोजेक्ट्स के माध्यम से ट्रांसलेशनल अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करता रहा है। इन कार्यक्रमों का मुख्य लक्ष्य आम लोगों के जीवन की गुणवत्ता और स्तर में सुधार लाना है।

 

प्रोफेसर आलोक धावन, निदेशक सीएसआईआर-आईआईटीआर ने जन साधारण के लिए इस नूतन नवाचार के उपयोग पर जोर दिया। उन्होने बताया कि ओनीरटीएम की छोटी इकाई विशेष रूप से घरों, सड़क खाद्य विक्रेताओं और छोटी प्रतिष्ठानों के लिए उपयुक्त है। उन्होंने माननीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन और डीजी सीएसआईआर डॉ शेखर सी मंडे को इस नवाचार में अपनी गहरी रूचि दिखाने और इस अवसर को अपनी उपस्थिति से सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया।