राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले कर्मचारियों का धरना- प्रदर्शन

-अनेक लंबित मांगों को लेकर यूपी के सभी जिलों में कर्मचारियों ने धरना देकर किया उपवास

-आगे की रणनीति तय करने के लिए शुक्रवार को बुलायी गयी बैठक

हजरतगंज लखनऊ

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। पुरानी पेंशन बहाली, वेतन विसंगति दूर करने, भत्तो की समानता, फ्रीज डी॰ए॰ बहाली व एरियर का भुगतान, कैशलेस इलाज सहित मुख्य सचिव के साथ हुए समझौतों पर कार्यवाही न होने के विरोध में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर राज्य कर्मचारियों ने आज उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में उपवास कर धरना देकर जिलाधिकारी के माध्यम से  मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। लखनऊ में स्थानीय प्रशासन द्वारा धारा 144 बताकर लोकतांत्रिक तरीके से किया जा रहे सांकेतिक आंदोलन को रोका गया। कर्मचारियों ने आक्रोशित होकर हजरतगंज से बीएन सिंह प्रतिमा स्थान तक रैली निकाली कर्मचारी नारेबाजी, मार्च करते हुए पूरे हजरतगंज से होते हुए आकर बीएन सिंह प्रतिमा पर जोरदार नारेबाजी की गई। कल 19 मार्च को बैठक आयोजित की गयी है, इसमें आगे की रणनीति तय करके उसकी घोषणा की जायेगी।

Hazratganj Lucknow

लखनऊ  के कर्मचारियों ने आज जी॰पी॰ओ॰ स्थित गाँधी प्रतिमा पर एकत्रित होकर जुलूस के रूप में स्व बी एन सिंह की प्रतिमा पर जोरदार धरना/प्रदर्शन किया। परिषद के लखनऊ जनपद अध्यक्ष सुभाष श्रीवास्तव की अध्यक्षता में उक्त कार्यक्रम सम्पन्न हुआ और संचालन जिलामंत्री संजय पाण्डेय ने किया। यहाँ राघवेन्द्र मिश्रा ए सी पी लखनऊ ने कमिश्नर के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित होकर ज्ञापन स्वीकार किया और अपने सम्बोधन में पदाधिकारियों व कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि आज ही यह ज्ञापन मुख्यमंत्री को प्रेषित कर दिया जाएगा।

Basti and Allahabad

परिषद के प्रदेश महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि 9 अक्टूबर 2018 के पूर्व अनेक आन्दोलनो के माध्यम से शासन व सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया था, जिसके फलस्वरूप मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक में परिषद की प्रमुख मांगों पर अनेक समझौते/निर्णय लिये गये थे, जिसका क्रियान्वयन आज तक लम्बित है।

Siddharthnagar

श्री मिश्रा ने बताया कि पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग परिषद द्वारा लगातार की जा रही है। बीती 19 से 27 फरवरी तक काला फीता बांधकर सरकार का ध्यानाकर्षण किया गया लेकिन सरकार द्वारा कोई सकारात्मक पहल नही की गई, जिसके बाद प्रदेश के सभी जनपदों में 17 मार्च तक जनजागरण किया गया लेकिन सरकार द्वारा कर्मचारियों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और मजबूरन कर्मचारियों को रोड पर आना पड़ रहा है।

Mahoba

इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी पी मिश्रा ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र व प्रदेश सरकार के कर्मचारी विरोधी रवैये से देश भर के कर्मचारियों में रोष व्याप्त हैं, पुरानी पेंशन बहाली, महंगाई भत्ते, एरियर सहित बहाल करने, निजीकरण रोकने राष्ट्रीय वेतन आयोग का गठन, आउटसोर्सिंग की स्थाई नीति व उपेक्षा सहित विभिन्न मुद्दों पर राष्ट्रीय आंदोलन की रणनीति जल्द ही घोषित हो सकती है।

Bareilly

कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के महासचिव शशि मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में कर्मचारी शिक्षकों का पूरा समर्थन परिषद के आंदोलन को है। मोर्चा कर्मचारियों के साथ हो रहे शोषण को किसी भी दशा में बर्दास्त नही करेगा।

Rae Bareilly

परिषद के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश रावत ने कहा कि चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, सिंचाई, कृषि, वन, राजस्व सहित विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगति केन्द्र सरकार द्वारा दूर की जा चुकी है परन्तु समझौतों के बावजूद प्रदेश में अभी वेतन विसंगति लम्बित है। अन्य संवर्गो की वेतन विसंगति एवं वेतन समिति की संस्तुतियों एवं शेष भत्तों पर अक्टूबर 2018 में ही मंत्रिपरिषद से निर्णय कराने का निर्णय लिया गया था, परन्तु दो वर्ष बाद भी अभी तक लम्बित है।

Unnao

परिषद की मांग पर वेतन विसंगति एवं वेतन समिति की संस्तुतियॉ एवं शेष बचे भत्तों पर मंत्रिपरिषद से अनुमोदन लिये जाने, पूर्व विनियमित कर्मचारियों की अर्हकारी सेवाएं को जोड़ते हुए पेंशन निर्धारित करने, डिप्लोमा इंजीनियर्स की भॉति ग्रेड वेतन 4600/- को इग्नोर करके 4800/- के ग्रेड वेतन के समान मैट्रिक्स लेवल अनुमन्य करनें, उपार्जित अवकाश में 300 दिन के संचय की सीमा को समाप्त करने, राजस्व संवर्ग, सींच पर्यवेक्षक, जिलेदार सेवा नियमावली, एवं तकनीकी पर्यवेक्षक नलकूप सेवानियमावली, अधीनस्थ वन सेवा नियमावली प्रख्यापित करने, सभी संवर्गो का पुनर्गठन, जिनकी सेवा नियमावली प्रख्यापित नही हैं, उसे प्रख्यापित कराने तथा वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी व्यवस्था लागू होने के उपरांत कैडर पुनर्गठन की कार्रवाई प्रस्तावित है देश की प्रतिष्ठित संस्था आई॰आई॰एम॰ द्वारा 2 वर्ष पूर्व ही रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया विभाग व शासन स्तर पर गठित समिति द्वारा भी अपनी रिपोर्ट 1 वर्ष पूर्व प्रस्तुत कर दिया गया। मुख्यमंत्री द्वारा तीन बार प्रेजेंटेशन करा लिया गया है प्रेजेंटेशन में दिए गए निर्देश के क्रम में विभाग द्वारा संशोधन भी किया जा चुका है। कैडर पुनर्गठन की कार्यवाही पूर्ण न होने से राजस्व वृद्धि के साथ-साथ विभाग का कार्य सुचारू रूप से नही चल पा रहा है।

निर्णय के बाद परिषद लगातार शासन का ध्यान आकृष्ट करता रहा है। शासन द्वारा संविदा/आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए स्थाई नीति का निर्माण फरवरी 2019 में पूर्ण कर लिया गया लेकिन अभी तक मंत्रिपरिषद से पारित नही कराया गया। संविदा व आउटसोर्सिंग कर्मचारियो की स्थाई नीति जारी न होने से कर्मचारियों का लगातार शोषण हो रहा है। कुछ विभागों में पूर्व से चली आ रही योजनाओं के कार्मिकों को सेवा से बाहर किए जाने की नोटिस पकड़ा दी गयी। इसी प्रकार समझौतों पर कार्यवाही तो नही हो सकी बल्कि उसके स्थान पर राज्य कर्मचारियों पर अभी तक प्राप्त हो रहे छः भत्ते समाप्त कर 3 डी॰ए॰ की किस्तों को फ्रिज करना जले पर नमक छिड़कने जैसा कार्य किया गया।

अनेक ऐसे संवर्ग है जिनमें छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियां व्याप्त है, वित्त विभाग द्वारा एक माह में परीक्षण कर कार्यवाही कराने का निर्देश दिया गया था परन्तु अभी तक उसपर कोई कार्यवाही सम्पन्न नही हुई है। केन्द्रीय कर्मचारियों की भांति भत्तों की समानता, वाहन भत्ता एवं मकान किराए भत्तें के संशोधन के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नही की गयी, जिससे केन्द्रीय एवं राज्य कर्मचारियों को प्राप्त हो रहे भत्तों में बड़ा अन्तर आ गया है।

प्रदेश में सीधी भर्ती अधिकतम आयु 40 वर्ष के दृष्टिगत ए0सी0पी0 में 08, 16 एवं 24 वर्ष की सेवा पर तीन पदोन्नति वेतनमान दिये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा अभी तक परीक्षण कर कोई प्रस्ताव नही बनाया गया। उपार्जित अवकाश के संचय की तीन सौ दिन की सीलिंग समाप्त कर सेवा निवृत्ति पर 600 दिनों का नकदीकरण दिये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा परीक्षण कर प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने का निर्णय लिया गया था, जिसपर दो वर्ष के पश्चात भी कोई कार्यवाही नही की गयी है। इस बींच कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उन्हे आर्थिक नुकसान हो रहा है। यह भी निर्णय लिया गया था कि एक समान शैक्षिक योग्यता वाले संवर्गों को एक समान वेतन भत्ते अनुमन्य किए जाये चाहे वे किसी भी विभाग में कार्यरत हो, परन्तु वित्त विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नही हो सकी है। बार-बार समझौतों के बावजूद कर्मचारियों की कैशलेस चिकित्सा अभी तक प्रारम्भ नही हो सकी जबकि पूर्व से मिल रहे चिकित्सा प्रतिपूर्ति भूगतान हेतु बजट के अनुदान की ग्रुपिंग में फेरबदल कर उसे और जटिल बना दिया गया, यहाँ तक कि सरकारी चिकित्सालयों में दवाओं के लोकल परचेज पर भी रोक लगा दी गयी। निर्णयों का क्रियान्वयन न कर शासन द्वारा 50 वर्ष पूर्ण कर रहे कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्त किया जा रहा है, जो कि नितान्त गलत है।

प्रदेश के एलोपैथिक, होम्योपैथिक, आयूर्वेदिक, यूनानी एवं वेटनरी फार्मासिस्ट सहित लैब टेक्नीषियन, आप्टोमेट्रिस्ट, बेसिक हेल्थ वर्कर पुरुष/महिला, प्रयोगशाला सहायक, इलेक्ट्रीशियन कम जनरेटर आॅपरेटर संवर्ग चिकित्सालयों की रीढ़ के रूप में कार्य कर रहें है, महत्वपूर्ण कार्य एवं दायित्व तथा शैक्षिक एवं तकनीकी योग्यता को देखते हुए वेतन समिति द्वारा वेतन उच्चीकरण कर राज्य में कार्यरत अन्य डिप्लोमा धारकों के बराबर करने का निर्णय लिया गया था। मुख्य सचिव द्वारा उक्त विसंगति को एक माह के अन्दर मंत्रिपरिषद से पारित कराकर लागू कराने का निर्णय बैठक में लिया गया था, परन्तु अभी तक उक्त समझौता शासन की फाइलो में दर्ज है, जिससे प्रदेश के कर्मचारियों का हजारो रूपया प्रतिमाह आर्थिक नुकसान हो रहा है।

परिषद ने मुख्य मंत्री को ज्ञापन भेजकर  मांग की है कि समझौतो का क्रियान्वयन कराने का निर्देश जारी करें साथ ही कर्मचारियों के उत्पीड़न को रोके।

धरने को परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष  गिरीश चन्द्र मिश्र, संगठन प्रमुख डा॰ के॰के॰ सचान, अशोक कुमार महामंत्री राजकीय नर्सेज संघ, डा॰ पी॰ के॰ सिंह संयोजक, फेडरेशन ऑफ फॉरेस्ट एसोसिएशन्स, फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव, मनोज मिश्रा, घनश्याम यादव, निगम कर्मचारी महासंघ, कैसर रजा, नगर निगम कर्मचारी महासंघ, नन्द किशोर मिश्रा, माध्यमिक शिक्षक संघ, अवधेश सिंह, विकास प्राधिकरण कर्मचारी महासंघ, फार्मासिस्ट फेडरेशन के महामंत्री अशोक कुमार, राम नरेश यादव अध्यक्ष, व आशीष पान्डे महामंत्री वन विभाग मिनि॰ एसो॰ कर्मचारी संघ, राजीव तिवारी, वित्त मंत्री परिषद, कुष्ठ कर्मचारी संघ के सतीश यादव, सहायक वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मो॰ नदीम महामंत्री अमित श्रीवास्तव, जे॰पी॰ मौर्या, वाणिज्य कर मिनि॰ कर्मचारी एसो॰, सिंचाई संघ के अध्यक्ष आर॰ के॰ पान्डे महामंत्री अवधेश मिश्रा, राजस्व अधिकारी संघ के अध्यक्ष विजय किशोर मिश्रा, महामंत्री नीरज चतुर्वेदी, सर्वेश पाटिल अध्यक्ष आप्टोमेट्रिस्ट एसो॰, ट्यूबवेल टेक्निकल कर्मचारी संघ उ॰प्र॰ के अध्यक्ष उमेश राव महामंत्री रजनेश माथुर, वाणिज्य कर मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसो॰ के महामंत्री जे॰ पी॰ मौर्य, बेसिक हेल्थ वर्कर एसो॰ के अध्यक्ष धनन्जय तिवारी महामंत्री एस॰ एस॰ शुक्ला, मातृ शिशु कल्याण महिला कर्मचारी संघ की अध्यक्षा मीरा पासवान, के॰जी॰एम॰यू॰ कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष प्रदीप गंगवार, महामंत्री राजन यादव, आर॰ एम॰ एल॰ आयुर्विज्ञान संस्थान कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रणजीत यादव, महामंत्री सच्चितानन्द मिश्रा, एन॰एच॰एम॰ कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मयंक सिंह, आर॰के॰पी॰ सिंह महामंत्री, एक्स-रे टेक्नीशियन एसो॰ बी॰एन॰ मिश्रा महामंत्री समाज कल्याण मिनि॰ एसो॰, डॉ आर॰एम॰एल॰ कर्मचारी अस्तित्व बचाओ मोर्चा अनिल कुमार, के डी॰डी॰ त्रिपाठी, राम मनोहर कुशवाहा, सुनील यादव मीडिया प्रभारी परिषद, का॰ सचिव अजय पान्डे, कमल श्रीवास्तव, आदि ने संबोधित किया।