कैन्सर, जीबी सिन्ड्रोम, क्रॉनिक रीनल फेल्योर, आईबीएस, थैलीसिमिया के होम्‍योपैथिक में सफल उपचार के प्रमाण प्रस्‍तुत

होम्योपैथिक साइंस कांग्रेस सोसायटी की आयोजित राष्ट्रीय होम्योपैथी संगोष्ठी सम्‍पन्‍न

 

लखनऊ। होम्‍योपैथी की मीठी गोलियां देखने में भले ही छोटी लगती हैं लेकिन अगर इनके गुणों की बात करें तो यह गागर में सागर भरे हुए हैं। यहां होम्योपैथिक साइंस कांग्रेस सोसायटी द्वारा यहां गोमती नगर में आयोजित राष्ट्रीय होम्योपैथी संगोष्ठी के दूसरे दिन देश के अनेक स्‍थानों से आये विशेषज्ञों ने होम्‍योपैथी से इलाज करने के अपने अनुभव रखे। दूसरे दिन कैन्सर, जीबी सिन्ड्रोम, क्रॉनिक रीनल फेल्योर, आईबीएस, थैलीसिमिया जैसे रोगों के सफल इलाज और उसके साक्ष्‍य रखे गये।

 

दिल्ली से आये नेहरू होम्योपैथिक मेडिकल कालेज के एसोसियेट प्रो0 डा0 बिपि‍न जेठानी ने होम्योपैथी द्वारा उपचारित कैन्सर, जीबी सिन्ड्रोम, क्रॉनिक रीनल फेल्योर, आईबीएस, थैलीसिमिया आदि के केसों का साक्ष्य सहित विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि होम्योपैथी द्वारा उपचार के लिए रोगी को समझना आवश्यक है तभी सटीक औषधि का चयन सम्भव है। दिल्ली के डा दीपक शर्मा ने बताया कि वायरस जनित रोगों जैसे स्वाइन फ्लू, चिकनपाक्स, खसरा, डेंगू, चिकुनगुनिया आदि का प्रबन्धन रोकथाम एवं जटिलताओं को होम्योपैथी द्वारा उपचारित किया जा सकता है। यह तथ्य साबित हो चुका है। यह दवाइयां पूरी तरह सुरक्षित हैं।

 

कोलकाता होम्योपैथिक मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो0 रजत चटोपाध्याय ने कहा कि उच्च रक्तचाप एवं डायबिटीज अनियमित जीवनशैली से जुड़े रोग है इनसे जीवनशैली में बदलाव कर बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि देश में बड़ी संख्या में उपलब्ध मानव शक्ति का उपयोग इन रोगों के मरीजों को चिन्हित करने, रोकथाम करने एवं प्रबन्धन में किया जा सकता है। सरकार कुछ योजनाओं में इनका सहयोग ले रही है परन्तु इनकी क्षमता का पूरी तरह उपयोग किया जाना चाहिए।

प्रो0 चटोपाध्याय ने वैज्ञानिक सत्र को सम्बोधित करते हुए बताया कि जीवन शैली में सुधारकर एवं होम्योपैथिक दवाओं का प्रयोग कर डायबिटीज एवं हाइपर टेंशन पर नियंत्रण किया जा सकता है। उन्होंने डायबिटीज एवं हाइपरटेंशन के होम्योपैथी द्वारा उपचारित रोगियों का अध्ययन प्रस्तुत किया।

 

पटना से आये जीडी मेमोरियल होम्योपैथिक मेडिकल कालेज के प्रो0 डा एमके साहनी ने बताया कि जीवन शैली जन्य रोग जैसे हृदय रोग, हृदयघात, मधुमेह, सीओपीडी, कैन्सर तेजी के साथ बढ़ रहे है और यह जनस्वास्थ्य के लिए गम्भीर समस्या हैं। उन्होंने कहा कि होम्योपैथिक चिकित्सक इनको आसानी से उपचारित कर सकता है परन्तु इसके लिए रोगी के मानसिक लक्षण, आचार-विचार व्यवहार आदि पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है।

 

संगोष्ठी के समापन सत्र के मुख्य अतिथि उप्र विधान सभा के सदस्य साकेन्द्र वर्मा थे। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि होम्योपैथी देश की जनता की मांग है। सरकार को इस पद्धति को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सकों को होम्योपैथी को प्रोफेशन के साथ-साथ मिशन के साथ काम करना चाहिए। इस अवसर पर आयोजन सचिव डा0 अनुरुद्ध वर्मा ने बताया कि होम्योपैथी वृद्धावस्था के रोग, मातृ एवं शिशु रोग, मानसिक रोग, चर्म रोग आदि ज्यादातर बीमारियों के उपचार में पूरी तरह कारगर है। उन्होंने इस अवसर पर आये हुए प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। समापन समारोह को उप्र होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के सदस्य डा एफबी वर्मा, डा पंकज त्रिपाठी, डा0 आशीष वर्मा, डा0 रजत चटोपाध्याय, डा0 पंकज श्रीवास्तव आदि ने सम्बोधित किया।