लोहिया संस्‍थान के निदेशक पद से प्रो एके त्रिपाठी हटाये गये, प्रो नुजहत एक बार फि‍र कार्यवाहक निदेशक

-संस्‍थान में चिकित्‍सा सेवाओं की निगरानी के लिए ओएसडी की भी तैनाती की गयी

आना प्रो नुजहत हुसैन का जाना प्रो एके त्रिपाठी का

लखनऊ। डॉ राम मनोहर लोहिय आयुर्विज्ञान संस्थान में अव्यवस्थाओं को लेकर मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की नाराजगी के बाद यहां के निदेशक डॉ एके त्रिपाठी पर गाज गिरी है, उन्‍हें निदेशक पद से हटा दिया गया है, निदेशक का कार्यभार जहां पूर्व में कार्यवाहक निदेशक रह चुकीं डॉ नुजहत हुसैन को कार्यवाहक निदेशक बना कर सौंपने के निर्देश हुए हैं, वहीं शासन ने चिकित्‍सा सेवाओं को लेकर संस्‍थान पर नजर रखने के लिए यहां एक विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के रूप में अनिल बाजपेई की तैनाती भी कर दी है।

बताया जाता है कि लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में बदहाल इमरजेंसी सेवाओं की शिकायत पहुंचने के बाद पिछले दिनों मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने संस्‍थान का दौरा कर स्‍वयं हालात देखे थे, अव्‍यवस्‍था सुधारने के निर्देश दिये लेकिन लापरवाही फि‍र भी जारी रही । इसी बीच एक घटना हो गयी जिसमें एक मरीज का शव कोविड टेस्ट के लिए घंटों रखा रहा, परिवारीजन भटकते रहे। ऐसे में विभागीय विशेष सचिव मार्कंडेय शाही के नेतृत्व में कमेटी बनाकर शासन ने जांच के आदेश दे दिए। तीन सदस्यीय कमेटी ने इमरजेंसी का निरीक्षण कर शासन को रिपोर्ट सौंपी। इसी के बाद यह निर्णय लिया गया है।

दरअसल डॉ त्रिपाठी के खिलाफ संस्‍थान के निदेशक के कार्यकाल से पूर्व जब वे केजीएमयू में कार्यरत थे, उस समय हुई अव्‍यवस्‍था के लिए डॉ त्रिपाठी को जिम्‍मेदार ठहराया गया था, इस बात को निदेशक पद के लिए आवेदन करते समय छिपाने की शिकायत भी संत कबीर नगर के सांसद ई.प्रवीण कुमार निषाद द्वारा राज्‍यपाल, मुख्‍यमंत्री, चिकित्‍सा शिक्षा मंत्री से की गयी थी।

आपको बता दें कि डॉ. नुजहत हुसैन पूर्व में भी कार्यवाहक निदेशक रह चुकी हैं। उन्होंने वर्ष 2013 से 2015 तक संस्‍थान का कार्य संभाला। इसके बाद डॉ. दीपक मालवीय ने 17 सितंबर 2015 से कार्यभार ग्रहण किया। डॉ मालवीय का कार्यकाल समाप्‍त होने के बाद ही प्रो एके त्रिपाठी की निदेशक पद पर नियुक्ति की गयी थी।