प्रो. सूर्यकांत को आईएमए से मिली मानद प्रोफ़ेसर की उपाधि

 

उत्तर प्रदेश के एकमात्र चिकित्सक, जिन्हें यह उपाधि मिली

 

प्रो. सूर्यकान्त

लखनऊ. चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सूर्यकान्त को इण्डियन मेडिकल एसोसियेशन द्वारा मानद प्रोफेसर की उपाधि से अंलकृत किया गया है। डा. सूर्यकान्त को यह मानद प्रोफेसर आई एम ए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. के के अग्रवाल की संस्तुति के आधार पर प्रदान की गयी। वे उ0प्र0 के एक मात्र चिकित्सा शिक्षक है, जिन्हे इस मानद उपाधि से अलंकृत किया गया है।

 

 

डॉ. सूर्यकांत को यह उपाधि चिकित्सा सेवा में उनके व्यापक योगदान को देखते हुए प्रदान की गयी है। डा. सूर्यकान्त इण्डियन चेस्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है। पूर्व में डा. सूर्यकान्त इण्डियन साइंस काग्रेस एसोसिएशन के मेडिकल साइंस प्रभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इण्डियन चेस्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुके है। ज्ञात रहे कि वे उत्तर प्रदेश ट्यूबरकुलोसिस टास्क फोर्स के चेयरमैन पद पर भी कार्यरत है।

 

 

डा0 सूर्यकान्त को ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन ऑफ़  इण्डिया, इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन, इण्डियन चेस्ट सोसाइटी, नेशनल कालेज ऑफ़ चेस्ट फिजिशियन आदि द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें प्राइड ऑफ़  इण्डिया व उ0 प्र0 सरकार द्वारा विज्ञान गौरव अवार्ड (विज्ञान के क्षेत्र में उ0प्र0 का सर्वोच्च पुरस्कार) और राज्य हिन्दी संस्थान द्वारा विश्वविद्यालय स्तरीय हिन्दी सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।

 

 

डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि मानद प्रोफेसर आई एम ए के रूप में वे आई एम ए के ब्राण्ड एम्बेसडर के रूप में कार्य करेगें। देश भर में आई एम ए की गतिविधियों को बढावा देगें तथा आई एम ए के चिकित्सकों को नई तकनीको से अपडेट करायेगें। उनकी प्राथमिकता इस बात पर भी होगी की राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई एम ए के सदस्य बढ़-चढ़ कर भागीदारी करें। उन्होने बताया कि इस संदर्भ में क्रियान्वयन हेतु निजी क्षेत्र के चिकित्सक और प्राइवेट प्रेक्टिश्नर  को भी जोडा जायेगा। डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि आई एम ए अब सक्रिय रूप से चिकित्सा शोध कार्यो में भी शामिल होगा ताकि नई तकनीके और गाइडलाइन्स खोजी जा सकें। ज्ञात हो कि डाॅक्टर सूर्यकान्त हिन्दी भाषा में चिकित्सा विषयक कई पुस्तके भी लिख चुके है। चिकित्सा शास्त्र में उनके शोध कार्यों और अन्य उल्लेखनीय योगदानों को दृष्टिगत कर उन्हे उ.प्र. एवं उड़ीसा के राज्यपाल द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।