गर्भवती हो या बच्‍चे, या फि‍र कोई अन्‍य, आपदा के समय उन्‍हें कैसे सम्‍भालें

सभी जिलों के चिकित्‍सकों के लिए केजीएमयू में आयोजित किया गया छह दिवसीय प्रशिक्षण

लखनऊ। किसी भी तरह की आपदा के समय चिकित्‍सकों को उस समय पैदा हुई स्थितियों से निपटने के लिए किये जाने वाले प्रबन्‍धन के साथ उसके समाधान का छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज शनिवार को किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍व विद्यालय में सम्‍पन्‍न हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्‍तर प्रदेश के सभी जिलों से आये प्रांतीय चिकित्‍सा सेवा के चिकित्‍सकों को प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों द्वारा आपदा के दौरान प्रभावित लोगों की देखरेख तथा उन्‍हें इस विपदा से बाहर निकालने के लिए किस प्रकार की चिकित्‍सा एवं प्रबंधन की आवश्‍यकता है, इसकी बारीकियां बतायी गयीं।

 

केजीएमयू के कलाम सेंटर में इमरजेंसी क्राइसेस मैनेजमेंट सॉल्यूशन एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 22 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक आयोजित किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों से आए 75 चिकित्सकों को आपदा के प्रबन्धन एवं उसके समाधान का प्रशिक्षण दिया गया।

समापन अवसर पर आयोजित समारोह में आयीं मुख्य अतिथि उत्‍तर प्रदेश की महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण मंत्री, प्रोफेसर रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि राज्य में इससे पहले की सरकारों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर काफी ढीला रवैया रहा है, लेकिन वर्तमान की उत्तर प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले जहां मशीनें होती थी वहां टेक्नीशियन नहीं होते थे और जहां टेक्नीशियन होते थे, वहां मशीनें नदारद रहती थीं।

 

उन्‍होंने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह एक अभिनव  पहल है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम का राज्य में पहली बार आयोजन किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वारा अगर एक जिंदगी भी बचाई जा सकती है तो यह बड़ी बात है। श्रीमती जोशी ने टेक्नीशियन, एम्बुलेंस के ड्राइवर एवं उनके साथ उपस्थित सहायकों के लिए भी ऐसे ही प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जरूरत बतायी।

 

इस मौके पर उपस्थि‍त केजीएमयू के डॉ अजय सिंह ने इस विषय में पूछने पर बताया कि इस प्रशिक्षण में ट्रॉमा, प्‍वॉइजनिंग जैसी स्थितियों से निपटने के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। उन्‍होंने बताया कि उत्‍तर प्रदेश के बाहर के राज्‍यों से आये विशेषज्ञों ने भी प्रशिक्षणार्थियों को अनेक महत्‍वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्‍होंने बताया कि प्रशिक्षकों को बताया गया कि आपदा की स्थिति में किस तरह से गर्भवती स्त्रियों की देखभाल करें, किस प्रकार से बच्‍चों की देखरेख करें। उन्‍होंने बताया कि यह एक महत्‍वपूर्ण प्रशिक्षण था, क्‍योंकि आपदा के समय बीमार, गर्भवती, बच्‍चे, बूढ़े, दिव्‍यांग, गंभीर स्थिति में बिस्‍तर पर पड़े रोगी जो पहले से ही परेशानी की स्थिति में हैं, उन्‍हें सम्‍भालने के लिए भी बहुत ही सावधानी की जरूरत होती है।

 

इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ नीतिन चावला, डॉ अंकिता राय चावला ने किया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर एसएन संखवार एवं डॉ अजय सिंह भी उपस्थित रहे।