संक्रमण काल से लेकर वैक्‍सीनेशन तक में फार्मेसिस्‍ट की अहम भूमिका

-यूपी के 5000 से अधिक फार्मेसिस्ट को इंडियन फार्मेसिस्ट एसोसिएशन ने दी बधाई

-कोविड वैक्‍सीन को लेकर जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ कोविड-19 वैक्सीनेशन के सफल प्रथम चरण में फार्मेसिस्टों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, भारत के ड्रग कंट्रोलर (डीसीजीआई) भी फार्मेसिस्ट होते हैं। 3 जनवरी को डीसीजीआई ने देश में कोरोना की दो वैक्सीन को इमरजेंसी इस्‍तेमाल के लिए अनुमति दी थी। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ वीजी सोमानी फार्मास्‍युटिक्‍स से पीएचडी हैं ।

यह जानकारी इंडियन फार्मेसिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के महासचिव और राजकीय फार्मेसिस्ट महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव ने दी। सुनील यादव के साथ महासचिव अशोक कुमार, संयोजक के के सचान, डीपीए अध्यक्ष संदीप बडोला, जनपद अध्यक्ष एस एन सिंह, सचिव जी सी दुबे ने सभी फार्मेसिस्टों को धन्यवाद के साथ जनता को बधाई दी है, साथ ही जनता से अनुरोध किया है कि किसी अफवाह पर ध्यान न दें।

सुनील यादव ने कहा कि अन्य प्रदेशों के साथ उत्तर प्रदेश में हजारों फार्मेसिस्टों ने कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और फ्रंट लाइन पर खड़े रहे। वैक्सीनेशन से लेकर मरीज की काउंसलिंग, वेटिंग एरिया से लेकर वैक्सीन लगाने अथवा वैक्सीन की लगने के बाद मॉनिटरिंग में भी फार्मेसिस्ट लगभग हर बूथ पर लगे रहे, वैक्सीन के स्टोरेज का कार्य भी फार्मेसिस्ट द्वारा किया जा रहा है।

वैक्सीनेशन में फार्मेसिस्ट का योगदान रिसर्च से लेकर और वैक्सीन के लगाने के बाद मॉनिटरिंग तक लगातार रहा है। वैक्सीन के शोध से लेकर वैक्सीन निर्माण में फार्मेसी वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, साथ ही फार्माकोविजिलेंस के वैज्ञानिकों ने भी अपनी भूमिका का निर्वहन किया है और आगे भी लगातार कर रहे हैं जिससे वैक्सीन लगने के बाद का भी पूरा अध्ययन किया जा सके।

एसोसिएशन के संयोजक के के सचान का कहना है कि फार्मेसिस्ट सरकार के हर कार्यक्रम को आगे बढ़कर सफल करते हैं। सभी पदाधिकारियों ने सरकार, वैज्ञानिकों के साथ इस कार्य मे लगे सभी फार्मेसिस्टों का धन्यवाद ज्ञापित किया।