Monday , October 25 2021

पीजीआई में कर्मचारियों की हड़ताल से चिकित्सा सेवायें बाधित

निदेशक से लिखित आश्‍वासन मिलने पर दोपहर बाद स्‍थगित

लखनऊ। एम्‍स के बराबर वेतन भत्‍ते और बी नियमावली की मांग को लेकर संजय गांधी पीजीआई में शुक्रवार को कर्मचारियों की हड़ताल से ओपीडी में आने वाले मरीज तथा भर्ती मरीजों को असुविधा हुई। विशेषकर दूरदराज से आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कर्मचारी संघ की मीडिया प्रभारी व कोर कमेटी की सदस्‍य सावित्री सिंह ने बताया कि इमरजेंसी सेवाओं और ऑपरेशन के कार्य को हड़ताल से अलग रखा गया था। हालांकि सुबह से शुरू हुर्इ हड़ताल दोपहर बाद निदेशक से मिले मांगें पूरी करने के लिखित आश्‍वासन के बाद समाप्‍त हो गयी।

इस बारे में सावित्री सिंह ने बताया कि हमारी जो भी मांगें थीं उसमें से शासन-प्रशासन ने 31 जनवरी तक का समय मांगा था, इस पर हमारी कोर कमेटी ने 25 जनवरी तक का समय देते हुए तब तक हड़ताल स्‍थगित करने का निर्णय लिया है।  हमारी दूसरी मांग है बी नियमावली के लिए तो उसमें शासन प्रशासन ने हमसे 6 महीने का टाइम मांगा है जिसे हम लोगों ने स्‍वीकार कर लिया है।

 

आपको बता दें कि आज सुबह से ही कर्मचारियों ने हड़ताल रखते हुए पीजीआई कैम्‍पस के अंदर ही जमावड़ा लगाना शुरू कर दिया था। देखते-देखते भारी संख्‍या में कर्मचारी कैम्‍पस की सड़कों पर उतर गये थे।   हड़ताल में जिन कर्मचारी नेताओं ने सक्रिय भूमिका निभायी उनमें डीके सिंह, सरोज वर्मा, संजय द्विवेदी, केके चौधरी, सीएल वर्मा, केके तिवारी, एसपी यादव, अजय श्रीवास्‍तव, सीमा शुक्‍ला, सुजान सिंह, सुनील रूप, चंद्रप्रभा, रेखा मिश्रा, सुनीता सिंह, सावित्री सिंह, राजेश वर्मा, दिलीप सिंह, अफसर बेग, दीपचंद्र, एनपी श्रीवास्‍तव, मदनमुरारी सिंह, आरके बाजपेयी, अमर सिंह, सुनील यादव, सुन्‍दरलाल, वीके श्रीवास्‍तव, वीरू यादव, पंकज दीक्षित, मनोज सिंह, सतीश मिश्र, रामकुमार सिन्‍हा, जितेन्‍द्र कुमार यादव, धर्मेश कुमार, जीएस बिष्‍ट, हेमन्‍त वर्मा, भगवती प्रसाद, आबिद अली, सतीश चन्‍द्रा, तुलसी झा, सुनीत द्विवेदी, राकेश चनद्र नरेन्‍च्‍द्र सिंह, कृष्‍ण कुमार, रामलखन, उमेश चन्‍द्र श्रीवास्‍तव, भीमराज सिंह, जंग बहादुर सिंह, अरविन्‍द श्रीवास्‍तव, रामकुमार, गणेशदत्‍त शुक्‍ला, जीपी सिंह, मीना सिंह, रघुवीर सहाय द्विवेदी, अमरनाथ अवस्‍थी, विपनेश तिवारी, अवधेश कुमार अवसान लाल, राम बाबू और मंजूलता यादव विशेष रूप से शामिल हैं।