खराब आंकड़ों वाले जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दें

-केंद्रीय सचिव ने की उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा
कुष्ठ, मलेरिया, कालाजार -उन्मूलन में उत्तर प्रदेश की प्रगति सराहनीय
-टीबी की दवाओं की जरूरत बतायी केंद्रीय सचिव को

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश में चलाई जा रही विभिन्न चिकित्सा योजनाओं तथा परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी द्वारा क्षय रोगों से सम्बंधित औषधियों की आवश्यकता से सचिव, भारत सरकार को अवगत कराया गया तथा इसकी यथाशीघ्र व्यवस्था हेतु अनुरोध किया गया। सचिव, भारत सरकार ने कुष्ठ रोग, कालाजार व मलेरिया रोग के उन्मूलन के लिए प्रदेश द्वारा किये गये प्रयास की सराहना की तथा कहा कि थोड़े और प्रयास से प्रदेश इन रोगों से मुक्त हो जाएगा।

जेई रोग से ग्रस्त बस्ती व गोरखपुर मण्डल में आईसीयू शीघ्र शुरू करें

प्रदेश में जेई रोग से ग्रसित बस्ती व गोरखपुर मंडल के जनपदों में यथाशीघ्र आईसीयू संचालित किये जाने हेतु निर्देशित किया गया जिससे कि गम्भीर रोगियों को ससमय समुचित उपचार मिल सके।
भारत सरकार के सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सीके मिश्रा मंगलवार 20 जून को योजना भवन में स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर ढंग से क्रियान्वित किया जाना चाहिए।

नगरीय स्वास्थ्य मिशन सेवाओं में उत्तर प्रदेश का चौथा स्थान

सचिव श्री मिश्र ने नगरीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश द्वारा की गयी प्रगति को सराहा गया। इस योजना में पूरे देश में उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर है। उन्होंने सुझाव दिया कि नगरीय मलिन बस्तियों में आउटरीच कैम्प किया जाना आवश्यक है ताकि इन लाभार्थियों को पूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।  श्री मिश्रा ने कहा कि प्रदेश के जो जनपद पिछड़े हुए है तथा जहां के स्वास्थ्य सम्बंधी आंकड़े अत्यधिक खराब हैं, उनमें विशेष ध्यान दिया जाए तथा सुधार हेतु विशेष योजना बनायी जाए। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रदेश की विभिन्न चिकित्सा इकाइयों के प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थिएटर को सुदृढ़ किया जाए तथा जटिलता से ग्रस्त गर्भवती महिला को समय से एम्बुलेंस के माध्यम से उच्च स्तरीय चिकित्सालय को संदर्भित किया जाना चाहिए। उन्होंने जनसमुदाय तक एनएचएम की विभिन्न योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के लिए समुचित प्रचार प्रसार पर भी विशेष बल दिया, चूंकि जानकारी के अभाव में लाभार्थी सही समय पर राजकीय चिकित्सालयों में पहुंचकर नि:शुल्क दी जा रही चिकित्सा सेवा नहीं ले पाते हैं।
समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वर्ष 2016-17 की वित्तीय प्रगति पर चर्चा हुयी, जिसके सम्बंध में सचिव, भारत सरकार द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन योजनाओं को अभी प्रारम्भ नहीं किया जा सका है, उन पर विशेष ध्यान देते हुए यथाशीघ्र संचालित किया जाए ताकि और अधिक धनराशि का उपयोग किया जा सके। इन योजनाओं में मुख्य रूप से मोबाइल मेडिकल यूनिट, एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्ब्युलेंस शामिल है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2017-18 में संचालित किये जाने हेतु कतिपय गतिविधियों पर स्वीकृति दिया जाना लम्बित है, जिसके सम्बंध में मिशन निदेशक द्वारा स्वीकृति हेतु विशेष अनुरोध किया गया।
बैठक में प्रमुख सचिव, सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, मिशन निदेशक, अपर मिशन निदेशक-एनएचएम, अधिशासी निदेशक निदेशक, यू.पी.टी.एस.यू., महानिदेशक, परिवार कल्याण एवं अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों द्वारा भाग लिया गया।