स्‍टेटस सिंबल के चक्‍कर में नशेबाज युवतियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही

नशा उन्‍मूलन केंद्रों पर पहुंचने वाले यूथ की संख्‍या दे रही इसकी गवाही

इंडियन मनोरोग सोसाइटी के राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन के दूसरे दिन हुई चर्चा

 

लखनऊ। आधुनिकता की दौड़ में भाग रहे युवाओं में नशे की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। युवकों के साथ ही युवतियों की संख्‍या भी तेजी से बढ़ रही है। बढ़़ने की रफ्तार की बात करें इसका ग्राफ काफी तेजी से ऊंचाई छू रहा है।  लक्ष्य प्राप्ति की प्रतिस्पर्धा और भाग-दौड़ के अलावा स्टेटस सिंबल मेंटेन करने की चाहत भी नशा करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहा है। नशा प्रवृत्ति बढऩे की वजह से ही नशा उन्मूलन केन्द्रों पर युवतियों की संख्‍या बढ़ रही है। जहां पहले कई महीने में एक या दो लड़कियां नशा उन्‍मूलन केंद्र पहुंचती थीं जबकि अब हाल यह है कि हफ्ते में चार-पांच लड़कियां नशा छुड़ाने के लिए नशा उन्‍मूलन केंद्र पहुंच रही हैं।

 

 

यहां गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्‍ठान में चले रहे इंडियन मनोरोग सोसाइटी के 71 वें चार दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन शुक्रवार को हुई चर्चा के बारे में जानकारी देते हुए केजीएमयू के डॉ.आदर्श त्रिपाठी ने यह रिपोर्ट बतायी।

 

 

डॉ.त्रिपाठी ने बताया कि नशा प्रवृत्ति बढ़ने की एक वजह पिक्चर और धारावाहिक आदि भी हैं, क्योंकि अक्‍सर फिल्मों में पार्टी का मतलब ही शराब और सिगरेट होता है। इन पार्टियों में आधुनिकता की अंधी दौड़ में भाग रहीं लड़कियों को सिगरेट, शराब आदि का सेवन करते हुये दिखाया जाता है। यही वजह है कि शराब और सिगरेट का धुआं उड़ाना स्टेटस सिंबल बन चुका है और युवकों के साथ ही युवतियां भी नशे को तेजी से अपना रही हैं। उन्‍होंने बताया कि इसके अलावा हॉस्टल लाइफ और एकाकी जीवन व दिनचर्या का चलन बढ़ना भी युवाओं को इस ओर खींच रहा है।

 

 

डॉ.त्रिपाठी ने बताया कि शराब व सिगरेट का सेवन तो युवा कर ही रहे हैं लेकिन अब तो अफीम का नशा करने वालों की भी संख्‍या बढ़ रही हैं,  वह भी लड़कियों में इसकी प्रवृत्ति बढ़ रही हैं। नशा उन्मूलन केन्द्रों पर लड़कियां भी अफीम का नशा से छुटकारा पाने के लिए पहुंच रहीं हैं। हालांकि इनकी संख्‍या बहुत कम है मगर सेवनकर्ताओं में लड़कियों के शामिल होने की शुरूआत हो चुकी है, चिंता का विषय है।