सरकारी चिकित्सा संस्थानों की गुणवत्ता भगवान भरोसे

 

एक भी चिकित्सा प्रतिष्ठान या लैब को एनएबीएच से मान्यता नहीं

 

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में सरकारी क्षेत्र के चिकित्सा संस्थानों गुणवत्तापरक हैं या नहीं इसके बारे में पक्के तौर से कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि गुणवत्ता जांचने के लिए बनी संस्था नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड ऑफ़ हॉस्पिटल्स से यहाँ के किसी सरकारी चिकित्सा संस्थान ने क्वालिटी प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया है. किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी पहला ऐसा संस्थान है जिसने पैथोलॉजी के लिए नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड ऑफ़ हॉस्पिटल्स से लैब की मान्यता के लिए अप्लाई किया है. यानी कि बाकी जितने भी सरकारी अस्पताल प्रदेश में हैं उनमें तथा सरकारी प्रयोगशालाओं की क्वालिटी के बारे में सिर्फ विश्वास किया जा सकता है, दावा नहीं.

 

यह जानकारी यहाँ केजीएमयू में आज से शुरू हुई यूपीपैथकॉन में भाग लेने आयीं फोर्टिस हॉस्पिटल की डॉ. नीलिमा वर्मा से विशेष बातचीत के दौरान पता चली. उन्होंने बताया कि अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब में क्वालिटी मैनेजमेंट के लिए नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड ऑफ़ हॉस्पिटल्स (एनएबीएच) स्वास्थ्य सेवा संगठनों के लिए मान्यता प्राप्त कार्यक्रम स्थापित करने और संचालित करने के लिए स्थापित गुणवत्ता परिषद का एक संघीय बोर्ड है.

 

उन्होंने बताया कि एनएबीएच से मान्यता के बाद संस्थान को 185189 : 2012 मार्क दे दिया जाता है, इसका अर्थ होता है कि सम्बंधित अस्तपताल या लैब में सभी सिस्टम गुणवत्तायुक्त है. उन्होंने बताया कि पैथोलॉजी में तीन शाखाएं होती हैं पहली पैथोलॉजी, दूसरी बायो केमिस्ट्री तथा तीसरा माइक्रोबायोलॉजी.

 

यहाँ सवाल यह उठता है कि एक तरफ तो सरकार उत्तर प्रदेश को मेडिकल हब बनाने की बात कर रही है और दूसरी ओर क्वालिटी मैनेजमेंट को लेकर हाल यह है कि कोई सरकारी अस्पताल या संस्थान और उसकी लैब की क्वालिटी का स्टैण्डर्ड मेन्टेन नहीं है. इस बारे में अभी जागरूकता की बहुत कमी है. इसका दूसरा पहलू यह है कि मरीज को किस स्तर की सुविधा दी जा रही है, यह जांच का विषय है.  यहाँ गौर करने की बात यह है कि प्रदेश में अनेक प्राइवेट पैथोलॉजी और लैब ऐसी हैं जिनके कलेक्शन सेंटर और पिकअप पॉइंट भी खुले हैं. ऐसे में लैब से लेकर इन पिकअप पॉइंट तक की क्वालिटी कण्ट्रोल अगर नहीं है तो इसका खामियाजा आखिर कौन भुगतेगा, जाहिर है मरीज को ही इसका लाभ और हानि होगी. जरूरत इस बात की है कि इसे अनिवार्य बनाया जाये. अभी यह वैकल्पिक है. फिलहाल सरकार को इस पर विचार करने की जरूरत है.