नयी स्‍टडी : जहरीली हवा सांस ही नहीं, धड़कनों पर भी डालती है असर

-हार्ट अटैक के एक घंटे में मिल जाये इलाज तो पहले जैसी स्थिति संभव
-दिल और किडनी का आपस में है गहरा संबंध, किडनी रोगी दिल की जांच जरूर करायें
-अजंता हॉस्पिटल ने आयोजित की सीएमई, दिग्‍गज विशेषज्ञों सहित शामिल हुए 200 चिकित्‍सक

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर के कारण राष्ट्रीय राजधानी में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित हो गया है, उत्‍तर प्रदेश के गाजियाबाद के साथ ही राजधानी लखनऊ का भी हाल बुरा है, आम तौर पर वायु प्रदूषण से श्‍वास रोगों के होने की बात होती है लेकिन नयी स्‍टडी में सामने आया है कि श्‍वास रोगों के साथ ही दिल के रोगों के लिए भी वायु प्रदूषण बहुत जिम्‍मेदार है। इसके 2.5 माइक्रॉन से छोटे पार्टिकल जो वाहनों के इंजन, कम्‍प्रेशर, डीजल से निकलते हैं, बहुत नुकसानदायक हैं।

शनिवार को अजंता अस्पताल द्वारा यहां होटल क्‍लार्क्‍स अवध में आयोजित कार्डियक मैनेजमेंट में नई संभावनाओं’ विषय पर आयोजित सतत चिकित्‍सा शिक्षा (सीएमई) में यह बात अजंता हॉस्पिटल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्‍ट डॉ कीर्तिमान सिंह ने कही। उन्‍होंने कहा कि बंगलौर के श्री जयदेवा इंस्‍टीट्यूट ऑफ कार्डियोवेस्‍कुलर साइंसेज एंड रिसर्च में‍ 2500 लोगों पर की जा रही स्‍टडी की शुरुआती रिपोर्ट में यह सामने आया है कि दिल के रोगों के कारणों में वायु प्रदूषण भी एक बड़ा कारण है। उन्‍होंने कहा कि खास बात यह है कि जिन मरीजों पर यह स्‍टडी की जा रही है, इनमें आधे मरीजों की उम्र 40 साल से कम है। यही नहीं ये वे मरीज हैं जो न तो स्‍मोकिंग करते हैं, और न ही इनके माता-पिता में किसी को हृदय रोग की शिकायत रही थी।

अजन्ता हॉस्पिटल के निदेशक डॉ अनिल खन्ना ने कही खास बात

डॉ कीर्तिमान सिंह ने कहा कि यह स्पष्ट है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वहां प्रदूषण का स्तर कम होने के कारण दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। उन्होंने कहा कि अब दिल की बीमारी उम्र से संबंधित कारक नहीं है और 25 साल से ऊपर के किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। साथ ही उन्‍होंने कहा कि “हालांकि, शुरुआती पहचान और उपचार से हृदय को नुकसान होने की संभावना कम हो जाती है। स्‍टडी में यह भी साबित हो चुका है कि भारतीयों को हमारे पश्चिमी समकक्षों की तुलना में कम से कम 10 साल पहले दिल की बीमारियां होती हैं।

इससे पूर्व सीएमई के बारे में बताते हुए अजंता अस्‍पताल के निदेशक डॉ अनिल खन्‍ना ने बताया कि इस सीएमई के सत्र में प्रदेश भर से 200 चिकित्‍सक भाग ले रहे हैं, इनमें संजय गांधी पीजीआई, किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय, लोहिया आयुर्विज्ञान संस्‍थान, सीजीएचस, ईसीएचएस, रेलवे के एनआर, एनईआर, एमसीएफ, आरडीएसओ अस्‍पतालों के विशेषज्ञों के साथ ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ नर्सिंग होम एसोसिएशन व अन्‍य निजी चिकित्‍सक शामिल हैं। उन्‍होंने कहा कि अजंता हॉस्पिटल की स्‍थापना वर्ष 2001 में हुई थी उन्‍होंने कहा कि मरीजों की सेवा तथा काम के प्रति समर्पण का दूसरा नाम है अजंता हॉस्पिटल।

वायु प्रदूषण से दिल के रोगों के खतरे के बारे में बताते डॉ कीर्तिमान सिंह

डॉ. अनिल खन्ना ने कहा कि अजंता अस्पताल का समर्पित और अनुभवी तकनीकी स्टाफ और अत्याधुनिक कैथलैब एक शानदार विकल्प साबित हुआ है उन दिल के मरीजों के लिए जो समय रहते बेहतर इलाज चाहते हैं और सरकारी अस्पतालों की लंबी कतारों से मुक्ति भी।

उन्‍होंने कहा कि विगत 15 माह में हमारा मरीजों की जान बचाने की सफलता दर शानदार रही है। जनमानस में इस बीमारी के प्रति जागरूकता के लिए कई शिविरों का भी आयोजन किया गया है। दिल की बीमारियों में इलाज के बारे में डॉक्टरों के लिए अजंता अस्पताल में समय-समय पर मेडिकल एजुकेशन के सत्र(सीएमई) भी आयोजित कराए जाते हैं ताकि इस विधा में अति आधुनिक तकनीक से परिचित हों।

दिल के दौरे में गोल्डन ऑवर में इलाज का महत्व बता रहे हैं डॉ अभिषेक शुक्ल

सीएमई में इससे पूर्व अस्‍पताल के मुख्‍य कार्डियोलॉजिस्‍ट डॉ अभिषेक शुक्‍ल ने कहा कि दिल का दौरा पड़ने के एक घंटे के अंदर मरीज को विशेषज्ञ की देखरेख में इलाज मिल जाये तो उसकी स्थिति पहले की तरह हो जाती है लेकिन जैसे-जैसे देर होती है वैसे-वैसे फायदे की संभावना एंजियोप्‍लास्‍टी सिर्फ 30 फीसदी मरीजों को ही मिल पाती है, शेष 70 प्रतिशत दिल के दौरे के रोगी इस उपचार से महरूम रह जाते हैं, और काल के गाल में समा जाते हैं। यह आंकड़ा भी अधिकतर मेट्रो शहरों तक ही सीमित है। समय पर इलाज न मिलने की बड़ी वजहों में समुचित उपचार की उपलब्‍ध सुविधाओं में कमी के साथ ही परिजनों की जागरूकता का अभाव है। अगर सुविधा मौजूद हों और परिजन मरीज को लेकर समय से कार्डियोलॉजिस्‍ट तक पहुंच जायें तो इन 70 प्रतिशत रोगियों को बचाया जा सकता है। हार्ट अटैक पड़ने के एक घंटे के अंदर इलाज का महत्‍व इतना है कि इस अवधि को ‘गोल्‍डन आवर’ यानी सुनहरा घंटा नाम दिया गया है।

डॉ. शुक्ल ने कहा कि कुछ ही कैथलैब हैं जो इस गोल्डन ऑवर में सफल इलाज सुनिश्चित  करती हैं। उन्होंने बताया कि एक साल में देश में 21 लाख लोगों की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो जाती है। उन्‍होंने कहा कि त्वरित एंजियोप्लास्टी से दिल का दौरा पड़ने का खतरा 32 से लेकर 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है और भविष्य में भी आशंका कम कर देता है। इस मौके पर अजंता हार्ट केयर एंड कैथ लैब की स्‍थापना के बाद से बीते सवा साल से ज्‍यादा की अवधि में किये गये खास केसों के बारे में भी बताया कि किस तरह से उन्‍होंने एंजियोग्राफी-एंजियोप्‍लास्‍टी कर मरीजों की जान बचाने में सफलता प्राप्‍त की। उन्‍होंने बताया कि उनके द्वारा हर उम्र के मरीजों की सफल एंजियोप्‍लास्‍टी की गयी है इनमें 27 वर्ष के युवक से लेकर 92 वर्ष के बुजुर्ग शामिल हैं।

किडनी के रोगियों को दिल की जांच जरूर करानी चाहिए : डॉ. दीपक दीवान 

अजंता अस्पताल के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. दीपक दीवान ने इस मौके पर बताया कि हालांकि किडनी केवल .2 प्रतिशत  ही शरीर  का वजन रखती है लेकिन दिल में खून पंप करने में इसका सहयोग 25 प्रतिशत रहता है। इसका मतलब दिल और किडनी के बीच मिश्रित वार्ता होती है जो एक दिल के मरीज के लिए बहुत जरूरी होता है। उन्होंने यह साफ किया कि स्वस्थ दिल के साथ ही स्वस्थ किडनी भी एक सेहतमंद शरीर के लिए निहायत जरूरी है।

इस सत्र के बाद गजल का भी एक दौर चला डॉक्टरों को तनाव से मुक्त कराने के लिए क्योंकि समाज में दिल तंदरुस्त हो इसके लिए पहले एक डॉक्टर का दिल स्वस्थ होना बहुत जरूरी है।