सीओपीडी की जांच व इलाज में लापरवाही बन रही लंग अटैक का कारण

सीओपीडी दिवस पर पल्‍मोनरी विशेषज्ञ डॉ बीपी सिंह व डॉ वाईएन चौ‍बे ने दी जानकारी

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी पूरे भारत देश में एक ऐसी बीमारी बन चुकी है, जिसमें विश्व के सभी देशों में भारत का स्थान पहला है। इस बीमारी में सांस की नली सिकुड़ जाती है। जिससे सांस लेने में‍ दिक्‍कत होती है।  सीओपीडी से भारत में प्रतिदिन 2300 मौतें हो रही है यानी सीओपीडी के कारण होने वाली मृत्यु की संख्या एड्स, टीबी, मलेरिया और मधुमेह से होने वाली मृत्युओं की कुल संख्या से भी ज्यादा है। चिंताजनक तथ्‍य यह है कि जांच और समुचित इलाज के अभाव में अब रोगी को लंग अटैक हो रहा है।

यह जानकारी विश्व सीओपीडी दिवस के अवसर पर यहां प्रेस क्‍लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में मिडलैंड हेल्थ केयर एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डॉ बी पी सिंह और मेडॉक्स हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ वाईएन चौबे ने संयुक्त रूप से दी। डॉ बी पी सिंह ने कहा कि‍ जोखिम के कारकों और श्‍वसन सम्‍बन्‍धी संक्रमणों से लगातार संपर्क के कारण स्थित आक्रामक हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत में इसका स्मोकिंग एक बड़ा कारण है लेकिन इसके अतिरिक्त लकड़ी के चूल्हे या कोयले पर खाना बनाने के साथ ही अन्य वजहों से होने वाले वायु प्रदूषण भी हैं।

देखें वीडियो-इस तरह कम कर सकते हैं वाहन प्रदूषण 

उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करने की जिम्मेदारी सरकार के साथ हम सब की भी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सड़कों पर वाहन कम करने के लिए लोग शेयरिंग कर सकते हैं यानी एक दूसरे के वाहन में पर बैठकर अपने गंतव्य तक जा सकते हैं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर सकते हैं और लखनऊ की बात करें तो अब तो यहां मेट्रो भी शुरू हो चुकी है मैं देखता हूं मेट्रो खाली जाती है, उसमें भी जा सकते हैं। इससे सड़कों पर वाहन कम होंगे तो प्रदूषण भी कम होगा।

डॉ वाईएन चौबे ने कहा कि लंग अटैक की जांच अक्सर सीओपीडी के बिगड़ते लक्षणों पर आधारित होती है जैसे ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से कम होना डॉक्टर द्वारा शारीरिक जांच के परिणाम, सांस लेने में कष्ट होना और तेजी से उथली सांस लेना। लंग अटैक के संकेतों और लक्षणों को पहचानना और डॉक्टर से सही समय पर मदद लेना इस रोग को बढ़ने से रोकने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है।