Monday , November 15 2021

नवरनपुर… कोलकाता… मंगरू की बेटी… मेरा बेटा कन्‍हैया…

-केजीएमयू के न्‍यूरो सर्जरी विभाग के हेड डॉ बीके ओझा ने की महिला को ठिकाना दिलाने की अपील

-साढ़े तीन माह पूर्व सिर में गंभीर चोट के बाद ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया था पुलिस ने

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय (केजीएमयू) के न्‍यूरो सर्जरी विभाग के विभागाध्‍यक्ष डॉ बीके ओझा ने उनके विभाग में भर्ती महिला को उसके घर या किसी नारी गृह में भेजने के लिए सहायता की अपील की है। डॉ ओझा ने महिला द्वारा अस्‍पष्‍ट तरीके से बोले गये शब्‍दों तथा उसकी फोटो के आधार पर उसकी पहचान खोजने में लोगों से मदद की भी अपील की है। इस महिला को करीब साढ़े तीन माह पूर्व पुलिस द्वारा भर्ती कराया गया था।

डॉ ओझा ने जानकारी देते हुए बताया है कि गंभीर चोट के बाद पुलिस द्वारा यह महिला चोटिल हालत में 3 नवंबर, 2020 को अलीगंज पुलिस थाने की कॉन्स्टेबल पूजा सागर द्वारा केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में लाई गई थी। उस समय महिल की हालत गंभीर थी और सिर में चोट थी। उन्‍होंने बताया है कि सीटी स्कैन की चोट के आधार पर उसका इलाज किया गया और वह धीरे-धीरे ठीक हो गई। अब यह महिला होश में है, इसे खाना-पीना दिया जाता है तो वह उसे खा लेती है, रोज नहाती है कपड़े बदलती है एवं टॉयलेट्स का भी ठीक से उपयोग करती है।

डॉ ओझा ने कहा है कि दिक्‍कत यह है कि महिला ठीक से बोलती नहीं है और जो कुछ बोलती है वह भाषा भी समझ में नहीं आती। उन्‍होंने कहा है कि हालांकि कुछ शब्दों को वह बार-बार बोलती है, जैसे- नवरनपुर, कोलकाता, मंगरू की बेटी। अपने बेटे का नाम कन्हैया बताती है। इससे ज्यादा कुछ पता नहीं चल पा रहा है। पुलिस कॉन्स्टेबल पूजा सागर से भी मदद ली जा रही है परंतु अभी तक इसके घर परिवार का कोई पता नहीं चल पाया है। क्योंकि वह अजीब-अजीब व्यवहार करती है और कभी-कभी चिल्ला करके गाली-गलौज करने लगती है, इसलिए उसके अगल-बगल के बिस्तर के मरीजों को भी परेशानी होती है।

डॉ ओझा ने कहा है कि सभी से यह प्रार्थना है कि यदि इसे किसी सरकारी या प्राइवेट नारी गृह पहुंचाने में मदद कर सकते हों तो कृपया आगे आएं। वर्तमान में यह महिला केजीएमयू के शताब्दी फेस-2 के पांचवें तल के न्यूरोसर्जरी वार्ड के बिस्तर संख्या 28 पर भर्ती है। इसकी पूरी देखभाल का जिम्मा सिस्टर शशि और उनकी टीम ने ले रखा है एवं इस महिला के जीवन बचने और इतना ठीक होने के पीछे न्यूरो सर्जरी वार्ड की सिस्टर शशि सिंह की पूरी टीम और विभाग के सभी रेजिडेंट्स का प्रशंसनीय योगदान रहा है।

ज्ञात हो पहले भी इस तरह के मरीजों के बारे में पहल करते हुए डॉ ओझा ने उन्‍हें उचित ठिकाने तक पहुंचाने में कोशिशें की हैं, जो कि कामयाब भी हुई हैं।