कॉफी, चाय, चॉकलेट, सिगरेट का अधिक सेवन दे सकता है स्तनों में दर्द

प्रो विनोद जैन

लखनऊ। कॉफी, चाय, चॉकलेट, कोको, कोला ड्रिंक्स बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू, शराब, अधिक वसा वाला भोजन से महिलाओंं के स्तनों में दर्द हो सकता है। इसके अलावा आयोडीन की कमी के चलते भी महिलाओं के स्तनों में दर्द हो जाता है। उन्होंने बताया कि कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं जो समय के साथ अपने आप ही ठीक हो जाते हैं।
यह महत्वपूर्ण जानकारी किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ विनोद जैन ने देते हुए बताया कि बहुत सी महिलाओं को जब स्तनों में दर्द होता है तो वे तरह-तरह की बीमारियों के बारे में आशंका करते हुए मन ही मन डर जाती हैं। ऐसे में आवश्यक यह है कि बिना घबराये वे चिकित्सक से मिलें।

आयोडीन की कमी से भी हो सकता है स्तन दर्द

एक विशेष मुलाकात में डॉ जैन ने बताया कि कॉफी, चाय, एवं चॉकलेट में मेंथाइलजैन्थीन समूह के पदार्थ पाये जाते हैं। श्वास रोग में प्रयुक्त थियोफाइलीन एवं थियोब्रोमीन भी मेथाइलजैन्थीन समूह का अंग है तथा इसके सेवन से स्तन दर्द की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार चॉकलेट के अधिक सेवन से तथा बाजार में मिलने वाले कोलायुक्त पेय पदार्थ के सेवन से भी स्तन दर्द पैदा हो सकता है। डॉ जैन ने बताया कि अनियंत्रित भोजन करने वाली महिलाएं स्तन दर्द से ग्रसित हो सकती हैं। शोध में यह भी पाया गया है कि आयोडीन की कमी से भी स्तन दर्द हो सकता है।

ज्यादा उबली चाय कॉफी से भी ज्यादा नुकसानदायक

डॉ जैन ने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि चाय कॉफी पीना छोड़ ही दिया जाये। इसे सीमित मात्रा में यानी दो या तीन कप से अधिक न पीयें। उन्होंने कहा कि जहां मेंथाइलजैन्थीन पदार्थ कॉफी में तो होता ही है लेकिन चाय में ज्यादा पाया जाता है, चाय में इनकी मात्रा उबलने पर निर्भर करती है, यदि चाय अधिक देर तक उबाली गयी तो यह कॉफी से ज्यादा नुकसान करती है।
इसके इलाज के बारे में डॉ जैन ने बताया कि चाय, कॉफी, कोला वाले शीतल पेय पदार्थ एवं चॉकलेट का सेवन कम से कम करें, तम्बाकू उत्पाद एवं शराब का सेवन करती हैं तो उसको बंद कर दें। उन्होंने बताया कि चाय, कॉफी, चॉकलेेट, कोला ड्रिंक्स का सेवन बंद करने वाली 65 प्रतिशत महिलाओं का स्तन दर्द समाप्त हो जाता है। दर्द समाप्त होने में एक से तीन महीने लगते हैं।

चक्रीय स्तन दर्द

स्तनों में होने वाला दर्द मूलत: दो प्रकार का होता है पहला चक्रीय स्तन दर्द तथा गैर चक्रीय स्तन दर्द। इसके अलावा सीने की मांसपेशियों एवं हड्डी में होने वाला दर्द भी स्तन दर्द की तरह लगता है। उन्होंने बताया कि चक्रीय स्तन दर्द उन महिलाओं को होता है जिनमें मासिक धर्म हो रहा हो 30 से 40 वर्ष की उम्र वाले अधिकांश रोगी लगभग 67 प्रतिशत में मासिक आने के चार-पांच दिन पहले यह दर्द होता है कुछ महिलाओं में यह संपूर्ण मासिक चक्र के दौरान बना रहता है। उन्होंने बताया कि बहुधा यह दर्द स्तन के बाहरी और ऊपर के भाग में होता है और कभी-कभी इसकी वजह से विशेष नस इंटर कास्टोब्रेकियेलिस प्रभावित होती है तो यह दर्द तीव्र हो जाता है और जिस स्तन में होता है, उस तरफ की बांह में जाता हुआ प्रतीत होता है सामान्यत: रजोनिवृत्ति के उपरान्त अधिकांश महिलाओं में यह दर्द ठीक हो जाता है।

गैर चक्रीय स्तन दर्द

डॉ जैन ने बताया कि इसके अलावा गैर चक्रीय स्तन दर्द जो होता है उसका सम्बन्ध मासिक चक्र से नहीं होता है, यह कभी भी हो सकता है। यह कम महिलाओं लगभग 26 प्रतिशत में ही होता है तथा एक ही स्तन में कम समय के लिए होता है और करीब 50 फीसदी महिलाओं में अपने आप ठीक हो जाता है। इसके कारणों के बारे में डॉ जैन ने बताया कि महिलाओं के स्तन परिवर्तनशील अंग है और हारमोन के चलते कुछ न कुछ परिवर्तन होता रहता है। इस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टोरॉन हार्मोन का संतुलन बिगडऩे से प्रोलैक्टिन नाम के हारमोन का स्राव भी अधिक होने लगता है। शारीरिक व मानसिक तनाव से भी प्रोलैक्टिन की मात्रा अधिक हो जाती है जिससे दर्द होने लगता है।

तनावमुक्त जीवन व नियमित व्यायाम आवश्यक

उन्होंने बताया कि अपनी जीवनशैली में बदलाव अत्यंत आवश्यक है। जितना हो सके तनावमुक्त जीवन एवं नियमित व्यायाम से भी ऐसे रोगियों को लाभ पहुंचता है, अगर ये सब करने से दर्द कम न हो तो चिकित्सक से मिलना चाहिये।