-इस सुकून का कोई जवाब हो नहीं सकता…

‘सेहत टाइम्स’ के नियमित पाठक और लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में कार्यरत नर्सिंग ऑफीसर सत्येन्द्र कुमार ने एक घटना साझा की है। चूंकि यह घटना न सिर्फ प्रशंसनीय बल्कि अनुकरणीय भी है, इसलिए ‘सेहत टाइम्स’ ने इसे अपने पाठकों के साथ साझा करना उचित समझा… घटना को सत्येन्द्र कुमार के शब्दों में ही प्रस्तुत किया जा रहा है…
कल दिनांक 04/01/2022 को रात्रि 9:30 बजे टहलने के दौरान नीलकंठ अस्पताल के पास रोड पर एक सैमसंग फ़ोन पड़ा मिला, जिसके कवर में एक दवा की पर्ची व रू१००/ मात्र रखे थे ,आसपास पता करने पर वास्तविक मालिक का पता नहीं चल सका, चूँकि फ़ोन आफ था और ऑन न होने के कारण कॉल भी नही की जा सकती थी, घर पहुँच कर चार्जर लगाने की कोशिश की पर उपयुक्त चार्जर न होने से आन न हो सका, चूँकि दवा की पर्ची साथ में थी तो एक नर्सिंग कर्मी होने के कारण नींद न आयी, जैसे-तैसे सुबह हुई पास के भाई साहब से चार्जर माँग फ़ोन चार्ज कर ऑन किया, फ़ोन बुक में फ़ीड कई नम्बरों पर कॉल किया पर पता न चल सका, आख़िरकार 10 बजे एक मैडम का फ़ोन आया पता चला कि उनकी रिश्तेदार का फ़ोन है उन्होंने उनके घर पर फ़ोन कर बताया,तब फ़ोन की मालकिन का फ़ोन आया, उन्हें विभाग का पता बताया और बुलाकर फ़ोन उनके सुपुर्द किया और सुकून की साँस ली,साथ ही उनके द्वारा दी गयी ढेरों दुआओं व धन्यवाद स्वरूप लाए गए चौक लखनऊ के ताजे मक्खन का स्वाद लिया।
– सत्येन्द्र कुमार

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