घर पर ही बनायें प्राकृतिक रंग और नुकसान के टेंशन को करें बाय-बाय

खुद भी रहे स्‍वस्‍थ और दूसरे भी आपसे कहें वाह-वाह क्‍या रंग हैं

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लखनऊ। खुश हो जाइये कि होली आ गयी। कहते हैं कि बच्‍चे हों या बूढ़े फागुन की मस्‍ती सभी पर छायी होती है। लेकिन बड़े और बच्‍चों में फर्क इतना जरूर है कि बच्‍चे अपनी सेहत के बारे में इतना सोचते नहीं और बड़ों का हाल यह है कि उन्‍हें चिंता सताती है कि वे अपने बच्‍चों को बाजार में मिलने वाले खतरनाक रंगों से कैसे बचायें। देखा जाये तो हम सबका उद्देश्‍य यही तो होता है कि जिस व्‍यक्ति को हम रंग लगायें तो वह रंगीन दिखे, ऐसे में अगर रंगों की मस्‍ती का कोई नुकसानरहित विकल्‍प मिल जाये तो क्‍या कहने।

डॉ देवेश कुमार श्रीवास्‍तव

इस बारे में वरिष्‍ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ देवेश कुमार श्रीवास्‍तव से ‘सेहत टाइम्‍स’ की बात हुई तो उन्‍होंने बच्‍चों का उत्‍साह और बड़ों की चिंता का समाधान करते हुए कुछ रंगों के तैयार करने के बारे में बताते हुए कहा कि इन रंगों से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है क्‍योंकि यह प्राकृतिक चीजों से तैयार किये जाते हैं।

 

उन्‍होंने बताया कि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर रंगों में तरह-तरह के जहरीले पदार्थ मिले रहते हैं ऐसे में रंगों को अगर घर में ही तैयार कर लिया जाये तो यह स्वास्थ्य वर्धक होगा क्योंकि इसे बनाने में किसी तरह का केमिकल नहीं इस्तेमाल किया गया है। डॉ. देवेश श्रीवास्तव ने होली के इन हर्बल रंगों को बनाने का तरीका बताया। डॉ देवेश का कहना है कि इन हर्बल रंगों को अपने इस्तेमाल के लिए और बिक्री के लिए भी तैयार किया जा सकता है।

 

गुलाबी, पीला, केसरिया, हरा, काला, लाल रंग इस तरह बनायें

डॉ देवेश श्रीवास्‍तव ने बताया कि इन रंगों को बनाने के लिए प्राकृतिक वस्‍तुओं को इस्‍तेमाल किया जाता है। गुलाबी रंग बनाने के लिए चुकंदर कद्दूकस करके मिक्सी में पीसें फिर छान-निचोड़ कर रख लें प्राकृतिक रंग तैयार है। इसी प्रकार हरा रंग बनाने के लिए पालक/नीम की पत्ती को पीस छान लें। इसी प्रकार लाल रंग बनाने के लिए गुड़हल के फूल को पीस कर छान कर रख लें, बस आपका प्राकृतिक रंग तैयार है। पीला रंग बनाने के लिए पिसी हल्दी, गेंदे के फूल की पत्ती भिगो दें फिर बाद में उसे मसल कर रख लें, रंग तैयार है। इसी प्रकार केसरिया रंग बनाने के लिए टेसू के फूल रात को गर्म पानी में भिगो दें, फिर सुबह मसल छान लें, प्राकृतिक रंग तैयार है। काला रंग बनाने के लिए आंवला चूर्ण लोहे की कढ़ाई में थोड़ा पानी डाल कर पेस्ट बना कर पूरी कढ़ाई में फैला कर रात भर रखें, प्रात: पानी मिला कर छान लें। इन रंगों को पिचकारी में भर भी खेला जा सकता है तथा इससे त्वचा को कोई नुकसान नहीं होगा और हेल्‍दी रहेगी।

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इस तरह तैयार होगा हर्बल गुलाल 

डॉ देवेश श्रीवास्‍तव ने ‘सेहत टाइम्‍स’ को बताया कि यदि आपको सूखा गुलाल चाहिए तो जो गीला रंग बनाया है, उसको छानकर उसमें बाजार में उपलब्ध कॉर्नफ्लोर  यानी मक्‍के के आटे को धीरे धीरे मिलकर आटा जैसा बना कर फिर इसको पॉलीथीन पर फैला कर सुखा कर मिक्सी में पीस कर रख लीजिये,अब इसमें बाजार से गुलाब, केवड़ा आदि इत्र की महक डालिये आपका बढिय़ा महक वाला हर्बल गुलाल तैयार है। उन्होंने बताया कि इसी तरह से आप बाजार से खाने वाले कई रंग लाकर, कोई एक रंग लें और उसमें कॉर्न फ्लोर में मिला कर फिर आटा जैसा गूंध कर इत्र मिला कर पॉलीथीन पर फैलाकर सुखा कर मिक्सी से पीस कर रख लें, बढिय़ा महक वाला गुलाल तैयार है। इस गुलाल से लोगों को कोई साइड इफेक्ट नहीं पड़ेगा त्वचा खऱाब नहीं होगी मन प्रफुल्लित रहेगा।