जीवन दर्शन है युगऋषि का वांग्मय साहित्य : बीडी सिंह

 

गायत्री ज्ञान मंदिर के वांग्मय स्थापना अभियान ने पूरा किया 284वां पड़ाव, 301 है लक्ष्य  

 

लखनऊ. गायत्री ज्ञान मंदिर इंदिरा नगर, लखनऊ के विचार क्रान्ति ज्ञान यज्ञ अभियान के अन्तर्गत  माँ चन्द्रिका देवी इंस्टीट्यूट ऑफ़ पैरामेडिकल साइंस बीकेटी, लखनऊ उप्र के केन्द्रीय पुस्तकालय में गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सम्पूर्ण 70 खण्डों का वांग्मय  साहित्य स्थापित किया गया. यह वांग्मय साहित्य गायत्री परिवार रचनात्मक ट्रस्ट, गायत्री ज्ञान मंदिर इन्दिरा नगर की सक्रिय कार्यकर्ता साधना एवं सतीश मिश्रा ने संस्थान के पुस्तकालय को भेंट किया। साथ-साथ सभी छात्र-छात्राओं एवं उपस्थित चिकित्सकगणों को भी एक-एक पत्रिका भेंट की गयी।

 

मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार रखते हुए रिटायर्ड आईएएस बीडी सिंह ने कहा ‘‘युग ऋषि का साहित्य जीवन दर्शन है। इस साहित्य का स्वाध्याय कर मानव जीवन के महत्व को समझा जा सकता है।’’

 

इस अवसर पर वांग्मय स्थापना अभियान के मुख्य संयोजक उमानंद शर्मा ने प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘‘सद्ज्ञान मानव जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है।’’ और कहा कि यहाँ स्थापित किया गया वांग्मय साहित्य 284वां है. उन्होंने बताया कि 301 पुस्तकालयों में ऋषि वांग्मय का साहित्य स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित है. इस अवसर पर उदयभान सिंह भदौरिया, डॉ. नरेन्द्र देव,  संस्थान की निदेशक डॉ. गायत्री सिंह, प्रधानाचार्या एवं छात्र-छात्रायें मौजूद थे.