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‘सही तरीके’ और ‘सही समय’ से लेने पर ही लाभ देती हैं आयरन की गोलियां

-अत्यन्त सरल शब्दों में जानकारी दे रहे वरिष्ठ हेमोटोलॉजिस्ट प्रो ए.के.त्रिपाठी

-रक्त और उसके अवयव भाग- 3

प्रो ए.के.त्रिपाठी

सेहत टाइम्स

केजीएमयू, आरएमएलआई और एसजीपीजीआई में महत्वपूर्ण पदों पर सेवारत रह चुके राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ हेमेटोलॉजिस्ट प्रो ए.के.त्रिपाठी द्वारा आम व्यक्ति को स्वस्थ रहने के गुण बताने तथा मेडिकल स्टूडेंट्स को रुचिकर तरीके से जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से ‘सेहत टाइम्स’ में शुरू की गयी शृंखला में ‘रक्त और उसके अवयव’-भाग 3 प्रस्तुत है।

भाग 1 में ‘हृदय और गुर्दा रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है एनीमिया’ और भाग 2 में ‘झुंझलाहट, गुस्सा, बेचैनी की वजह हो सकती है खून में आयरन की कमी’ शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की जा चुकी है। तीसरे भाग में डॉ त्रिपाठी ने अत्यन्त महत्वपूर्ण बात कि आयरन की गोली खाने के बावजूद आयरन की कमी क्यों पूरी नहीं हो पा रही है, इसके बारे में जानकारी दी है।

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पार्ट 1 – ‘हृदय और गुर्दा रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है एनीमिया’

पार्ट 2  – ‘झुंझलाहट, गुस्सा, बेचैनी की वजह हो सकती है खून में आयरन की कमी

डॉ एके त्रिपाठी ने बताया कि बहुत बार ऐसा भी होता है कि खून में आयरन की कमी का पता चलने के बाद लोग अपने मन से या आधी-अधूरी सलाह के साथ आयरन की टेबलेट खाते हैं, कुछ दिनों तक खाते रहने के बाद जब फिर टेस्ट कराया जाता है तो पता चलता है कि दवाओं से लाभ नहीं हो रहा है। डॉ त्रिपाठी ने बताया कि इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन एक बहुत ही आम कारण रोगी द्वारा आयरन की टेबलेट का सही प्रकार से सेवन न करना है।

उन्होंने बताया कि इस तरह की समस्या से ग्रस्त व्यक्ति के उपचार के लिए सबसे पहले यह देखना चाहिये कि किस प्रकार के एनीमिया से ग्रस्त है, यह जांच ब्लड से स्लाइड (Blood film) बना कर की जाती है। हिमोग्लोबिन कम होने पर आयरन की मात्रा का आकलन करने के लिए सीरम फेरीटिन की जांच की जाती है। यदि यह कमी निकलती है तो इसकी कमी पूरी करने के लिए आयरन के कई तरह के कम्पाउण्ड (उत्पाद) बाज़ार में उपलब्ध हैं, कुछ सस्ते, कुछ काफी महंगे। उन्होंने कहा कि यहां मैं यह साफ करना चाहता हूं कि सस्ती और महंगी आयरन दवाओं का यह मतलब नहीं है कि सस्ती वाली दवा ठीक नहीं है, या महंगी वाली दवा ज्यादा फायदा करती है।

पाठक भी पूछ सकते हैं अपने प्रश्न

प्रत्येक एपीसोड के विषय में कोई भी व्यक्ति अथवा मेडिकल स्टूडेंट का कोई प्रश्न होगा तो प्रो एके त्रिपाठी के हवाले से उस प्रश्न का उत्तर दिया जायेगा। (आपकी स्क्रीन पर दिये व्हाट्सऐप बटन पर क्लिक कर अपना प्रश्न भेज सकते हैं)

उन्होंने बताया कि सामान्यतः फेरस सल्फेट की गोलियां ही लेनी चाहिए। एनीमिया के मरीजों में इसकी सही खुराक दिन में तीन गोलियां लेने की है। प्रत्येक गोली 200 मि०ग्रा० होती है जिसमें 60 मि०ग्रा० सक्रिय तत्व (आयरन) होता है। कुछ लोगों को दिन में तीन गोलियाँ बर्दाश्त नहीं हो पाती है, पेट खराब हो जाता है या पेट साफ नहीं होता। ऐसी अवस्था में दिन में दो गोली ही खायी जा सकती है। यदि फिर भी न बर्दाश्त हो तो अन्य प्रकार के आयरन के कम्पाउण्ड लिये जा सकते हैं।

डॉ त्रिपाठी ने बताया कि यहां खास बात यह है कि जब व्यक्ति को आयरन की दवा दी जाती है तो बहुत से मरीज सुबह चाय-नाश्ते के साथ और रात्रि को भोजन के साथ लेते हैं, जो कि गलत है। उन्होंने बताया कि आयरन की गोली न तो खाली पेट लेनी चाहिए और न ही खाने के साथ, बल्कि खाना खाने के कम से कम एक घण्टा बाद। खाली पेट आयरन लेने से मिचली उल्टी हो सकती है और भोजन के साथ लेने पर भोज्य पदार्थों में उपस्थित कुछ अवयव आयरन को ठीक से पचने नहीं देते। चाय के साथ आयरन बिल्कुल नहीं लेना चाहिए क्योंकि उसमें (चाय में) उपस्थित टैनिन आयरन के पाचन में बाधक होता है।

डॉ त्रिपाठी ने बताया कि आयरन की गोली विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों जैसे नींबू, आंवला के साथ ज़्यादा फायदेमंद होता है। उन्होंने बताया कि आयरन का इंजेक्शन भी आता है, मुझसे मरीज पूछते हैं कि क्या गोली की अपेक्षा इंजेक्शन का असर जल्दी होता है, तो मैं बता दूं कि इंजेक्शन लगवाने से गोली की अपेक्षा तेज फायदा होगा यह जरूरी नहीं। आयरन के इंजेक्शन तभी लगवाना चाहिए जब आयरन की गोली बिल्कुल बर्दाश्त न हो रही हो या आंतों की बीमारी की वजह से गोली (आयरन) का समुचित पाचन न हो पा रहा हो।

डॉ त्रिपाठी ने बताया कि आयरन का इंजेक्शन कैसे लगना है और कौन सा कम्पाउण्ड लगाना है, इसका निर्णय बहुत सोच समझ कर लेना चाहिए। इन्ट्रामस्कुलर (मांस में लगाये जाने वाले) आयरन का इंजेक्शन अब प्रचलन में नहीं है क्योंकि इससे मांस पेशियों में घाव व इन्फेक्शन की सम्भावना होती है। नसों में ग्लूकोज के माध्यम से (इन्ट्रावीनस ड्रिप) लगाया जाने वाला कम्पाउण्ड अच्छा रहता है। इसके लिए आयरन सुकरोज का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि इससे रियेक्शन कम होता है। अब और नये नये इन्ट्रावीनस आयरन (जैसे Iron- Polymaltose) बाजार में उपलब्ध हैं, जिनसे कोई रियेक्शन नहीं होता है। पहले डैक्स्ट्रान का प्रयोग होता था जिसमें रियेक्शन की समस्या ज्यादा थी। आयरन के इंजेक्शन की आवश्यकता डायलिसिस करा रहे मरीजों में भी होती है जिनमें आयरन की काफी कमी हो जाती है।

आयरन प्रयोग सम्बन्धी ज़रूरी बातें

1. पूरी खुराक लें।

2. कोर्स पूरा करें।

3. खाली पेट या भरे पेट न ले, खाने के 1 घंटा बाद लें।

4. आयरन गोली चाय या दूध के साथ न लें बल्कि पानी के साथ लें।

5. विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ के साथ आयरन लें।