भारत और बांग्‍लादेश मिलकर करेंगे दोनों देशों से तम्‍बाकू का खात्‍मा

बांग्‍लादेश के सांसद की मौजूदगी में इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी अस्थमा एण्ड एप्लाइड इम्यूनोलोजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की घोषणा

 

लखनऊ। भारत और बांग्‍लादेश मिलकर तम्‍बाकू के खिलाफ अभियान चलायेंगे और दोनों देशों से तम्‍बाकू को खत्‍म करेंगे। यह बात 19 अप्रैल को केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में तम्बाकू के विरोध में एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी अस्थमा एण्ड एप्लाइड इम्यूनोलोजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केजीएमयू के रेस्‍पाइरेटरी विभाग के विभागाध्‍यक्ष प्रो सूर्यकांत ने कही। इस संगोष्‍ठी में बांग्लादेश के सांसद व सुप्रीम कोर्ट के प्रख्यात बैरिस्टर शमीम हैदर पटवारी मुख्य वक्ता रहे।

प्रो सूर्यकांत ने शमीम पटवारी व बांग्लादेश से आये उनके दो सहयोगी वकील बैरिस्टर मो0 कमल हुसैन, बैरिस्टर मो0 कमरुजमुल्लाह का स्वागत करते हुए कहा कि संयुक्त भारत में बंगाल की धरती क्रान्तिकारियों, बुद्धिजीवियों, कलाकारों की धरती रही है तथा भारत का पहला नोबल पुरस्कार बंगाल की धरती के पुत्र रवीन्द्रनाथ टैगोर को ही मिला था। डा0 सूर्यकान्त ने आगे बताया कि‍ भारत में तम्बाकू के उपयोग के कारण प्रतिवर्ष 12 लाख लोगों की मुत्यु होती है। भारत तम्बाकू का दुनिया में दूसरे नम्बर का उत्पादक एवं निर्यातक है। प्रोफेसर सूर्यकान्त ने बताया कि‍ तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट के कारण 40 तरह के कैंसर तथा 25 तरह की अन्य बीमारियां होती हैं। डॉ सूर्यकान्त ने आगे बताया कि कुछ लोग तम्बाकू को राजस्व का प्रमुख स्रोत मानते है जो कि एक मिथक है, पूरे देश मे तम्बाकू से लगभग 30 हजार करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है, जबकि इससे होने वाली बीमारियों पर लगभग 1 लाख करोड़ से ज्यादा धन की खपत होती है। डा0 सूर्यकान्त ने कहा कि भारत एवं बांग्लादेश मिलकर तम्बाकू के विरुद्ध एक सघन अभियान चलायेंगे और दोनों देशों से तम्बाकू की समाप्ति करेंगे।

बैरिस्टर पटवारी ने केजीएमयू के चिकित्सकों, जूनियर डाक्टरों, उप्र राज्य तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों एवं यूपी वालेन्टरी हेल्थ एसोसिएशन के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बांग्लादेश वह दुर्भाग्यशाली राष्ट्र है, जिसके लोगों ने कभी देश विभाजन की मांग नहीं की, लेकिन मजबूरी में उसे दो बार विभाजन (सन् 1947 एवं 1971 में) का दंश झेलना पड़ा । उन्होंने कहा कि हमारे देश में तम्बाकू भारत की ही तरह बीड़ी, सिगरेट, खैनी आदि के रूप में प्रयुक्त की जाती है, जिससे सांस की बीमारियां, कैंसर, दिल और दिमाग की बीमारियां, ब्लड़ प्रेशर आदि प्रमुख समस्याए होती हैं। श्री पटवारी ने कहा बंग्लादेश में चिकित्सकों की संख्या बहुत कम है। 16000 की जनसंख्या पर एक चिकित्सक है, अतः एक चिकित्सक रोगी के परीक्षण के लिए 26 सेकेण्ड का ही समय दे पाता है।

उन्‍होंने कहा पिछले 10 वर्षों से उन्होंने तम्बाकू के विरूद्ध एक अभियान छेड़ा हुआ है और अपने लोकसभा क्षेत्र में विषेष जनजागरूकता का अभियान चला रहे हैं। प्रोफेसर इस कार्यक्रम मे वेवकास्ट के माध्यम से सिंगापुर के डा0 तारासिंह वाम, डिप्टी रीजनल डायरेक्टर (एशिया पेसिफिक), इंन्टरनेशनल यूनियन अगेन्स्ट टयूबरकुलोसिस एण्ड लंग डिजिज और बास्टन अमेरिका से माइकल लिजेन्डे, एसोसिएट कैम्पेन डायरेक्टर, कॉरपोरेट एकाउन्टबिलिटी इन्टरनेशनल ने तम्बाकू के कारण हो रही बीमारियों और मौतों की जानकारी दी। इस कार्यक्रम का सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया भर के देशों में सजीव प्रसारण किया गया।

 

इस कार्यक्रम में यूपी स्टेट टोबेको सेल के सलाहकार सतीश त्रिपाठी, यूपी वालेन्टरी हेल्थ एसोसिएशन के पदाधिकारी और रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग से डॉ सन्तोष कुमार, डा0 अजय वर्मा, डा0 आनंद श्रीवास्तव, डा0 मनोज पाण्डेय और अन्य जूनियर रेजीडेन्ट, शोध छात्र अनुज पाण्डेय, रमन मेग्ससे अवार्ड से सम्मानित डा0 सन्दीप पाण्डेय, भारतीय विष अनुसंधान केन्द्र के डॉ चन्द्र मोहन तिवारी तथा अन्य स्वंय सेवी संस्थाओ के लोग मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन विभाग की सीनियर रेजीडेन्ट डा0 ज्योति बाजपेई ने किया।