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गलत डायग्नोसिस ने 35 फीसदी रोगियों को बना दिया अस्थमा का रोगी

इराज मेडिकल कॉलेज में विश्व अस्थमा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते  प्रो राजेन्द्र प्रसाद।

लखनऊ। अगर आपको खांसी, छाती में सीटी की आवाज आना, सांस फूलना और छाती में कसाव जैसा महसूस हो रहा है तो यह लक्षण अस्थमा के हो सकते हैं लेकिन आवश्यक यह है कि इन लक्षणों के होने पर किसी विशेषज्ञ को ही दिखायें, क्योंकि जरूरी नहीं है कि आपको अस्थमा की शिकायत हो, एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन रोगियों को अन्य डॉक्टरों ने अस्थमा से ग्रस्त बताया था उनमें से सिर्फ 65 फीसदी को ही अस्थमा होने की पुष्टि विशेषज्ञों ने की बाकी 35 फीसदी को अस्थमा नहीं था।

सही चिकित्सक का करें चुनाव

यह महत्वपूर्ण जानकारी वल्लभ भाई पटेल इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक व इराज मेडिकल कॉलेज के पल्मोनरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो राजेन्द्र प्रसाद ने यहां आज यहां इराज मेडिकल कॉलेज में विश्व अस्थमा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में दी। उन्होंने बताया कि मैंने एक शोध किया था जिसमें पाया गया कि बाहर के चिकित्सकों द्वारा जिन 120 रोगियों को अस्थमा का रोगी बताकर विशेषज्ञ के पास भेजा गया था उनमें 35 प्रतिशत को अस्थमा की शिकायत नहीं निकली। उन्होंने बताया कि आवश्यक है कि सही चिकित्सक का चुनाव करें।

सिर्फ 28 फीसदी रोगी सही तरीके से कर रहे थे इनहेलर का प्रयोग

एक और महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए डॉ प्रसाद ने बताया कि इसी प्रकार इन रोगियों में देखा गया कि सिर्फ  28 फीसदी मरीज ही इनहेलर का सही तरीके प्रयोग करते पाये गये, यानी 72 फीसदी लोग इनहेलर का प्रयोग कर तो रहे थे लेकिन उसका सही ढंग से प्रयोग नहीं कर रहे थे। उन्होंने बताया कि फिर इसके बाद मरीज और उनके रिश्तेदारों को इनहेलर लेने का सही तरीका बताया।

ध्यान दें तो सामान्य जीवन जी सकते हैं अस्थमा के रोगी

इसी प्रकार एक ओर खास जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अस्थमा के रोगी घबरायें नहीं, डॉक्टर के कहने के अनुसार समुचित तरीके से दवाओं का सेवन करें। दवाओं का सही तरीके से सेवन करने पर अस्थमा रोगी भी एक सामान्य जैसा जीवन जी सकते हैं।

हर वर्ष 3,83,000 अस्थमा के मरीजों की हो जाती है मौत

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने आगे बताया इनहेलर थेरेपी अस्थमा के इलाज का मुख्य आधार है उन्होनें ये भी बताया कि बहुत से लोगों को इनहेलर लेने का डर भी लगा रहता है। उन्होनें वल्लभ भाई पटेल चेस्ट इस्टीट्रयूट नई दिल्ली के अपने ही एक शोध का हवाला देते हुए कहा कि 120 अस्थमा रोगियों में से सिर्फ 65 प्रतिशत को ही अस्थमा पाया गया और 28 प्रतिशत अस्थमा रोगी इनहेलर का सही सेवन करते हुए पाये गये उन्होनें उपस्थित डॉक्टर, मरीज तथा मरीज के रिश्तेदारों को सलाह दी कि हर बार इनहेलर के सेवन का सही तरीका समझें। अस्थमा के कारण विश्व भर में प्रतिवर्ष 3,83,000 व्यक्तियों की मत्यु होती है। जबकि देखा जाये तो यदि अस्थमा का रोगी ठीक ढंग से दवा ले रहा है तो अस्थमा से मौत नहीं होनी चाहिये।
आकलन के अनुसार 3-38 प्रतिशत बच्चों में और 2-12 प्रतिशत बालिग व्यक्तियों में अस्थमा कारोग है। इंडियन स्टडी ऑन एपिडीमियोलॉजी ऑन अस्थमा, रेस्पीरेटरीसिम्पटपस एण्ड ब्रोनकाइटिस के हाल के अध्ययन जिसमें 1,70,000 स्त्री पुरुष शामिलहै। उसके अनुसार भारतमें 15 वर्ष से ज्यादा उम्र के व्यक्तियों में अस्थमा का रोग 2.05 में प्रतिशत है और भारतमें 18 लाख अस्थमा रोगी है। अस्थमा श्वास नलियों को प्रभावित करता है जो फेफड़े के भीतर हवा का आदान-प्रदान करती है जब कोई अस्थमा रोगी किसीभी ऐसे तत्व के सम्पर्क में आता है, जो अस्थमा की सक्रियता को बढ़ाता है तब  श्वास नलियों में मौजूद महीन मांसपेशियों में स्राव उव्पन्न होता है और वे सिकुड़ जाती हैं और अन्दर की ओर सूजन आ जाती है। साथ ही चिपचिपा बलगम बनने लगता है। फूलों से उत्पन्न होने वाला पराग, धूल के कण, कीड़े, जानवरों की रुसी, फफूंदी, खाद्य पदार्थ, वातावरण प्रदूषण तम्बाकू का धुआंधार  तौर पर अस्थमा की सक्रियता बढ़ाते हैं।

विश्व में 30 करोड़ अस्थमा के रोगी

आकलन के अनुसार विश्व में 30 करोड़  अस्थमा रोगी हैं जिसमें 10 प्रतिशत भारत में हैं। खॉसी, छाती में सीटी की तरह आवाज सांस फूलना एवं छाती में कसाव अस्थमा के सामान्य लक्षण हैं।इस मौके पर 150 मरीज और मरीजों के तीमारदार मौजूद रहे। साथही डॉ. आनन्द कुमार वर्मा, डॉ. अभिषेक अग्रवाल, डॉ. सौरभ करमाकर एव सभी जूनियर डॉक्टर उपस्थित रहे।

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