गाउट रोग के हैं शिकार तो इन चीजों से रखें दूरियां और नजदीकियां

-यूरिक एसिड बढ़ने के कारण होता है गाउट का रोग

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। शरीर में यूरिक एसिड मेटाबॉलिज्म बढ़ने से होने वाली बीमारी गाउट में चिकित्सा के साथ-साथ खानपान पर नियंत्रण रखना बहुत आवश्यक है।

गाउट के मरीजों को खान-पान के बारे में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की चीफ डाइटीशियन सुनीता सक्सेना बताती हैं कि‍ गाउट में वजन को नियंत्रित रखना बहुत आवश्यक है इसलिए जरूरी है कि 1200 से 1400 कैलोरी तक का भोजन लें, साथ ही नियमित व्यायाम करें। उन्‍होंने बताया कि प्रोटीन की मात्रा सामान्य मात्रा से थोड़ी कम दी जाती है, इसलिए साबुत दालें, सोयाबीन, मटर आदि कम मात्रा में खाएं।

अधिक घी, तेल, मक्‍खन, मलाईयुक्‍त भोजन से परहेज करें। दिन भर में 4 से 5 चम्‍मच चिकनाई का प्रयोग करें।  इसमें खाना बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली चिकनाई भी शामिल है। पेय पदार्थों की बात करें तो दिन भर में ढाई से तीन लीटर तक जरूर लें जिससे कि यूरिन क्षारीय बनी रहे।

सुनीता सक्‍सेना

सुनीता सक्‍सेना ने बताया कि उच्च प्‍यूरिन तत्‍व वाले भोजन जैसे रेडमीट, यकृत, कलेजी आदि को और इससे बने सूप, शोरबा, राजमा मटर, चना, मसूर, मशरूम, गोभी, पालक, बेकरी फूड्स का परहेज करें क्योंकि इनका प्रयोग करने से यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। इसके अलावा चाय, कॉफी, अल्‍कोहल का सेवन न करें।

जिन चीजों को एक निश्चित मात्रा में स्‍वतंत्र रूप से खाया जा सकता है उनमें गेहूं, चावल, सूजी, मैदा, धुली दालें, फल, हरी सब्जियां, दूध से बने पदार्थ शामिल हैं।

क्‍या होता है गाउट

रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा महिलाओें में 2.5 से 7.5 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर  तथा पुरुषों में 4.0 से 8.5 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर होती है लेकिन जब यूरिक एसिड की मात्रा इससे ज्यादा होने लगती है तो यूरिक एसिड का शरीर से बाहर निकलना नहीं हो पाता है, और ऐसी स्थिति में यूरिक एसिड क्रिस्‍टल्‍स घुटने, एड़ी व जोड़ों पर इकट्ठा होने लगते हैं, इसकी वजह से इस पर सूजन आ जाती है और भयंकर दर्द होता है, यही स्थिति गाउट कहलाती है। देखा गया है यह रोग 40 साल के बाद पुरुषों में तथा महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद देखने को ज्यादा मिलता है।