पत्‍नी या पति के लिए चिकित्‍सा प्रतिपूर्ति दावे में नहीं देना होगा उसके आश्रित होने का प्रमाण

-चिकित्‍सा प्रतिपूर्ति के लिए आश्रितों की परिभाषा में पति-पत्‍नी शामिल नहीं

-अपर मुख्‍य सचिव चिकित्‍सा स्‍वास्‍थ्‍य ने शासनादेश जारी कर स्थिति की स्‍पष्‍ट

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश शासन के चिकित्‍सा विभाग ने यह स्‍पष्‍ट कर दिया है कि सरकारी सेवक पर आश्रित की परिभाषा में पति-पत्‍नी को अलग रखा गया है यानी अब सरकारी दस्‍तावेजों में चिकित्‍सा प्रतिपूर्ति की धनराशि के लिए क्‍लेम करते समय पत्‍नी के इलाज पर खर्च हुई धनराशि के क्‍लेम के लिए यह प्रमाणित नहीं करना होगा कि पत्‍नी उन पर आश्रित है या पत्‍नी द्वारा पति की बीमारी के खर्च को क्‍लेम करने के लिए यह प्रमाणिन नहीं करना होगा कि पति उन पर आश्रित है।

यह जानकारी देते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने बताया कि अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य आलोक कुमार ने चिकित्सा परिचर्या नियमावली 2014 के नियम 3 (च) के अंतर्गत पति पत्नी के एक दूसरे पर आश्रित होने के संबंध में एक शासनादेश कर जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्‍होंने बताया कि परिवार की परिभाषा को पुनः परिभाषित करते हुए शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि “किसी परिवार के ऐसे सदस्यों, जिनकी उपचार आरंभ करने के समय सभी स्रोतों से आय रुपये 3500 एवं रुपये 3500 प्रतिमाह की मूल पेंशन पर अनुमन्य महंगाई भत्ता से अधिक ना हो, को पूर्णतया आश्रित माना जाएगा।” सरकार ने शासनादेश में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि “सरकारी सेवक पर आश्रित की परिभाषा पति-पत्नी पर लागू नहीं होगी।”

उन्‍होंने बताया कि परिवार के आश्रित की परिभाषा को और अधिक स्पष्ट करते हुए आश्रित की श्रेणी में माता-पिता, सौतेले बच्चे, अविवाहित /तलाकशुदा/ परित्यक्त पुत्री, अविवाहित/ तलाकशुदा/ परित्यक्त बहनें, अवयस्क भाई एवं सौतेली माता को सम्मिलित किया गया है। इसके पूर्व सरकारी सेवक पर आश्रित की परिभाषा में पति पत्नी को भी शामिल किया गया था, जिसका विरोध राज्य राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने किया था।

जे एन तिवारी ने यह प्रकरण 28 अक्टूबर को संयुक्त परिषद के प्रतिनिधियों की वार्ता में मुख्य सचिव के समक्ष उठाया था। मुख्य सचिव ने इस पर तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए थे, उसी क्रम में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आलोक कुमार के हस्ताक्षर से 26 नवंबर को संशोधित शासनादेश निर्गत किया गया है। जे  एन तिवारी ने इस शासनादेश के लिए मुख्य सचिव आर के तिवारी एवं अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ आलोक कुमार का आभार व्यक्त किया है।