मध्‍य प्रदेश में राजनीतिक उथलपुथल के बीच मनी होली, कमलनाथ की सत्‍ता डोली

-कांग्रेस से नाराज चल रहे राहुल गांधी के चहेते ज्‍योतिरादित्‍य ने छोड़ा हाथ का साथ
-दादी, दो बुआ व भाई के पाले में पहुंच थाम लिया भारतीय जनता पार्टी का दामन 

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो 

नयी दिल्‍ली/लखनऊ। होली के त्‍यौहार के बीच मध्‍य प्रदेश में भी बड़ी राजनीतिक हलचल हो ली, पिता माधव राव सिंधिया के नक्‍शेकदम पर चलते हुए शुरू से कांग्रेस का हाथ थामे रहे ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने ‘हाथ’ का साथ छोड़ भारतीय जनता पार्टी का ‘कमल’ पकड़ लिया। इस तरह मध्‍य प्रदेश में पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज को महाराज (ज्‍योतिरादित्‍य) का साथ मिल गया। यही नहीं ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के समर्थक विधायकों की बड़ी संख्‍या ने भी पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए कमलनाथ सरकार के धराशायी होने का मार्ग प्रशस्‍त कर दिया है, मीडि‍या रिपोर्ट्स के अनुसार  बताया जाता है कि करीब कांग्रेस के 30 विधायकों का कांग्रेस से मोह भंग हो गया है, इनमें से 22 विधायकों ने अपना इस्‍तीफा भी सौंप दिया है, शेष भी किसी भी समय विधिवत रूप से अपना इस्‍तीफा सौंपने का ऐलान करने वाले हैं।

होली का त्‍यौहार भारतीय जनता पार्टी के लिए मध्‍य प्रदेश की राजनीति में नयी उम्‍मीदें लेकर आया, जब पूरा देश होली के त्‍यौहार में डूबा हुआ था तभी मध्‍य प्रदेश के ग्‍वालियर के सिंधिया राजघराने के राजकुमार ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने कांग्रेस से अपने 18 वर्ष पुराने रिश्‍तों को तोड़ने का ऐलान कर दिया, इसके साथ ही अपनी आगे की राजनीतिक पारी खेलने के लिए अपने परिवार दादी राजमाता विजयराजे सिंधिया और बुआ वसुंधरा राजे व यशोधरा राजे सिंधिया की पार्टी भारतीय जनता पार्टी की पिच का चुनाव कर लिया। वसुंधरा राजे सिंधिया के बेटे दुष्यंत भी भाजपा के सांसद हैं। भाजपा ने भी हाथ का साथ छोड़ कमल थामने आये ज्‍योतिरादित्‍य का गर्मजोशी से स्‍वागत करते हुए पार्टी में स्‍वागत के साथ ही तोहफे के रूप में राज्‍यसभा की सीट का टिकट भी थमा दिया।

मंगलवार की सुबह जब देश में होली का त्‍यौहार मनाया जा रहा था, तभी ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार  इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर मुलाकात की। इससे पहले, मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी के साथ सिंधिया की बैठक लगभग एक घंटे तक चली। इसके बाद सिंधिया ने ट्विटर पर अपना इस्तीफा पोस्ट किया। सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते सिंधिया को निष्कासित किया गया है।

इस प्रकार राजनीतिक उठापटक के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की उपस्थिति में पार्टी में शामिल हुए। इस मौके पर सिंधिया ने नड्डा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्‍होंने अपने परिवार में स्‍थान दिया।

इस मौके पर अपने सम्‍बोधन में ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने कहा कि मेरे लिए 2 जीवन बदलने वाली घटनाएं हुई हैं – एक, जिस दिन मैंने अपने पिता को खोया और दूसरा, कल जब मैंने अपने जीवन के लिए एक नया रास्ता चुनने का फैसला किया… उन्‍होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी अब वह पार्टी नहीं रही है जो वह पहले थी।  उन्‍होंने कहा कि मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि जन सेवा का उद्देश्य उस पार्टी (कांग्रेस) द्वारा पूरा नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा, पार्टी की वर्तमान स्थिति यह इंगित करती है कि यह वैसी नहीं है जैसी वह हुआ करती थी।

उनके साथ ही मध्य प्रदेश के 22 कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा दे दिया जिससे प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार गिरने के कगार पर पहुंच गई है। सिंधिया का कांग्रेस में 18 साल का संबंध रहा है।

आपको बता दें कि विजयाराजे सिंधिया जनसंघ और भाजपा की संस्थापक सदस्यों में रही हैं। उन्होंने जनसंघ और भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव भी जीता था। वहीं, ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस पर भरोसा जताया और पार्टी के साथ रहे।