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ई सिगरेट पर लगी रोक हाई कोर्ट ने हटायी

ड्रग की परिभाषा में नहीं है ई सिगरेट, इसलिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत रोक संभव नहीं

लखनऊ। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत ई-सिगरेट को विनियमित नहीं किया जा सकता। इस पर उच्च न्यायालय द्वारा रोक का आदेश दिया गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बीती 18 मार्च के अपने आदेश के माध्यम से ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलर को अपने संबंधित राज्यों में इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ईएनडीएस) और ऐसे उत्पादों के निर्माण, वितरण, बिक्री (ऑनलाइन सहित), आयात, विज्ञापन और व्यापार को प्रतिबंधित करने के लिए जारी पत्र के प्रचालन पर रोक लगा दी।

 

न्यायालय ने 27 नवंबर, 2018 के कस्टम्स सर्कुलर पर भी स्थगन आदेश दिया जिसमें सभी कस्टम अधिकारियों को, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 का अनुपालन नहीं करने पर ईएनडीएस और ऐसे उत्पादों के आयात को प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र और सर्कुलर पर स्थगन 17 मई, 2019 तक वैध है।

 

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव नैय्यर ने तर्क दिया कि निषेध ज्वलनशील सिगरेट की तुलना में सुरक्षित विकल्प चुनने के किसी व्यक्ति के अधिकार को गंभीरता से प्रभावित करता है। याचिकाकर्ता ने 24 जुलाई, 2015 की ड्रग्स सलाहकार समिति की 48वीं बैठक की रिपोर्ट और विभिन्न आरटीआई उत्तरों पर भी भरोसा किया, जिसमें ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने सिफारिश की है कि ‘‘ई सिगरेट ड्रग की परिभाषा में शामिल नहीं हैं और इसलिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के दायरे के अंतर्गत नहीं आते। अतएव ई सिगरेटों को उक्त अधिनियम के प्रावधानों के तहत विनियमित नहीं किया जा सकता।‘‘

 

जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय के एएसजी ने तर्क दिया कि ई सिगरेटों पर सुरक्षा अध्ययन की पुष्टि होनी बाकी है और याचिकाकर्ता का तर्क है कि ईएनडीएस ऐसा साधन है जो एक व्यक्ति को धूम्रपान छोड़ने में मदद करता है, यह धूम्रपान करने का एक सुरक्षित विकल्प है और निकोटीन के समान है, दलीलें सुनने के बाद न्यायालय की राय में प्रथम दृष्टया ईएनडीएस ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की परिभाषा में शामिल नहीं है।

 

चूंकि उत्पाद एक दवा नहीं है, इसलिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को ईएनडीएस को प्रतिबंधित करने वाला पत्र और परिपत्र जारी करने का कोई क्षेत्राधिकार नहीं था।

 

इस स्थगन का निहितार्थ राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश (अगस्त 2018) पर है। कई राज्यों द्वारा ईएनडीएस पर लागू प्रतिबंध इस दायरे में आ सकते हैं क्योंकि उनके पास कोई कानूनी ढांचा नहीं है जिसके तहत ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाया गया है।