-राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने कहा अब सब्र की सीमा समाप्त हो रही

सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार आउटसोर्सिंग के जरिये कर्मचारियों की भर्ती न करके बेरोजगारों से अन्याय करने के साथ ही उच्च न्यायालय के आदेशों की भी अवमानना कर रही है। परिषद ने हाई कोर्ट के के आदेशानुसार आउटसोर्सिंग की जगह स्थायी नियुक्तियां किये जाने की मांग की है। परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने कहा कि जो पद सृजित हैं उन पर भी नियुक्तियाँ नहीं हो रही है। पदों पर स्थाई नियुक्तियों की जगह संविदा और आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य को लिया जाना जनहित में नहीं है। संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों का भी भविष्य अंधकारमय है, अब कर्मचारियों के सब्र की सीमा समाप्त हो रही है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने सभी कर्मियों को स्थायी नियुक्ति के माध्यम से समायोजित करते हुये उनके भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की है जब तक यह प्रक्रिया पूर्ण नही होती तब तक इनकी सेवाएं निरंतर रखी जाए, अन्यथा इन कर्मचारियों के रोटी के लाले पड़ जाएंगे।
परिषद ने कहा कि उच्च न्यायालय ने खुद कहा है कि स्थायी नियुक्तियां की जानी चाहिए, जिसकी अनदेखी कर सरकार ने 18 दिसम्बर को जेम पोर्टल से आउटसोर्सिंग पर भर्ती के निर्देश दे दिए जो न्यायालय की भी अवमानना है साथ ही युवा बेरोजगारों के हितों के प्रतिकूल है।
आउटसोर्सिंग या संविदा के कर्मियों का भविष्य हमेशा अंधकारमय होता है, सरकारी गोपनीयता भी भंग हो सकती है, क्योंकि ऐसे कर्मियों की जबाबदेही तय नहीं की जा सकती। साथ ही जब तक संविदा कर्मियों की स्थायी नीति नही बनती तब तक इनके भविष्य का भी कुछ पता नही है, अक्सर यह भी देखा जाता है कि आउटसोर्सिंग की संस्थाएं बिना किसी उचित योग्यता के कर्मियों को नियोजित कर लेती हैं जिससे शासकीय कार्य प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में शासन को न्यायालय की मंशा और जनहित में आउटसोर्सिंग संविदा की जगह स्थायी नौकरियां देनी चाहिए।

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