पहली टेस्‍ट ट्यूब बेबी प्रार्थना को 21वीं बर्थडे पर ड्रीम गर्ल-सेलीब्रिटी बनाया गीता मां ने

-अजंता हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर ने आयोजित की वार्षिक टेस्‍ट ट्यूब बेबी मीट
-नयी प्रणालियों के चलते आईवीएफ अब पहले से ज्‍यादा सफल और कम खर्चीला

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। अपनी प्रथम टेस्‍ट ट्यूब बेबी प्रार्थना ने अपनी 21वीं बर्थडे का केक अपनी गीतामां (डॉ गीता खन्‍ना) के संग काटा, प्रार्थना का जन्‍म 16 नवम्‍बर, 1998 को आलमबाग स्थित अजंता हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर की निदेशक व आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ गीता खन्‍ना ने ही कराया था। डॉ गीता खन्‍ना ने भी प्रार्थना को भरपूर आशीर्वाद देते हुए उसे ताज पहनाकर ड्रीम गर्ल बनाते हुए आज एक सेलीब्रिटी का दर्जा दिया और अपने आईवीएफ सेंटर की नयी ओपीडी का उद्घाटन महापौर संयुक्‍ता भाटिया के साथ उससे संयुक्‍त रूप से कराया।

यादें : प्रार्थना 1998 में
अब : प्रार्थना 2019 में

 

 

 

 

 

 

टेस्‍ट ट्यूब बेबीज का सैलाब उमड़ा

आपको बता दें कि आज शनिवार को हॉस्पिटल द्वारा हर वर्ष आयोजित की जाने वाली टेस्‍ट ट्यूब बेबी मीट का आयोजन अस्‍पताल के लीला प्रेक्षागृह में किया गया। इसमें टेस्‍ट ट्यूब बेबीज का सैलाब उमड़ा। इस मौके पर हॉस्पिटल के कॉरीडोर में अंदर और बाहर सब तरफ टेस्‍ट ट्यूब बेबी ही टेस्‍ट ट्यूब बेबी नजर आ रहे थे इस बेबी मीट में तीन दिन के शिशु से लेकर 21 वर्ष के युवा हो चुके टेस्‍ट ट्यूब बेबीज के साथ ही उनके माता-पिता भी शामिल हुए, सभी ने जमकर डान्‍स किया, धमाल किया। डॉ गीता खन्‍ना ने सभी बच्‍चों और उनके माता-पिता को उपहार दिये।

इस मौके पर डॉ गीता खन्‍ना ने बताया कि‍ बांझपन क्षेत्र में तकनीकी प्रगति जैसे एआरटी प्रजनन में स्टेम सेल और पीआरपी (प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा) ने आईवीएफ सफलता की दर और इसकी लागत पर असर डाला है, इसकी सफलता की दर पहले लगभग 50-60% थी, लेकिन अब यह बढ़कर 80% तक हो गयी है।

डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि अब आईवीएफ विधि उन लोगों की पहुंच के दायरे में आ गई है जो पहले इसका खर्च नहीं उठा सकते थे, और यह सब संभव हुआ है अजंता हॉस्पिटल में आईवीएफ तकनीक में अत्याधुनिक प्रणाली से।

बांझपन अब अभिशाप नहीं, दूसरी बीमारियों की तरह

डॉ. गीता खन्ना ने एचआरपी(हाई रिस्क प्रेगनेंनसी) और वूमेन वेलनेस क्लीनिक की नयी ओपीडी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसकी स्थापना का मकसद है प्रजनन के उन जटिल केसों का निवारण करना है जो गंभीर और जानलेवा तक साबित होते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अब आईवीएफ तकनीक एक नये दौर में पहुंच गई है जहां अब बांझपन को अन्‍य बीमारी की तरह लिया जाता है। उन्होंने कहा कि अब वो दिन नहीं रहे कि जब मैंने 25 साल पहले अपना कॅरिअर शुरू किया था और बांझपन को एक अभिशाप समझा जाता था, अब चीजें बहुत बदल गई हैं। डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि फ्रीज कराया हुआ भ्रूण, अंडे, स्टेम कोशिकाएँ और पीआरपी तकनीक ने आईवीएफ उपचार को नए आयाम दिए हैं जो इस विधि के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

भ्रूण फ्रीज एक बार, शिशु का जन्‍म तीन बार

डॉ गीता ने कहा, “स्टेम सेल और पीआरपी तकनीक ने आईवीएफ उपचार में नए आयाम जोड़े हैं और अब आईवीएफ रोगियों के इलाज में भी अधिक संभावनाएं हैं। उसने कहा कि भ्रूण को फ्रीज करने की प्रक्रिया ने भी आईवीएफ उपचार की लागत को प्रभावी बना दिया है। उन्होंने कहा कि अंडों को फ्रीज करने से इसे दूसरी और तीसरी बार गर्भधारण करने में भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है। सेंटर पर ऐसे जोड़े आते हैं जो अपनी सहूलियत से दूसरे बच्‍चे की प्‍लानिंग कर फ्रीज किये हुए भ्रूण का इस्‍तेमाल गर्भधारण में करने की इच्‍छा जताते हैं।

एक छत के नीचे टरशरी केयर से सफलता का प्रतिशत ज्‍यादा

उन्‍होंने बताया कि‍ अजंता हॉस्पिटल एक मल्टी स्पेशलिटी केंद्र होने के चलते हम आईवीएफ मरीजों को होने वाली कोई भी मेडिकल स्थिति का सामना कर एडवांस टरशरी केयर से बचाने में सक्षम हैं। यहां तक कि सिंगल स्पेशिलिटी सेंटर भी अपने मरीजो को हमारे यहां भेजते है। आपको बता दें कि दो दशक पहले बांझपन के गहरे अंधेरे को चीरने वाली रोशनी की एक किरण जो डॉ गीता खन्‍ना ने दी थी, आज वह किरण चमकते हुए सूर्य की तरह अपना प्रकाश फैला रही है।

महापौर ने भी की डॉ गीता खन्‍ना की जमकर तारीफ

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महापौर संयुक्ता भटिया एवं नानक चंद थे। महापौर ने अपने सम्‍बोधन में कहा कि बच्‍चों की किलकारी की गूंज उन माताओं से पूछिये जिनकी गोद टेस्‍ट ट्यूब बेबी के माध्‍यम से भरी हैं। मां का जीवन संतान के बिना अधूरा है, सूनी गोद हमेशा की चुभन है, जीना दुश्‍वार कर देती है। उन्‍होंने टेस्‍ट ट्यूब बेबी की उपस्थित माताओें को सम्‍बोधित करते हुए कहा कि आप लोग कितनी भाग्‍यशाली हैं जिन्‍हें डॉ गीता ने ये खुशियां दी हैं, इसके लिए डॉ गीता के प्रयासों की जितनी तारीफ की जाये, वह कम है। उन्‍होंने कहा कि मैं तो आज से नहीं वर्षों से डॉ गीता खन्‍ना को जानती हूं, ये जो कार्य कर रही हैं, मैं इसके लिए इन्‍हें बहुत-बहुत शुभकामनायें देती हूं।

आईवीएफ एक वरदान

नानक चंद्र ने अपने सम्‍बोधन में कहा कि मां का स्‍थान सर्वोपरि है और अगर किसी अवरोध के कारण जो लोग इस सुख से वंचित रह जाते हैं, उनके लिए आईवीएफ एक वरदान साबित हुआ है। उन्‍होंने कहा‍ कि डॉ खन्‍ना के परिवार को आज से नहीं लम्‍बे समय से जानता हूं। इनके द्वारा की जा रही मरीजों की सेवा प्रशंसायोग्‍य है।

गुणवत्‍तापूर्ण इलाज से कोई समझौता नहीं

इससे पूर्व हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्‍टर डॉ अनिल खन्‍ना ने आये हुए सभी अतिथियों का स्‍वागत करते हुए कहा कि अजंता हॉस्पिटल की कोशिश हमेशा से सेवा को सर्वोपरि रखने की रही है, इसीलिए गुणवत्‍तापरक इलाज से अस्‍पताल कोई समझौता नहीं करता है। उन्‍होंने कहा कि अस्‍पताल के लिए यह गौरव की बात है कि वह संतान से वंचित जोड़ों के चेहरे पर मुस्‍कान लाने में अपनी उच्‍चकोटि की भूमिका निभा रहा है, इसी का नतीजा है कि आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ गीता खन्‍ना ने पिछले 21 सालों में लगभग 5000 से ज्‍यादा टेस्‍ट ट्यूब बेबी के जन्‍म अपनी देखरेख में कराये हैं।