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कोरोना की उत्‍पत्ति से लेकर अबतक की स्थिति पर वैज्ञानिक तथ्‍यों के साथ पहली बार होगी चर्चा

-आईएमए-एएमएस आयोजित कर रहा वेबिनार, रेस्पिरेटरी विशेषज्ञ लेंगे भाग

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। कोरोना महामारी से हुई त्रासदी के सभी तथ्यों को किसी भी मंच पर वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर नहीं रखा गया है। अब चेस्ट काउन्सिल ऑफ इंडिया एवं भारतवंशी रेस्पिरेटरी मेडिसिन विशेषज्ञों का एक व्हाट्सएप आधारित संगठन ने संयुक्‍त रूप से एक 24 जून को एक वेबिनार का आयो‍जन किया है। इस वेबिनार में इन सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जायेगा।

यह जानकारी देते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन- एकाडमी ऑफ मेडिकल स्पेशिलिटीज (आई.एम.ए.-ए.एम.एस.) के राष्ट्रीय वायस चेयरमेन तथा केजीएमयू, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागध्यक्ष डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि हम एक वैचारिक संगोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन करने जा रहे हैं जिसमें वायरस की उत्पत्ति से संबंधित वैज्ञानिक सिद्धांतों, शोध एवं अनुभवों पर चिंतन मनन व संपूर्ण चर्चा की जाएगी। इस चर्चा से हम यह निष्कर्ष निकालने की उम्मीद रखते हैं की मौजूद हालत में कैसे इस समस्या का जल्द से जल्द निपटारा किया जाये एवं भविष्य में होने वाली कोरोना या अन्य ऐसे ही किसी और प्रहार से विश्व एवं भारतीयों के स्वास्थ्य की किस प्रकार की रक्षा की जाए। आगामी गुरुवार 24 जून रात्रि 8 बजे से 9.30 बजे तक प्रसिद्ध पल्मनोलॉजिस्ट इस विषय पर चेस्ट काउन्सिल ऑफ इंडिया (सीसीआई) के मंच पर एक वेबिनार प्रस्तुत करने जा रहे हैं, जिसका संचालन डॉ सूर्यकान्त करेंगे।

              डॉ सूर्यकान्त

उन्‍होंने बताया कि कोरोना वायरस विश्व महामारी (2019-20) की शुरुआत एक नए किस्म के कोरोना वायरस के संक्रमण के रूप में मध्य चीन के वुहान शहर में 2019 के मध्य दिसंबर में हुई। बहुत से लोगों को बिना किसी कारण निमोनिया होने लगा और यह देखा गया की पीड़ित लोगों में से अधिकतर लोग वुहान सीफूड मार्केट में मछलियां बेचते हैं तथा जीवित पशुओं का भी व्यापार करते हैं। चीनी वैज्ञानिकों ने बाद में कोरोना वायरस की एक नई नस्ल की पहचान की जिसे बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसका नाम कोविड-19 रखा।

उन्‍होंने बताया कि कोरोना वायरस ने 220 देशों में 21 जून तक 2021 तक लगभग 18 करोड़ लोगों को संक्रमित किया है और इसकी वजह से अब तक लगभग 38 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी हैं। विश्व में सबसे ज्यादा अमेरिका में कोविड संक्रमण ने पैर पसारें और लोगों को संक्रमित किया। अमेरिका की कुल जनसंख्या लगभग 33 करोड़ है, जिसमें से 3 करोड़ 44 लाख कोरोना से (10.33 प्रतिशत) संक्रमित हुये तथा 6 लाख लोगों की मृत्यु हुयी।  विश्व में भारत कोरोना संक्रमण में दूसरे नम्बर पर रहा, जहां भारत की कुल जनसंख्या 135 करोड़ जिसमें से 3 करोड़ (2.15 प्रतिशत) कोरोना से संक्रमित हुये तथा 3 लाख लोगों की मृत्यु हुयी।

डॉ सूर्यकांत ने बताया कि कोविड-19 की उत्पत्ति जहां चीन को माना जाता है, वहीं विश्व में कोविड संक्रमण के मामले चीन की जनसंख्या के आधार पर कम मिलते हैं। जबकि चीन की जनसंख्या लगभग 144 करोड़ है जो कि विश्व में सबसे ज्यादा है लेकिन वहीं चीन कोविड संक्रमण के मामले में 100वें नम्बर पर है, जहां पर संक्रमित लोगों की संख्या 91,604 (0.0063 प्रतिशत) है, वहीं कोविड से मरने वालों की संख्या भी केवल 4,636 है। आज तक यह सब रहस्यमयी प्रश्न हैं, जिसका हल अभी भी नहीं निकल पाया है।

डॉ सूर्यकान्‍त का कहना है कि इस युद्ध में संलग्न अग्रणी योद्धा चिकित्सक हैं जो दिनरात इस युद्ध में अपनी जान जोखिम मै डालकर भी मानवता को बचाने व उनके स्वास्थ्य को ठीक करने में प्रतिदिन चौबीसों घंटे, पल-पल अविराम लगे हुए हैं। भारत में आजतक इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई.एम.ए.) के आंकलन के अनुसार 1372 चिकित्सकों की मृत्यु कोविड के कारण हुयी। आई.एम.ए. ने इन सभी को कोरोना शहीद का दर्जा देने की सरकार से मांग की है।

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