Wednesday , August 17 2022

विश्‍व में पहली बार किसी चिकित्‍सा विषय पर हिन्‍दी भाषा में वेबिनार आयोजित

-विश्‍व अस्‍थमा दिवस पर डॉ सूर्यकांत की सलाह, बच्‍चे को वेजीटेबल ब्‍वॉय बनायें, बर्गर ब्‍वॉय नहीं

विश्‍व अस्‍थमा दिवस पर 5 मई को आयोजित वेबिनार में भाग लेते डॉ सूर्यकांत

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। विश्‍व अस्‍थमा दिवस पर आज 5 मई को एक वेबिनार का आयोजन किया गया। विश्‍व में यह पहला अवसर है कि जब किसी चिकित्सा विषय पर हिन्दी भाषा में वेबिनार आयोजित किया गया। भारत में यह पहला चिकित्‍सा वेबिनार था जो रोगियों के लिए आयोजित किया गया।

यह जानकारी देते हुए किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्‍वविद्यालय के रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष व इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी अस्थमा एण्ड एप्लाईड इम्यूनोलोजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सूर्यकान्त, ने बताया है कि हर वर्ष मई के पहले मंगलवार को विश्‍व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। इसी क्रम में भारत समेत विश्‍व के कई अन्य देशों मे भी आज 5 मई को विश्‍व अस्थमा दिवस मनाया गया।

उन्‍होंने बताया कि आज के इस अवसर पर सबसे महत्वपूर्ण तथा ऐति‍हासिक आयोजन एक राष्ट्रीय अस्थमा वेबिनार रहा इस वेबिनार का आयोजन लंग केयर फाउंडेशन संस्था द्वारा किया गया। इस वेबिनार में मुख्‍य वक्‍ता के रूप में भाग लेने वाले किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्‍वविद्यालय के रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष व इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी अस्थमा एण्ड एप्लाईड इम्यूनोलोजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सूर्यकान्त ने बताया कि उनके साथ दो अन्‍य वक्‍ताओं में जयपुर से डा0 वीरेन्द्र सिंह तथा दिल्ली से जीसी खिल्लनानी जुड़े थे।

डॉ सूर्यकान्त ने बताया कि हिन्दी भाषा को समझने वाले 100 करोड़ से ऊपर लोग हैं। हालांकि वे सभी हिन्दी को पूरी तरह पढ़, लिख या बोल नही सकते। ज्ञात रहे कि डा0 सूर्यकान्त का हिन्दी भाषा से लगाव बहुत पुराना है, तथा हाल ही में उन्हें केन्द्रीय हिन्दी सेवा संस्थान द्वारा एक राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की गयी है। डा0 सूर्यकान्त ने इस वेबिनार मे बताया कि जिस प्रकार छुई-मुई के पौधे के पत्ती छूने पर वे सिकुड़ जाती हैं, उसी प्रकार अस्थमा के रोगी की सांस की नलियां धूल, धुआं, गर्दा व एलर्जी के तत्वों के सम्पर्क में आने पर सिकुड़ जाती हैं जिससे अस्थमा रोगी की सांस फूलने लगती है।

उन्‍होंने बताया कि भारत में लगभग 3.5 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं तथा उ0प्र0 मे भी लगभग 65 लाख लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। बच्चों में अस्थमा खासतौर पर पिछले 20 वर्षों मे काफी बढ़ा है जिसका प्रमुख कारण बढ़ता हुआ प्रदूषण तथा बच्चों की जीवन शैली व खानपान है। डा0 सूर्यकान्त ने विशेष रूप से बताया कि अगर आप अपने बच्चों को अस्थमा से बचाना चाहते हैं तो बच्चों को वेजिटेबल बॉय बनायें न कि बर्गर बॉय। उन्होंने बताया कि फास्ट फूड, प्रि‍जरवेटिव युक्त खाद्य पदार्थ, कोल्ड ड्रिन्क, आईसक्रीम, अण्डा, मांस, मछली जैसे खाद्य पदार्थ अस्थमा को बढ़ावा देते हैं। जबकि गुनगुने व गरमपेय, ताजा सब्जियां व फल जिनमें कि एण्टी ऑक्सीडेन्ट ज्यादा मात्रा में होते हैं। यह सभी अस्थमा रोगियों के लिए फायदेमन्द होते हैं।

डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि कोरोना के इस काल मे प्रदूषण कम हुआ है लेकिन इस समय नये-नये पराग कण वातावरण मे आ रहे हैं। यह परागकण भी सांस के साथ अस्थमा रोगी की सांस की नलियों में जाते हैं तथा उसमें सूजन व सिकुड़न पैदा करते हैं। डा0 सूर्यकान्त ने आगे बताया कि ऐसे अस्थमा के रोगी जो नियमित इन्हेलर नहीं लेते हैं एवं जिनका अस्थमा नियंत्रण मे नहीं है, उनको कोरोना का संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है तथा संक्रमण की गम्भीरता एवं कोविड न्यूमोनिया होने का खतरा भी ज्यादा रहता है। अतः कोरोना के इस संक्रमण काल मे सभी अस्थमा रोगियों को अपने चिकित्सक के परामर्श से इन्हेलर व अन्य दवायें नियमित रूप से लेनी चाहिए तथा कोरोना से बचाव के अन्य तरीके जैसे अभिवादन के लिए नमस्ते, बार-बार हाथ धोना, शारीरीक दूरी बनाये रखना, फेस मास्क लगाये रखना तथा लॉकडाउन के नियमों का पालन करते रहना चाहिए।

इस वेबिनार में एम्स दिल्ली के पल्मोनरी मेडिसिन के पूर्व विभागाध्यक्ष डा0 खिल्लानी ने इन्हेलर लेने के सही तरीके को समझाया तथा डॉ वीरेन्द्र सिंह ने अस्थमा कन्ट्रोल पर जोर दिया वेबिनार का संचालन लंग केयर फाउन्डेशन के डा0 अरविन्द कुमार, राजीव खुराना तथा अभिषेक खुराना ने किया। इस वेबिनार में भारत के 20 से अधिक राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के अस्थमा रोगियों एवं उनके परिजनों ने भाग लिया तथा अपने प्रश्‍न भी पूछे।