एईएस रोगियों के लिए शुरुआती आधा घंटा गोल्डेन पीरियड

 

आधे घंटे के अंदर पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और ग्लूकोज मिल जाये तो अपंगता रोकना संभव

लखनऊ. यदि जेई/एईएस के रोगियों में झटके शुरु होने के आधे घण्टे के अन्दर मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन तथा ग्लूकोज़ उपलब्ध हो जाये तो मस्तिष्क में होने वाली स्थायी क्षति को रोगा जा सकता है और रोगी को अपंग होने से बचाया जा सकता है।

 

यह जानकारी संचारी रोग निदेशक डॉ बद्री विशाल ने यहां दी। डॉ. बद्री विशाल ने बताया कि जेई/एईएस से प्रभावित होने पर रोगियों को झटके आने लगते हैं और आधे घण्टे के उपरान्त रोगी के मस्तिष्क की अपरिवर्तनीय एवं स्थायी क्षति हो जाती है। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बीआरडी मेडिकल कालेज, गोरखपुर एईएस रोग का प्रमुख उपचार केन्द्र होने के कारण दूरदराज के रोगियों के अधिकांश परिजन अपने रोगी को जनपदीय चिकित्सालय न ले जाकर सीधे बीआरडी मेडिकल कालेज में उपचार के लिए लाये, जिस कारण रोगी को समय से उपचार प्राप्त नहीं हो सका।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वांचल के जनपदीय चिकित्सालयों में एईएस रोग के इलाज की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की है, जिसके चलते बीआरडी मेडिकल कालेज, गोरखपुर में आने वाले एईएस/जेई रोगियों की संख्या में कमी आई और मृत्युदर भी घटी है। जनपदीय चिकित्सालयों में जहां पिछले वर्ष एईएस रोगियों की मृत्यु दर 8.15 प्रतिशत वहीं, इस वर्ष 21 सितम्बर तक घटकर 4.67 प्रतिशत रह गई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 21 सितम्बर तक 2562 व्यक्ति एईएस/जेई रोग से प्रभावित हुए हैं, इनमें से 293 की मृत्यु हुई है, जो पिछले वर्ष में तुलना का काफी कम है। वर्ष 2016 में 3911 लोग एईएस/जेई से ग्रसित हुए थे और 641 की मृत्यु हुई थी। इससे स्पष्ट है कि जनपदीय चिकित्सालयों में चिकित्सा व्यवस्था और बेहतर होने पर मृत्यु दर में कमी आई और बीआरडी मेडिकल कालेज पर मरीजों का बोझ भी कम हुआ है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष बीआरडी मेडिकल कालेज में जहां 1765 मरीज भर्ती हुए थे, वहीं इस वर्ष अब तक एईएस/जेई रोगियों की संख्या 1041 रही है। साथ ही मृत्यु दर भी घट कर 21.33 हो गई है, जबकि पिछले वर्ष बीआरडी मेडिकल कालेज में एईएस/जेई रोग मृत्युदर 26.40 प्रतिशत थी।

 

निदेशक ने बताया कि अक्सर गोरखपुर तथा बस्ती मण्डल के 7 जनपद तथा दूरस्थ जनपदों के भी रोगियों को उनके अभिभावक बीआरडी मेडिकल कालेज, गोरखपुर ले जाकर उपचार कराना चाहते हैं, परन्तु परिवहन में विलम्ब होने के कारण रोगी को अपंग होने अथवा मृत्यु होने की प्रबल सम्भावना हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस तकनीकी बिन्दु को ध्यान में रखते हुये उत्तर प्रदेश में पहली बार रोगी को 30 मिनट के अन्दर सुविधायुक्त राजकीय चिकित्सालय पर पहुँचा कर उसका समुचित उपचार प्रारम्भ करने की व्यवस्था की गई है। जेई/एईएस से सर्वाधिक प्रभावित गोरखपुर तथा बस्ती मण्डल के 7 जनपदों में ब्लाक स्तर पर 104 सामु0स्वा0 केन्द्रों को मस्तिष्क ज्वर उपचार केन्द्र (इन्सेफ्लाईटिस ट्रीटमेन्ट सेन्टर-ईटीसी) के रूप में स्थापित किए गये । इन केन्द्रों पर प्रशिक्षित चिकित्सक, स्टाफ नर्स, आवश्यक उपकरण एवं औषधि की व्यवस्था करते हुये इसे 24 घण्टे क्रियाशील बनाया गया है।

 

डॉ. विशाल ने बताया कि जनपद गोरखपुर में 22, महराजगंज में 12, कुशीनगर में 16, देवरिया में 17, बस्ती में 15, सिद्धार्थनगर में 13 एवं सन्तकबीरनगर में 9 (कुल 104) इन्सेफ्लाईटिस ट्रीटमेन्ट सेन्टर-ईटीसी स्थापित एवं क्रियाशील हैं, इनमें जनपद स्तर पर उपचार प्राप्त कर मृत्यु/जटिलता से बचने के लिए जनता को नियमित रुप से प्रेरित भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सभी ज्वर रोगियों को (झटके आने से पूर्व ही) मस्तिष्क ज्वर उपचार केन्द्र (इन्सेफ्लाईटिस ट्रीटमेन्ट सेन्टर-ईटीसी) तक पहुँचाने के लिये 108 एम्बुलेन्स के 450 प्रशिक्षित कर्मियों के द्वारा नि:शुल्क परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही 108 एम्बुलेन्स कर्मियों को मस्तिष्क ज्वर के रोगियों के परिवहन के दौरान उचित सावधानियां बरतने के सम्बन्ध में आवश्यक प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की गई है।