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एओर्टिक रूट एनलार्जमेंट, एओर्टिक रूट रिप्लेसमेंट व रॉस ऑपरेशन प्रक्रियाओं की बारीरियां समझायीं

“हृदय वाल्व रोगों का प्रबंधन – एक पुनर्मूल्यांकन” थीम पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

-एसजीपीजीआई के कार्डियोवैस्कुलर एवं थोरैसिक सर्जरी विभाग ने मनाया  39वाँ स्थापना दिवस

सेहत टाइम्स

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस), लखनऊ के कार्डियोवैस्कुलर एवं थोरैसिक सर्जरी (सीवीटीएस) विभाग द्वारा 31 जुलाई एवं 1 अगस्त 2026 को 39वाँ स्थापना दिवस समारोह मनाया गया। स्थापना दिवस समारोह की इस वर्ष की थीम थी- ” हृदय वाल्व रोगों का प्रबंधन – एक पुनर्मूल्यांकन” इस अवसर पर देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों एवं अस्पतालों के विशेषज्ञों ने हृदय वाल्व रोगों के प्रबंधन पर अपने अनुभव एवं विचार साझा किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष तथा इंडियन एसोसिएशन ऑफ कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरैसिक सर्जन्स (IACTS) के अध्यक्ष प्रो. वी. देवगौरू रहे। उन्होंने इस वैज्ञानिक आयोजन की सराहना करते हुए इसे हृदय वाल्व रोगों के उपचार में ज्ञान एवं अनुभव साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच बताया।

समारोह का प्रमुख आकर्षण पहले दिन आयोजित तीन विशेष कार्यशालाएँ रहीं, जिनमें प्रतिभागियों को एओर्टिक रूट एनलार्जमेंट, एओर्टिक रूट रिप्लेसमेंट तथा रॉस ऑपरेशन जैसी जटिल शल्य प्रक्रियाओं की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया गया। इन जटिल प्रक्रियाओं के लिए संबंधित शारीरिक संरचना (एनाटॉमी) की गहन समझ, उच्च स्तरीय तकनीकी कौशल एवं विस्तृत चिकित्सकीय ज्ञान आवश्यक होता है। कार्यशालाओं का संचालन डॉ. अतनु साहा (नारायणा हृदयालय, कोलकाता) एवं डॉ. मोहम्मद इदरीस (सिम्स हॉस्पिटल, चेन्नई) ने किया। इन कार्यशालाओं में संस्थान एवं लखनऊ के विभिन्न चिकित्सकों ने भाग लिया।

बाल्यावस्था से वृद्धावस्था तक हार्ट वाल्व ट्रीटमेंट पर विस्तार से चर्चा

समारोह के दूसरे दिन बाल्यावस्था से लेकर वयस्कों तक में किए जाने वाले विभिन्न हृदय वाल्व उपचार एवं शल्य प्रक्रियाओं पर विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा की गई। जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी के प्रो. प्रसन्ना सिम्हा ने “प्रो. पी. के. घोष स्मृति व्याख्यान” प्रस्तुत किया। इस अवसर पर एसजीपीजीआई के सीवीटीएस विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. पी. के. मित्तल को विभाग के विकास में उनके उल्लेखनीय योगदान तथा उत्तर प्रदेश में पहली बाल एवं नवजात कार्डियक सर्जरी कार्यक्रम की स्थापना के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

डॉ. ललित कपूर को ”मोस्ट आउटस्टैंडिंग एलुमनाई अवॉर्ड”

विभाग के पूर्व छात्र एवं वर्तमान में नारायणा हृदयालय, कोलकाता में कार्डियक सर्जरी निदेशक डॉ. ललित कपूर को विभाग का “मोस्ट आउटस्टैंडिंग एलुमनाई अवॉर्ड” प्रदान किया गया। उन्होंने विभाग में नई एवं उच्चस्तरीय तकनीकों को स्थापित करने में निरंतर सहयोग प्रदान किया है।

देश के विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों, शहर के कार्डियक सर्जनों तथा प्रशिक्षणरत चिकित्सकों ने व्याख्यानों एवं कार्यशालाओं से महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त किया। प्रमुख वक्ताओं में प्रो. के. एस. अय्यर (नई दिल्ली), डॉ. सुरेश राव (मुंबई), डॉ. देबाशीष दास (कोलकाता) एवं डॉ. आशीष कटेवा (फरीदाबाद) शामिल रहे, जिन्होंने बाल रोगियों में जटिल हृदय वाल्व शल्य प्रक्रियाओं पर अपने विचार रखे।

टीएवीआई विफल हो जाये तो क्या करें

इसके अतिरिक्त डॉ. राकेश नाइक (बेंगलुरु) ने मिनिमली इनवेसिव माइट्रल वाल्व सर्जरी पर व्याख्यान दिया। डॉ. बुद्धादित्य चक्रवर्ती (जयपुर) ने टीएवीआई (TAVI) विफल होने की स्थिति में उपचार तथा सर्जिकल वाल्व प्रतिस्थापन पर चर्चा की। डॉ. प्रदीप नारायण (कोलकाता) ने विश्व स्तर पर उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर टीएवीआर (TAVR) से जुड़े जोखिमों पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. रविन्दर सिंह राव (जयपुर) ने ट्रांसकैथेटर माइट्रल वाल्व थेरेपी में अपने अनुभव साझा किए। इन वैज्ञानिक चर्चाओं से लखनऊ के कार्डियक सर्जनों एवं अन्य चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकों और उपचार पद्धतियों की जानकारी प्राप्त हुई।

एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री डॉ. आर. के. धीमन ने सीवीटीएस टीम को बधाई दी। मरीज़ों की देखभाल, शिक्षण- प्रशिक्षण, शोध और नवाचार में उनके शानदार योगदान और कार्डियक सर्जरी में ‘सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस’ के तौर पर अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होनें विभाग की तारीफ़ की। उन्होंने देश भर के प्रख्यात विशेषज्ञों को एक साथ लाने के लिए आयोजन टीम की सराहना की और क्लिनिकल केयर, शिक्षा और रिसर्च में बेहतरीन काम करने की दिशा में विभाग को लगातार सफलता की शुभकामनाएँ दीं।