पुरानी पेंशन बहाली सहित पुराने समझौतों को लागू करवाने के लिए मंगलवार को कर्मचारियों का प्रदेशव्‍यापी धरना

-मंडलायुक्‍त के जरिये मुख्‍यमंत्री को भेजा जायेगा ज्ञापन

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ पुरानी पेंशन बहाली, वेतन विसंगति दूर करने, भत्तों की समानता सहित मुख्य सचिव के साथ हुए समझौतों पर कार्यवाही न होने से राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्‍तर प्रदेश कल मंगलवार को सभी मंडलों में मंडलीय धरना देकर मंडलायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे।

लखनऊ मंडल के सभी जनपदों के राज्य कर्मचारी कल जीपीओ पर एकत्रित होकर विशाल प्रदर्शन करेंगे। परिषद के लखनऊ मंडल अध्यक्ष रवि कांत वर्मा की अध्यक्षता में धरना दिया जायेगा।

परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि 9 व 12 अक्टूबर के पूर्व अनेक आन्दोलनो के माध्यम से शासन व सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया था, जिसके फलस्वरूप शासन स्तर पर हुई बैठक में परिषद की प्रमुख मांगो पर अनेक समझौते/निर्णय लिये गये थे।

पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग परिषद द्वारा लगातार किया जा रहा है, 21 नवम्बर को सभी जनपदों में मशाल जुलूस, 12 दिसम्बर को जनपदों में धरना दिया गया, लेकिन सरकार इस पर कोई निर्णय नही कर रही है । जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

चिकित्सा विभाग के फार्मेसिस्ट, आप्टोमेट्रिस्ट, लैब टेक्निशियन सहित अन्य संवर्गों की वेतन विसंगति केन्द्र सरकार द्वारा दूर की जा चुकी है परन्तु समझौतो के बावजूद प्रदेश में अभी वेतन विसंगति लम्बित है। अन्य संवर्गो की वेतन विसंगति एवं वेतन समिति की संस्तुतियों एवं शेष भत्तों पर अक्टूबर 2018 में ही मंत्रिपरिषद से निर्णय कराने का निर्णय लिया गया था जो एक वर्ष बाद भी अभी तक लम्बित है।

केन्द्र सरकार द्वारा वित्त पोषित योजनाओं एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं में 03 लाख आउटसोर्सिंग/संविदा/ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों हेतु स्थाई नीति बनाने,

सी0एस0डी0 कैन्टीन की भॉति राज्य कर्मचारियों को भी राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के माध्यम से स्टेट जी0एस0टी0 मुक्त सामग्री क्रय की सुविधा का लाभ पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि कल्याण निगम के सामानों में लगने वाली जी॰एस॰टी॰ का 50 प्रतिशत भार सरकार द्वारा वहन किया जायेगा।

परिषद की मांग पर वेतन विसंगति एवं वेतन समिति की संस्तुतियॉ एवं शेष बचे भत्तों पर मंत्रिपरिषद से अनुमोदन लिये जाने, पूर्व विनियमित कर्मचारियों की अर्हकारी सेवाएं को जोड़ते हुए पेंशन निर्धारित करने, डिप्लोमा इंजीनियर्स की भॉति ग्रेड वेतन 4600/- को इग्नोर करके 4800/- के ग्रेड वेतन के समान मैट्रिक्स लेवल अनुमन्य करने, उपार्जित अवकाश में 300 दिन के संचय की सीमा को समाप्त करने, सभी संवर्गो का पुनर्गठन।

शासन द्वारा संविदा/आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए स्थाई नीति का निर्माण फरवरी 2019 में पूर्ण कर लिया गया लेकिन अभी तक मंत्रिपरिषद से पारित नही कराया गया। संविदा व आउटसोर्सिंग कर्मचारियो की स्थाई नीति जारी न होने से कर्मचारियों का लगातार शोषण हो रहा है। कुछ विभागों में पूर्व से चली आ रही योजनाओं के कार्मिकों को सेवा से बाहर किए जाने की नोटिस पकडा़ दी गयी। इसी प्रकार समझौतों पर कार्यवाही तो नही हो सकी बल्कि उसके स्थान पर राज्य कर्मचारियों पर अभी तक प्राप्त हो रहे छः भत्ते समाप्त कर जले पर नमक छिड़कने जैसा कार्य किया गया।

अनेक ऐसे संवर्ग है जिनमें छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियां व्याप्त है, वित्त विभाग द्वारा एक माह में परीक्षण कर कार्यवाही कराने का निर्देश दिया गया था परन्तु अभी तक उसपर कोई कार्यवाही सम्पन्न नही हुई है। केन्द्रीय कर्मचारियों की भांति भत्तों की समानता, वाहन भत्ता एवं मकान किराए भत्तें के संशोधन के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नही की गयी, जिससे केन्द्रीय एवं राज्य कर्मचारियों को प्राप्त हो रहे भत्तों में बड़ा अन्तर आ गया है।

डिप्लोमा इंजीनियर के भांति सभी राज्य कर्मचारियों को रू0 4600/- ग्रेड पे को इग्नोर करते हुए रू0 4800 के समतुल्य मैट्रिक्स लेवल वेतनमान प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा पुनः परीक्षण किये जाने का निर्णय लिया गया था। प्रदेश में सीधी भर्ती अधिकतम आयु 40 वर्ष के दृष्टिगत ए0सी0पी0 में 08, 16 एवं 24 वर्ष की सेवा पर तीन पदोन्नति वेतनमान दिये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा अभी तक परीक्षण कर कोई प्रस्ताव नही बनाया गया । उपार्जित अवकाश के संचय की तीन सौ दिन की सीलिंग समाप्त कर सेवा निवृत्ति पर 600 दिनों का नकदीकरण दिये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा परीक्षण कर प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने का निर्णय लिया गया था, जिसपर एक वर्ष के पश्चात भी कोई कार्यवाही नही की गयी है। इस बींच कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उन्हे आर्थिक नुकसान हो रहा है।

बार-बार समझौतों के बावजूद कर्मचारियों की कैशलेस चिकित्सा अभी तक प्रारम्भ नही हो सकी जबकि पूर्व से मिल रहे चिकित्सा प्रतिपूर्ति भूगतान हेतु बजट के अनुदान की ग्रुपिंग में फेरबदल कर उसे और जटिल बना दिया गया।

प्रदेश के एलोपैथिक, होम्योपैथिक, आयूर्वेदिक, यूनानी एवं वेटनरी फार्मासिस्ट चिकित्सालयों की रीढ़ के रूप में कार्य कर रहें है, महत्वपूर्ण कार्य एवं दायित्व तथा शैक्षिक एवं तकनीकी योग्यता को देखते हुए वेतन समिति द्वारा वेतन उच्चीकरण कर राज्य में कार्यरत अन्य डिप्लोमा धारकों के बराबर करने का निर्णय लिया गया था मुख्य सचिव द्वारा उक्त विसंगति को एक माह के अन्दर मंत्रिपरिषद से पारित कराकर लागू कराने का निर्णय बैठक में लिया गया था, परन्तु अभी तक उक्त समझौता शासन की फाईलो में दर्ज है।

परिषद ने मुख्यमंत्री जी को पत्र भेजकर मांग की है कि समझौतो का क्रियान्वयन कराने का निर्देश जारी करें साथ ही कर्मचारियों के उत्पीड़न को रोकें। मंगलवार के धरने में चिकित्सा स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, परिवार कल्याण, वन विभाग, वाणिज्य कर, समाज कल्याण, परिवहन, रोडवेज़, समाज कल्याण, के जी एम यू, डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, नगर निगम, एन एच एम ,कृषि, गन्ना विभाग, सिंचाई विभाग, पशुपालन विभाग, आयुर्वेद एवं यूनानी, होमियोपैथी विभाग,विश्विद्यालय, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा विभाग, बेसिक शिक्षा,राजस्व आदि विभाग के लाखों कर्मचारी कल मंगलवार को प्रदेश के समस्त मण्डलों पर धरना देंगे जिससे विभागीय कार्य भी बाधित होंगे।