Tuesday , July 27 2021

कर्मचारियों ने फूंका 19 फरवरी से आंदोलन का बिगुल

-लम्‍बे समय से मांगें पूरी न किये जाने के विरोध में राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद ने लिया निर्णय

सेहत टाइम्‍स ब्यूरो

लखनऊ। पुरानी पेंशन बहाली, वेतन विसंगति दूर करने, भत्तों की समानता एवं संविदा/आउटसोर्सिंग कर्मियों के सम्बन्ध में मुख्य सचिव के साथ हुए समझौतों पर कार्यवाही, कैशलेस इलाज व फ्रीज डी0ए0 की बहाली की मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आगामी 19 फरवरी से आंदोलन का ऐलान किया है। इसके तहत 19 फरवरी से 27 फरवरी तक काला फीता बांधकर विरोध प्रदर्शन, 28 फरवरी से 17 मार्च तक जनजागरण गेट मीटिंग के बाद 18 मार्च को समस्त जनपदों में सामूहिक उपवास एवं समस्त जनपदों में कर्मचारी विशाल धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे।

यह निर्णय अध्‍यक्ष राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद सुरेश रावत की अध्‍यक्षता में आयोजित प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। बैठक में प्रांतीय, पदाधिकारी, मंडलीय पदाधिकारी, सम्बद्ध संगठनों के अध्यक्ष/महामंत्री, कार्यकारिणी सदस्यों के साथ सभी जनपदों के अध्यक्ष, मंत्री उपस्थित थे।

बैठक की जानकारी देते हुए महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि पूर्व में अनेक आन्दोलनों के माध्यम से शासन व सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया था, जिसके फलस्वरूप परिषद की प्रमुख मांगों पर मुख्य सचिव स्तर पर अनेक समझौते/निर्णय लिये गये थे। समझौतों का पालन न होने के कारण कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।

अतुल मिश्रा ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा वित्त पोषित योजनाओं एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं में 3 लाख से अधिक आउटसोर्सिंग/संविदा/ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने, कैशलेस इलाज पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि वेतन विसंगति एवं वेतन समिति की संस्तुतियं एवं शेष बचे भत्तों पर मंत्रिपरिषद से अनुमोदन लिये जाने, पूर्व विनियमित कर्मचारियों की अर्हकारी सेवाएं को जोड़ते हुए पेंशन निर्धारित करने, डिप्लोमा इंजीनियर के भांति सभी राज्य कर्मचारियों को 4600 रुपये ग्रेड पे को इग्नोर करते हुए 4800 रुपये के समतुल्य मैट्रिक्स लेवल वेतनमान प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा पुनः परीक्षण किये जाने का निर्णय लिया गया था।

उन्‍होंने बताया कि प्रदेश में सीधी भर्ती अधिकतम आयु 40 वर्ष के दृष्टिगत ए0सी0पी0 में 8, 16 एवं 24 वर्ष की सेवा पर तीन पदोन्नति वेतनमान दिये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा अभी तक परीक्षण कर कोई प्रस्ताव नही बनाया गया। उपार्जित अवकाश के संचय की तीन सौ दिन की सीलिंग समाप्त कर सेवा निवृत्ति पर 600 दिनों का नकदीकरण दिये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा परीक्षण कर प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने का निर्णय लिया गया था, राजस्व संवर्ग सींच पर्यवेक्षक, जिलेदार सेवा नियमावली, एवं तकनीकी पर्यवेक्षक नलकूप सेवानियमावली, अधीनस्थ वन सेवा नियमावली प्रख्यापित करने, एवं सभी संवर्गो का पुनर्गठन, जिनकी सेवा नियमावली प्रख्यापित नही हैं, उसे प्रख्यापित कराने का निर्णय लिया गया था। उपरोक्त पर दो वर्ष के पश्चात भी कोई कार्यवाही नही की गयी है।

निर्णय के बाद परिषद लगातार शासन का ध्यान आकृष्ट करता रहा है। संविदा व आउटसोर्सिंग कर्मचारियो का शोषण हो रहा है। कुछ विभागों में पूर्व से चली आ रही योजनाओं के कार्मिकों को सेवा से बाहर किए जाने की नोटिस पकड़ा दी गयी। इसी प्रकार समझौतों पर कार्यवाही तो नहीं हो सकी बल्कि उसके स्थान पर राज्य कर्मचारियों को प्राप्त हो रहे छह भत्ते समाप्त कर जले पर नमक छिड़कने जैसा कार्य किया गया और महंगाई भत्ते की 3 किस्तें फ्रीज कर दी गईं जिससे कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

पुरानी पेंशन व्‍यवस्‍था बहाली पर अनेक आन्दोलनों के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। अनेक ऐसे संवर्ग हैं जिनमें छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियां व्याप्त हैं जिन पर दिसंबर माह में निर्णय करने का आश्वासन मुख्य सचिव द्वारा बैठक में दिया गया था परन्तु अभी तक उसपर कोई कार्यवाही सम्पन्न नहीं हुई है। केन्द्रीय कर्मचारियों की भांति भत्तों की समानता, वाहन भत्ता एवं मकान किराए भत्ते के संशोधन के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है, जिससे केन्द्रीय एवं राज्य कर्मचारियों को प्राप्त हो रहे भत्तों में बड़ा अन्तर है।

यह भी निर्णय लिया गया था कि एक समान शैक्षिक योग्यता वाले संवर्गों को एक समान वेतन भत्ते अनुमन्य किए जायें, चाहे वे किसी भी विभाग में कार्यरत हों, परन्तु वित्त विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है।

बार-बार समझौतों के बावजूद कर्मचारियों की कैशलेस चिकित्सा अभी तक प्रारम्भ नही हो सकी है, जबकि पूर्व से मिल रहे चिकित्सा प्रतिपूर्ति भुगतान के लिए बजट के अनुदान की ग्रुपिंग में फेरबदल कर उसे और जटिल बना दिया गया, यहां तक कि सरकारी चिकित्सालयों में दवाओं के लोकल परचेज पर भी रोक लगा दी गयी। चिकित्सा विभाग के फार्मासिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट, लैब टेक्निशियन व परिवार कल्याण के बेसिक हेल्थ वर्कर एवं ए॰एन॰एम॰ सहित अन्य संवर्गों की वेतन विसंगति केन्द्र सरकार द्वारा दूर की जा चुकी है परन्तु समझौतों के बावजूद प्रदेश में अभी तक वेतन विसंगति लम्बित है। वेतन विसंगति एवं वेतन समिति की संस्तुतियों एवं शेष भत्तों पर अक्टूबर 2018 में ही मंत्रिपरिषद से निर्णय कराने का निर्णय लिया गया था जो दो वर्ष बाद भी अभी तक लम्बित है। फिल्ड कर्मचारियों को मोटर साइकिल भत्ता प्रदान करने पर कोई कार्यवाही नही हुई।

इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी॰पी॰ मिश्र ने कहा कि‍ सरकार के शीर्षस्थ अधिकारी के साथ हुए समझौतों को नीचे के अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर क्रियान्वयन करना चाहिए जिससे सरकार की छवि खराब न हो और संगठनों के पदाधिकारियों का सरकार पर विश्वास कायम रहे।

परिषद के वरिष्‍ठ उपाध्यक्ष गिरिश चन्द्र मिश्रा ने कहा कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में कर्मचारियों ने जान की परवाह किये बगैर सरकार का साथ दिया जिसके परिणामस्वरूप उत्‍तर प्रदेश का देश में ही नहीं विश्व में अलग स्थान प्राप्त हुआ। जिसका मुख्यमंत्री द्वारा कर्मचारियों की सार्वजनिक मंचों से तारीफ भी की, परन्तु कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के बजाय उनका मनोबल कमजोर करना उचित नहीं है।

परिषद के संगठन प्रमुख के॰के॰ सचान ने कहा कि वर्तमान सरकार के गठन के उपरान्त मुख्यमंत्री से परिषद के प्रतिनिधिमण्डल के भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया था कि मेरी सरकार में जो हम कहेंगे वो करेंगे परन्तु अभी तक ऐसा परिलक्षित नहीं हो रहा है।

परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत ने मुख्यमंत्री से मांग की कि आन्दोलन के पूर्व हस्तक्षेप कर समझौतों का क्रियान्वयन कराने का निर्देश जारी करें साथ ही कर्मचारियों के उत्पीड़न को रोकें अन्यथा प्रदेश के लाखों कर्मचारी आन्दोलन को विवश होंगें।

आज की बैठक में परिषद के संरक्षक व इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी॰पी॰ मिश्र, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र मिश्र, संगठन प्रमुख डा॰ के॰के॰ सचान, संदीप बडोला चेयरमैन संघर्स समिति, उपाध्यक्ष सुनील यादव, डॉ पी॰ के॰ सिंह सचिव परिषद एव अध्यक्ष सांख्यिकी सेवा संघ वन विभाग, अशोक कुमार महामंत्री राजकीय नर्सेज संघ सिंचाई संघ के महामंत्री अवधेश मिश्रा, राजस्व अधिकारी संघ के अध्यक्ष विजय किशोर मिश्रा, आशीष पान्डे, महामंत्री वन विभाग मिनिस्ट्रियल कर्मचारी संघ ट्यूबवेल टेक्निकल कर्मचारी संघ उ॰प्र॰ के महामंत्री रजनेश माथुर, वाणिज्य कर मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल दीप महामंत्री जे॰ पी॰ मौर्य, सर्वेश पाटिल अध्यक्ष ऑप्टोमेट्रिस्ट एसो॰ वाई0पी0 शुक्ला अध्यक्ष, एक्स-रे टेक्नीशियन एसो॰, कुष्ठ कर्मचारी संघ के सतीश यादव, सहायक वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मो॰ नदीम महामंत्री, अमित श्रीवास्तव, फेडरेशन के महामंत्री अशोक कुमार, बी॰एन॰ मिश्रा महामंत्री समाज कल्याण मिनि॰ एसोसिएशन, राजेन्द्र पटेल, आनन्द मिश्रा, आलोक मिश्र, डी॰डी॰ त्रिपाठी, सुनील कुमार मीडिया प्रभारी, राजेश चौधरी मंडलीय मंत्री, सुभाष श्रीवास्तव जिलाध्यक्ष, अजय पान्डे, कमल श्रीवास्तव, आदि उपस्थित रहे।

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