Thursday , May 19 2022

कर्मचारी-शिक्षक मोर्चा की दो टूक, अब आश्‍वासन से नहीं चलेगा काम

-आंदोलन की तैयारियां तेज, घटक संगठनों के लिए आंदोलन की रूपरेखा तैयार
-आंदोलन की तैयारियां तेज करने के बीच सीएम व मुख्‍य सचिव से मांगें मानने का आग्रह भी

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने एक तरफ जहां अपने आंदोलन की तैयारियां तेज कर दी हैं, वहीं दूसरी तरफ हड़ताल जैसी अप्रिय स्थिति न आने देने के प्रयास भी जारी रखे हुए हैं। हालांकि मोर्चा ने यह साफ कर दिया है कि अब आश्‍वासन से बात नहीं बनेगी, निर्णय ही मान्‍य होगा।

मोर्चा के अध्यक्ष बी पी मिश्र एवं महासचिव शशि कुमार मिश्रा ने बताया कि समस्त घटकों के अध्यक्ष व महामंत्री आंदोलन को सफल बनाने के लिए 15 मार्च से प्रदेश के सभी मंडलीय मुख्यालयों पर मंडलीय सम्मेलन आयोजित करेंगे,  जिसमें राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, राज्य निगम कर्मचारी महासंघ, स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ, शिक्षणेतर कर्मचारी महासंघ, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद, माध्यमिक शिक्षक संघ (अमरनाथ सिंह), फार्मेसिस्ट कर्मचारी महासंघ, फेडरेशन ऑफ फॉरेस्ट, के पदाधिकारी भाग लेंगे।

बी पी मिश्र एवं शशि कुमार मिश्रा ने सभी पदाधिकारियों से कहा है कि वे मंडल मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले जनपदीय अध्यक्ष व मंत्री को निर्देशित करें कि वे निर्धारित तिथि को मंडल मुख्यालयों पर अवश्य उपस्थित हों। उन्‍होंने बताया कि मंडलीय सम्मेलन के आयोजन स्थल की व्यवस्था मंडल मुख्यालय की राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जनपद शाखा के अध्यक्ष व मंत्री करेंगे। इस संबंध में घटक संगठनों के मंडल अध्यक्ष व मंत्री सहयोग करेंगे। मोर्चा के अध्यक्ष एवं महामंत्री ने निर्देश दिया है कि सभी जनपदों की शाखाओं के अध्यक्ष व मंत्री एवं मंडलीय अध्यक्ष व मंत्री मंडलीय आयोजन में सभी जनपदों के उपस्थिति सुनिश्चित करके मोर्चा के महासचिव को अवगत कराएं।

उन्‍होंने बताया कि मंडलीय सम्मेलन के आयोजन की व्यवस्था राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के मंडल अध्यक्ष करेंगे तथा मंत्री कोऑर्डिनेटर होंगे। इस बीच मोर्चा के अध्यक्ष और महासचिव ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि 20 अप्रैल से प्रारंभ होने वाले आंदोलन से पूर्व बैठक करके पूर्व के समझौता वादे को कार्यान्वित कराएं, जिससे कि शासन एवं कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो। सभी पक्ष को सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए वादों के अनुरूप निर्णय आवश्यक है, अब आश्वासन से कर्मचारी संतुष्ट नहीं हो पाएंगे।