Tuesday , August 16 2022

संजय गांधी पीजीआई की इमरजेंसी पहुंची मरीज को बिना उपचार भगाया

-कहा, पहले आरटीपीसीआर से कोरोना जांच रिपोर्ट लाओ, तब देंगे इलाज

-संस्‍थान प्रशासन के तुरंत उपचार के स्‍पष्‍ट आदेश होने के बाद भी यह हाल

संस्‍थान के कर्मचारी की पत्‍नी को नहीं दिया उपचार, कर्मचारी नाराज

लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई के इमरजेंसी विभाग का मानवता विरोधी, संस्‍थान विरोधी, कर्मचारी विरोधी चेहरा सामने आया है। यहां तैनात एक कर्मचारी की बुखार में तपती पत्‍नी को इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया गया, कहा गया कि पहले आरटीपीसीआर से जांच कराकर कोरोना की रिपोर्ट लाओ। कर्मचारी गुहार लगाता रहा लेकिन किसी ने नहीं सुना, हारकर रात के 12 बजे वह एक निजी अस्‍पताल में लेकर गया तथा सुबह वापस इमरजेंसी में लाकर बहुत जद्दोजहद के बाद पत्‍नी को भर्ती करा पाया। यह हाल तब है जब संस्‍थान प्रशासन का स्‍पष्‍ट आदेश है कि इमरजेंसी में आने वाले मरीज को आवश्‍यक इलाज तुरंत शुरू कर दिया जाये, उसकी कोविड जांच रिपोर्ट का इंतजार नहीं किया जाये।

मिली जानकारी के अनुसार यहां के गैस्ट्रो विभाग में रमेश कुमार मरीज सहायक के रूप में तैनात हैं, बीती 1 सितम्‍बर की रात करीब रमेश अपनी पत्‍नी सुशीला को तेज बुखार होने पर संस्‍थान के इमरजेंसी विभाग में पहुंचे, लेकिन बुखार में कराहती सुशीला को इमरजेंसी से भगा दिया कहा कि पहले कोरोना की जांच आरटीपीसीआऱ से करा कर लाओ तब भर्ती करेंगे। ध्‍यान देने की बात यह है कि संस्‍थान के कर्मचारी के आश्रित या कर्मचारी के साथ जब यह दिक्‍कत होती है तो आम मरीजों के साथ क्‍या व्‍यवहार होता होगा, इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है। बताया गया है कि आज भी सुशीला को इमरजेंसी में 11 घंटे बाद तब भर्ती किया गया जब कर्मचारी नेताओं ने इमरजेंसी जाकर विरोध दर्ज कराया।

नर्सिग एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा शुक्ला सहित तमाम कर्मचारी नेताओं का कहना है कि इमरजेंसी में तुरंत इलाज देने की जरूरत है इस अवस्था में मरीज के जिंदगी के लिए खतरा हो सकता है लेकिन सब मरीजों को टालने में लगे हैं। सुशीला के पति सुरेश कुमार कहते है कि रात में 12 बजे निजी अस्पताल में लेकर गए तो उन लोगों ने तुरंत दवा व इंजेक्‍शन दिये जिससे राहत मिली लेकिन संस्थान ने मुसीबत के समय साथ नहीं दिया जबकि हम संस्थान में लंबे समय से मरीज़ों की सेवा कर रहे है फिर भी कोई सुनवाई नहीं है। इस बारे में संस्थान प्रशासन का कहना है कि उसे इस मामले की जानकारी नहीं है लेकिन यदि ऐसा हुआ है तो इस मामले की जांच की जाएगी।

आपको बता दें कि संजय गांधी पीजीआई एक प्रतिष्ठित चिकित्‍सा संस्‍थान है, यहां होने वाला इलाज विश्‍वस्‍तरीय है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन इस तरह की लापरवाही करने वाले लोगों पर लगाम कसने की जरूरत है, जो संस्‍थान का नाम बदनाम करते हैं। यहां गौरतलब यह है कि इमरजेंसी में मरीज को तुरंत इलाज न देकर इसके लिए जिम्‍मेदार व्‍यक्ति ने संस्‍थान प्रशासन के आदेश का उल्‍लंघन किया, बुखार में तपते मरीज को राहत प्रदान न कर अमानवीय चेहरा दिखाया साथ ही अपने ही कर्मचारी के मरीज का ध्‍यान न रखकर संवेदनहीनता का भी परिचय दिया।