–राजकीय सम्मान के साथ शहीद का दर्जा देने की मांग की इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने

लखनऊ। उरई के सरकारी अस्पताल में तैनात डॉ सुनील अग्रवाल का अन्तिम संस्कार पूरे कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए यहां लखनऊ स्थित भैसा कुंड में इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में किया गया।
ज्ञात हो डॉक्टर सुनील की कल 9 मई को यहां केजीएमयू में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की वजह से मृत्यु हो गई थी। आपको बता दें डॉ सुनील को कोरोना पॉजिटिव होने पर यहां भर्ती किया गया था यही नहीं केजीएमयू में प्लाज्मा तकनीक से इलाज पाने वाले डॉक्टर सुनील पहले मरीज थे। बताया जाता है कि कोरोना पर डॉक्टर सुनील ने विजय पा ली थी और उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी लेकिन यूरिनरी ट्रैक्ट में संक्रमण होने के चलते उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया और डायलिसिस की गई लेकिन वह बच नहीं सके।
अंतिम संस्कार के समय उनके पुत्र भाई और भतीजे के साथ परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। उनकी पत्नी और बेटी शव दाह गृह के बाहर से उनकी अंतिम यात्रा को देख रही थी बहुत ही मार्मिक दृश्य था।
केजीएमयू तत्कालीन केजीएमसी मैं 1981 बैच के छात्र रहे डॉक्टर सुनील के अंतिम संस्कार के समय केजीएमयू में उनका इलाज करने वाले डॉ डी हिमांशु के साथ ही डॉ भूपेंद्र सिंह, डॉ राहुल भरत, डॉ प्रभात, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एस के रावत, जॉर्जियन 81 बैच के उनके साथी डॉ पी के गुप्ता, डॉ के के सक्सेना, डॉ वी के ओझा सहित कई अन्य मेडिकल छात्र भी मौजूद थे।
डॉ पी के गुप्ता ने कहा कि देश विदेश में मौजूद जॉर्जियन 81 बैच इस परिवार के साथ है साथ ही सरकार से मांग करती है कि कोरोना योद्धा के शहीद होने की स्थिति में परिवार को त्वरित मुवावजा और आश्रित को नौकरी दी जाए। इसके अतिरिक्त आइए में उरई नेवी डॉक्टर सुनील अग्रवाल को कोरोला शहीद का दर्जा देने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है की डॉ सुनील अग्रवाल कोराना टास्क फोर्स में थे। वह कोराना मरीजों का इलाज करते हुए संक्रमित हुए। सैकड़ों की जान बचाने में खुद को कुर्बान कर दिया। इसलिए सरकार इन्हें शहीद का दर्जा दे।
आई एम ए उरई द्वारा सरकार से कोरोना योद्धा डॉ सुनील कुमार अग्रवाल को शहीद का दर्जा देने की माँग के साथ ही कल अस्थि कलश उनके गृह जनपद उरई पहुँचने पर प्रशासन द्वारा राजकीय सम्मान देने की मांग आई एम ए द्वारा की जा रही है।

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