शोध जरूर करें लेकिन जिन पर करें उनकी सुरक्षा भी करें

केजीएमयू में गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस-जीसीपी एंड मेडिकल इथिक्स पर संगोष्ठी

 

लखनऊ. शोध चलते रहना बहुत आवश्यक है लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि जिन व्यक्तियों पर शोध किया जा रहा है उनकी सुरक्षा किसी भी कीमत पर होनी चाहिए. वर्तमान समय में वायरस निरंतर अपना स्वरूप बदल रहे हैं इसलिए आवश्यक है कि लगातार शोध होते रहें. क्योंकि शोध का ही परिणाम है कि जापानी इंसेफ्लाईटिस का टीका बनाने में कामयाबी मिली, किन्तु इसका ही एक बदला रूप एई है जिसकी वैक्सीन अभी तक विकसित नही जा जा सकी है। इसे किये जाने की जरूरत है. लेकिन जिस तरह किसी भी शोध को मानव पर करने से पहले उसे जानवरो पर किया जाता था उसके लिए भी इथिक्स होता था, ऐसे में जब किसी शोध में मानव को लिया जा रहा हो उसमें उस की स्वैच्छिक सहमति परम आवश्यक है और सुरक्षा के सारे मानकों का पालन और अनुसंधान के नैतिकता का पालन बहुत जरूरी है

 

श्री टंडन ने यह बात आज केजीएमयू में ‘‘गुड क्लीनिकल  प्रैक्टिस-जी0सी0पी0 एंड मेडिकल इथिक्स’’ विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही. का आयोजन हुआ।

 

कार्यक्रम में चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मदनलाल ब्रह्म भट्ट ने कहा कि गुड क्लीनिकल गाइडलाइन की प्रैक्टिस में इथिकल कमेटी जुड़ी होती है। इस प्रकार हर मेडिकल संस्थान में एक इथिकल कमेटी की आवश्यकता है। कोई भी शोध तब किया जाना चाहिए जब उसकी आवश्यकता हो.

 

शोध क्षेत्रीय जरूरतो और राष्ट्रीय जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए शोध एक वैज्ञानिक जिम्मेदारी है जिसे वैज्ञानिक तरीके से करना जरूरी है। सभी शोध लिखित एवं डाक्यूमेंटेड होने चाहिए तथा जिस मरीज या व्यक्ति पर शोध किया जा रहा हो उसे उस शोध के सम्बंध मे सम्पूर्ण जानकारी और उसकी स्वैच्छिक सहमति  अति आवश्यक होती है। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय मे आईसीएमआर के निर्देशों के अनुरूप एक इथिक्स कमेटी का गठन किया गया है।

 

कार्यक्रम मे बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डा राजीव लोचन ने अपने उद्बोधन मे कहा किसी भी बीमारी से बचाव उसके उपचार से बेहतर होता है। इसी तरह हमे ट्रामा से बचाव करना चाहिए। हम ट्रामा  से बचाव के उपर कुछ वर्क करें इसके लिए मै अपने साथ मिल कर काम करने के लिए केजीएमयू का आह्वान करता हूँ. हमे सरकार को सुझाव देना होगा कि रोड पर मोटर साइकिल एवं कार का एक्सीडेण्ट कैसे कम करें। कोई भी रोड हमे दूसरी जगह पहुंचाने के लिए है ना कि अपना पौरुष दिखाने  के लिए। आज मार्केट में इतनी उच्च पावर की मोटर बाईक आ रही हैं कि पलक झपकते ही वो इतनी स्पीड पकड़ लेती है कि कभी कभी उनका कण्ट्रोल नहीं हो पाता है। इस तरह हमें लोगो को, सरकार को ट्रामा से बचाव व सेफ्टी मानकों को बताना होगा।

 

न्यूरोलोजी के विभागाध्यक्ष डॉ. आरके गर्ग ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हिटलर ने भी कई प्रयोग किये थे, इनमें से एक था मानव शरीर पर चरम तापमान का सीधे प्रयोग करके यह देखा गया कि मानव शरीर कितने उच्च और कितने नीचे तापमान को सह सकता है. एक और प्रयोग उसने यह किया कि बच्चों के शरीर को आपस में जोड़ने का प्रयास किया गया था जिसमें बहुत सारे बच्चे और व्यक्तियों की जान चली गयी थी. उन्होंने बताया कि इसके बाद ही नैतिकता की गाइडलाइन बनाई गयी.

 

 

कार्यक्रम में प्रो. विनीता दास ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद थैलामाईड के प्रयोग से कई गर्भवतीयों को नुकसान हुआ था बच्चे जो पैदा हुए उनमें किसी न किसी प्रकार की कमी थी। इसलिए किसी भी शोध का चिकित्सकीय परीक्षण करने से पहले उसके सुरक्षा और उसके मानको से परिचित  होना चाहिए।

 

कार्यक्रम में डा0 एसएन शंखवार ने कहा कि किसी भी कार्य को इथिक्स के अनुरूप करने मे सफलता मिलती है। हमारा शोध पत्र तब तक प्रस्तुत नही होगा जबतक कि वो इथिकल कमेटी से पास न हुआ हो। समारोह में आये हुए अतिथियों का स्वागत प्रो.संदीप तिवारी ने किया.