दूसरे राज्‍यों की तरह शिक्षक को सब्‍जी बेचने पर मजबूर न करें

-वित्‍तविहीन शिक्षकों के लिए राहत पैकेज की मांग दोहरायी डॉ राय ने

डॉ महेन्‍द्र नाथ राय

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। वेतन न मिलने के कारण वित्तविहीन शिक्षक इस समय बहुत ही तंगहाली में गुजर रहा है स्वपोषित विद्यालयों के प्रबंधकों ने आमदनी न होने के कारण वेतन देने के मामले पर अपनी मजबूरी दिखाते हुए हाथ खड़े कर दिये हैं। दुख की बात यह है की जो सरकार विपदा के इस समय दूसरे वर्गों के लिए मदद कर रही है उसे यह कर्मयोगी शिक्षक नहीं दिख रहा है। बीते मार्च में शिक्षा मंत्री के साथ यह तय हुआ था कि प्रत्येक शिक्षक के खाते में 15000 रुपये मानदेय आरटीजीएस द्वारा दिया जाएगा लेकिन यह मांग भी अभी पूरी नहीं हुई मेरा सरकार से अनुरोध है की फिलहाल शिक्षक की हालत को देखते हुए कम से कम 5000 रुपये प्रति माह की दर से आर्थिक राहत तत्काल प्रदान करें, जिससे यूपी के शिक्षक दूसरे राज्यों की तरह सब्जी बेचने पर मजबूर ना हों।

यह बात उत्‍तर प्रदेश माध्‍यमिक शिक्षक संघ चंदेल गुट के प्रदेशीय मंत्री, कालीचरन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य व लखनऊ खंड शिक्षक एमएलसी प्रत्‍याशी डॉ महेन्‍द्र नाथ राय ने एक विज्ञप्ति में कही है। डॉ राय ने कहा कि नागपुर के अखबारों में कुछ दिन पहले खबर प्रकाशित हुई कि गैर अनुदानित शिक्षक फल और सब्जियां बेच रहे हैं, पूरे देश के गैर अनुदानित शिक्षकों का यही हाल है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां 50,000 स्ववित्तपोषित शिक्षण संस्थानों में कार्य करने वाले लगभग 25 लाख शिक्षकों का परिवार आज सब्जी बेचने के स्तर तक पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा इसके लिए प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, को पत्र लिखकर इन शिक्षकों को आर्थिक सहायता देने का अनुरोध करते हुए पत्र भी भेजा गया था लेकिन अभी सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षक स्वाभिमानी होता है, शिक्षा देना उसका कार्य है कुछ हजार रुपए के वेतन पर कार्य करने वाला शिक्षक अपना घर चलाने के लिए ट्यूशन और कोचिंग में मेहनत करके अपना जीवन यापन करता है, लेकिन वह समाज के सामने कभी भी हाथ नहीं फैलाता है। डॉ राय ने कहा कि लॉक डाउन में एक तरफ जहां शिक्षकों को तीन चार महीने से वेतन नहीं मिला है वहीं दूसरी तरफ ट्यूशन भी बंद है उन्होंने कहा जब सरकारी कर्मचारियों को 1 महीने भी वेतन नहीं मिलता है तब उनकी हालत खराब हो जाती है, तो वित्‍त विहीन शिक्षकों की क्या चर्चा हो रही होगी इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को इस पर आपत्ति है कि हम क्यों आर्थिक राहत की मांग कर रहे हैं इस बारे में मेरा यह कहना है कि हमारा संगठन समान कार्य के लिए समान वेतन और एक समान सेवा नियमावली जो 1921 का इंटर मीडिएट एक्ट है उसी के द्वारा सबको समान रूप से आच्छादित करने की मांग करता रहा है। हमारे संगठन के नेताओं ने से 9 मार्च को शिक्षा मंत्री के साथ वार्ता में प्रत्येक शिक्षक को 15000 प्रति माह मानदेय देने की बात हुई थी, फिलहाल कोरोना महामारी के समय उत्पन्न हुई समस्या को देखते हुए तत्काल शिक्षकों के खाते में कम से कम 5000 प्रतिमाह की दर से आर्थिक राहत सरकार प्रदान करे। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों एवं पत्रकारों से भी अनुरोध किया है की वित्तविहीन शिक्षकों की आर्थिक दशा का संज्ञान लेते हुए एक मुहिम चलाएं जिससे सरकार को उनकी मदद करने के लिए आगे आना पड़े।