लकीर को काटकर नहीं, दूसरी बड़ी लकीर खींचकर छोटा करिये

‘सेहत टाइम्‍स’ का दृष्टिकोण

राजनीति करते-करते आज हम कहां आ गये हैं। जबकि सच तो यह है कि पक्ष है, तो विपक्ष है और विपक्ष है, तभी पक्ष है यानी एक-दूसरे के पूरक हैं दोनों। ऐसे में जनता ने जो आदेश (जनादेश) दिया है, उसे मानना पक्ष और विपक्ष दोनों का कर्तव्‍य ही नहीं दायित्‍व भी है। लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था का ताना-बाना एक दिन में नहीं बुना गया है। इसलिए इस व्‍यवस्‍था का मजाक उड़ा देना कहीं से उचित नहीं कहा जा सकता है। आज अगर भारतीय जनता पार्टी सत्‍ता में है तो कुछ साल पूर्व कांग्रेस, अन्‍य दल भी रहे हैं। भाजपा को सत्‍ता जनता ने सौंपी है। ऐसे में विपक्ष सरकार के हर काम का विरोध करने की जो राजनीति कर रहा है, वह अनुचित है। यह सही है कि सरकार की आलोचना करने का अधिकार है लेकिन आलोचना की वजह ठोस होनी चाहिये तभी उसे जनमानस का भी समर्थन मिलेगा। लेकिन इधर देखा यह जा रहा है कि सरकार के प्रत्‍येक कार्य की आलोचना करना सम्‍पूर्ण विपक्ष ने अपना धर्म बना लिया है। ध्‍यान रहे सही, गलत सभी कामों की अगर आलोचना करना ही विपक्ष का मकसद बन जायेगा तो विपक्ष के आरोपों का भी वजन गिरता जायेगा। एक समय था जब कांग्रेस की सत्‍ता में तूती बोलती थी। इंदिरा गांधी ने लम्‍बे समय तक देश पर राज किया, आजादी के बाद अधिक समय तक सत्‍ता कांग्रेस के ही पास रही, तो आखिर भाजपा को सत्‍ता में आने का मौका कैसे मिला, कुछ तो ऐसा रहा होगा न जो जनता ने सत्‍ताधारी कांग्रेस और अन्‍य पार्टियों से अलग भारतीय जनता पार्टी में देखा होगा। यही नहीं जनता ने नरेन्‍द्र मोदी नीत भाजपा सरकार को देश की सत्‍ता लगातार दूसरी बार भी सौंपी तो ऐसे में अगर वाकई सरकार कुछ गलत कर रही है, और वह जनविरोधी है तो विपक्ष चुनाव के समय का इंतजार करे, जनता भाजपा को भी सबक सिखा देगी। यह ध्‍यान रखना होगा कि  इस तरह से नकारात्‍मक व्‍यवहार करके विपक्ष जनता को गलत संदेश ही दे रहा है। विपक्षी पार्टियों के कृत्‍य उसकी हताशा ही जता रहे हैं। अफसोस तो इस बात का है कि विपक्ष सरकार का विरोध करते-करते ऐसे कृत्‍य कर रहा है जो देश के दुश्‍मन को भारत के खिलाफ षड़यंत्र करने का मौका दे रहे हैं। याद रखना होगा कि स्‍वस्‍थ बहस, स्‍वस्‍थ विरोध जरूर होना चाहिये, विरोध होना चाहिये जनता की भलाई के लिए, क्‍योंकि भारत में जनतंत्र है। राजनीतिक दल तो व्‍यवस्‍था को चलाने वाले किरदार हैं जिसे जनता चुनती है वह इस किरदार को निभाता है। विपक्ष को लगता है कि मोदी सरकार गलत कर रही है तो उसका हिसाब जनता चुनाव में लेगी। जनता बहुत जागरूक है, वह सब समझती है, विपक्ष को समझना चाहिये कि अगर वह नकारात्‍मक राजनीति करेंगे तो जनता में उनकी छवि अच्‍छी नहीं बल्कि खराब होगी। इसलिए जनता के मन में अपनी अच्‍छी जगह बनाने के लिए विपक्ष को चाहिये कि वह सरकार की जनता के मन में मोदी सरकार के प्रति बनी अच्‍छी छवि की लाइन को काटकर छोटा न करे, बल्कि बगल में बड़ी लाइन खींचने के कार्य करे…

                                            -धर्मेन्‍द्र सक्‍सेना