न हों भ्रमित, टीका है सुरक्षित : डॉ. सूर्यकान्त

– कई ट्रायल व परीक्षणों के बाद उतारी गयी कोविड वैक्सीन
– चिकित्सक पहले लगवा रहे टीका फिर कैसी चिंता

16 जनवरी, 2021 को टीका लगवाते समय डॉ सूर्यकान्त की फाइल फोटो


सेहत टाइम्स ब्यूरो

लखनऊ। कोविड-19 की वैक्सीन को लेकर समुदाय में व्याप्त भ्रांतियों को चिकित्सकों ने पूरी तरह से आधारहीन और बेबुनियाद करार दिया है । उनका कहना है कि लोगों में भरोसा कायम करने के लिए ही इसका टीका सबसे पहले हम चिकित्सक लगवा रहे हैं। इसके अलावा वैक्सीन को कई दौर के ट्रायल और परीक्षण के बाद ही उतारा गया है, इसलिए उसकी गुणवत्ता को लेकर किसी को किसी भी तरह की शंका करने की जरूरत नहीं है । टीका लगने के बाद हल्का बुखार या दर्द की शिकायत होती है तो उससे घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह छोटी-छोटी दिक्कत किसी भी टीके को लगवाने के बाद हो सकती है । हालांकि इस तरह की दिक्कत भी पहले दिन के टीकाकरण के बाद बहुत ही कम सामने आई है।

​किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कलाम सेंटर में बने टीकाकरण केंद्र पर पहले दिन (16 जनवरी) सबसे पहले टीका लगवाने वाले रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष व कोरोना टास्क फ़ोर्स के सदस्य डॉ. सूर्यकान्त का कहना है यदि कोई कहता है कि कोविड-19 वैक्सीन के गंभीर दुष्प्रभाव हैं तो उनको यही बताना चाहूँगा कि ऐसा कतई नहीं हैं। अपना उदाहरण देते हुए वह कहते हैं कि टीका लगवाकर आधा घंटा निगरानी कक्ष में रहने के बाद वह सीधे अपने विभाग पहुंचे और हर रोज की तरह कार्यों का निष्पादन किया। उन्होंने बताया कि यह भी संयोग है कि टीका लगने के बाद निगरानी की अवधि के दौरान खड़े होकर अनेक पत्रकार साथियों के प्रश्नों  के उत्तर देता रहा, यहां यह बताने का आशय है कि टीका लगवाने के बाद मुझे बैठने तक की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। उन्होंने कहा कि टीका लगे हुए एक हफ्ता होने को आ रहा है और अभी तक कोई दिक्कत नहीं महसूस हुई है । उनका कहना है कि जैसा कि अन्य वैक्सीन के लगने के बाद हल्का बुखार, दर्द का दुष्प्रभाव होता है वैसा महसूस हो तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

​प्रदेश स्तरीय कोविड टीकाकरण समिति के सदस्य डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि कुछ लोग यह भी सवाल करते हैं कि भारतीय वैक्सीन अन्य देशों की वैक्सीन की तुलना में कम प्रभावकारी है तो उनको बताना चाहूंगा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है । भारतीय वैक्सीन कई ट्रायल और परीक्षणों से गुजरने के बाद हम लोगों को लगाने के लिए उतारी गयी है । यह कोरोना के खिलाफ पूरी तरह सटीक और प्रभावकारी होने के साथ सुरक्षित भी है । वैक्सीन यूके में मिले कोरोना के नए प्रकार से सुरक्षा नहीं प्रदान करने जैसे सवाल पर यही कहना चाहूंगा कि इस तरह का कोई प्रमाण मौजूद नहीं है कि वैक्सीन यूके तथा दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के नए प्रकार के खिलाफ कारगर नहीं है ।


​डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि लोगों में एक यह भी मिथक है कि यह वैक्सीन सिर्फ सीनियर सिटीजन, 10 साल से कम उम्र के बच्चों और स्वास्थ्य कर्मियों को ही लगेगी तो उनको बताना चाहूँगा कि ऐसा कतई नहीं है। सरकार ने पहले टीकाकरण के लिए अत्यधिक जोखिम वाले समूहों को चुना है । सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मी, फ्रंट लाइन वर्कर्स फिर 50 साल से अधिक उम्र के लोग, पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों और उसके बाद धीरे-धीरे वैक्सीन उन सभी को उपलब्ध होगी, जिन्हें जरूरत है। उनका कहना है कि इतना जरूर ध्यान रहे कि यह वैक्सीन 18 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को नहीं लगनी है ।  उनका कहना है कि लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि टीकाकरण के बाद मास्क पहनने या कोई भी सावधानी बरतने की जरूरत नहीं होगी तो उनको बताना चाहूँगा कि ऐसी गलती बिल्कुल न करें। टीकाकरण के बाद भी मास्क पहनना, शारीरिक दूरी का पालन करने जैसी सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी होगा ।