Saturday , October 23 2021

रोगियों को डायग्‍नोसिस, प्रतिभागियों को नौकरी का रास्‍ता मिला पीएफटी कार्यशाला से

केजीएमयू के रेस्‍पाइरेटरी मेडिसिन विभाग में दो दिवसीय कार्यशाला का समाप्‍त

 

लखनऊ। इंडियन चेस्‍ट सोसाइटी ने एक बार फि‍र अपनी सामाजिक जिम्‍मेदारी निभाते हुए स्‍पाइडोमेट्री टेस्‍ट करने संबंधी प्रशिक्षण देकर पीएफटी जांच तकनीशियन तैयार किये हैं। इस तरह से कार्यशाला से जहां रोगियों के हित में कार्य हुआ है वहीं तकनीकी प्रशिक्षण पाकर तकनीशियनों को भी काम करने के अवसर तलाश करने का मौका दिया है। यहां से मिला प्रशिक्षण उनकी आजीविका का साधन बन सकता है। ज्ञात हो सांस के रोगों को पहचानने के लिए प्रामाणिक टेस्‍ट स्‍पाइडोमीटर से ही किया जाता है। लेकिन इस प्रशिक्षण को देने वाले संस्‍थान देश में बहुत ही कम हैं, जबकि अन्‍य ओटी टेक्नीशियन, एक्‍सरे टेक्‍नीशियन आदि का कोर्स कराने वाले संस्‍थान मौजूद हैं।

 

सांस के रोगों को पहचानने के लिए किया जाने वाला प्रामाणिक स्‍पाइडोमेट्री टेस्‍ट के प्रशिक्षण के लिए दो दिवसीय पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) प्रशिक्षण की कार्यशाला का आयोजन किया। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय के रेस्‍पाइरेटरी मेडिसिन विभाग में आयोजित हुई इस कार्यशाला में प्रशिक्षण लेने वाले तकनीशियनों के लिए यह प्रशिक्षण वरदान साबित होगा। गुरुवार को सम्‍पन्‍न हुई कार्यशाला में इंडियन चेस्‍ट सोसाइटी के अध्‍यक्ष रहे केजीएमयू के रेस्‍पाइरेटरी विभाग के विभागाध्‍यक्ष प्रो सूर्यकांत ने प्रशिक्षण लेने वालों को सार्टीफि‍केट प्रदान किये।

 

प्रो0 सूर्यकान्त ने बताया कि इंडियन चेस्ट सोसाइटी द्वारा इस तरह की प्रशिक्षण कार्यशाला पिछले दस वर्षों से देश के दस केन्द्रों पर कराई जाती है, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग केजीएमयू उनमें से एक है। पीएफटी जांच से सांस की बीमारियों का प्रारम्भिक अवस्था में पता लगाया जाताहै। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को फेफड़ों की संरचना, कार्य विधि एवं कार्य क्षमता इत्यादि के विषय में बताया गया। साथ ही साथ पीएफटी मशीन के द्वारा रोगियों की जांच कैसे की जाती है, इसका भी पूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इंडियन चेस्ट सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष प्रो0 सूर्यकान्त ने बताया कि भारत में लगभग 3 करोड़ अस्थमा एवं 3 करोड़ सीओपीडी के मरीज है, जिनमें से आधे से ज्यादा सांस के मरीजों की प्रमाणिक जांच नहीं हो पाती है। पीएफटी के द्वारा फेफड़े के कारण होने वाले समस्त सांस के रोग जैसे सी.ओ.पी.डी., अस्थमा, ब्रोनकाइटिस, इंटेसटिटियल लंग डिजीजेस (आई.एल.डी) इत्यादि बीमारियों की तीव्रता का मापन कर के इनका निदान किया जाता है।

इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एण्ड एप्लाइड इम्यूनोलोजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रो0 सूर्यकान्त ने कहा कि विभिन्न प्रदेशों से आये हुए प्रतिभागी जब यहां से प्रशिक्षण लेकर जायेंगे तो हमारे समाज के सांस के रोगियों की जांच में लाभदायक सिद्ध होंगे। समापन समारोह में प्रो सूर्यकान्त ने सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट प्रदान करते हुए उनके उज्‍ज्वल भविष्य की कामना की और सभी लोगों के साथ ग्रुप फोटो लेने के बाद प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न हुयी। इस कार्यशाला में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रो एस. के. वर्मा, प्रो राजीव गर्ग, प्रो संतोष कुमार, डा अजय वर्मा,  डॉ आनंद श्रीवास्तव और डॉ दर्शन बजाज भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम को क्रियांवित करने में सीनियर रेजिडेन्ट डा0 ज्योति बाजपेयी, डा0 मनोज पाण्डेय, पी.एफ.टी. लैब के इंचार्ज सुनील मौर्या तथा उनकी टीम और शोध छात्र अनुज पाण्डेय ने भरपूर सहयोग प्रदान किया