सीधे जान बचाने में इन्‍वॉल्‍वमेंट होता है क्रिटिकल केयर में, इसीलिए चुना

-एमडी में गोल्‍डमेडलिस्‍ट पाने वाली डॉ अपूर्वा माता-पिता को देती हैं  अपनी सफलता का श्रेय

डॉ अपूर्वा गुप्‍ता

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। बचपन से ही दिमाग में था कि डॉक्‍टर बनने का मतलब किसी की जान बचाना। एनेस्‍थीसियोलॉजी तो पूरी ही लाइफ सेविंग ब्रांच है,  और इसमें भी क्रिटिकल केयर ऐसी ब्रांच है जिसमें मरते हुए व्‍यक्ति को बचाने का सीधा मौका मिलता है। इसीलिए मैंने डीएम करने में क्रिटिकल केयर मेडिसिन को चुना है।

यह कहना है केजीएमयू में आज हुए दीक्षांत समारोह में एनेस्‍थीसियोलॉजी में एमडी करने वाली गोल्‍ड मेडलिस्‍ट डॉ अपूर्वा गुप्‍ता का। उनसे पूछा था कि एनेस्‍थीसियोलॉजी में डीएम करने के लिए आपने क्रिटिकल केयर मेडिसिन को क्‍यों चुना। उन्‍होंने बताया कि उनका डॉक्‍टरेट ऑफ मेडिसिन (डीएम) में लुधियाना के डीएमसीएच में एडमिशन हो गया है। डॉ रश्मि मेमोरियल गोल्‍ड मेडल प्राप्‍त करने वाली डॉ अपूर्वा अपनी इस विशेष सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं।डॉ अपूर्वा की इच्‍छा एकेडमिक में जाने की है।

डॉ अपूर्वा ने एमबीबीएस की पढ़ाई आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज से की है। डॉ अपूर्वा यहां पर अपने टीचर्स की तारीफ करना नहीं भूलती हैं, उन्‍होंने कहा कि यहां टीचर्स बहुत कोऑपरेट करते हैं, आपको हर चीज बहुत अच्‍छे से समझाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, इससे सीखने वाले के मन में भी सीखने की लालसा बढ़ जाती है।